बाल शोषण पर निबंध essay on child abuse in hindi

essay on child abuse in hindi

दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं बाल शोषण पर लिखे इस निबंध को । चलिए अब हम पढ़ेंगे बाल शोषण पर लिखे इस निबंध को । बाल शोषण देश , विदेश की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है ।

essay on child abuse in hindi
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बाल शोषण से बच्चों के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है । बच्चे अक्सर मानसिक रोगी बन जाते हैं । बाल शोषण को रोकने के लिए भारत सरकार के द्वारा कई कानून बनाए गए हैं । बाल शोषण की चपेट में 18 साल से कम उम्र के बच्चे आते हैं । बाल शोषण के कारण बच्चे डिप्रेशन में तक चले जाते हैं । बाल शोषण  के कारण  बच्चों की सोचने समझने की शक्ति कमजोर हो जाती है । बच्चों पर घर के नौकर या पड़ोसी जब अत्याचार करते हैं , उनको डराते हैं , धमकाते हैं तब बच्चा मानसिक तौर पर परेशान होने लगता है और वह अपने माता-पिता से भी इस विषय में बातचीत नहीं कर पाता है जिससे वह बच्चा डिप्रेशन में चला जाता है ।

बहुत से बच्चे डर के कारण आत्महत्या तक कर लेते हैं । बच्चों को बाल शोषण से बचाने के लिए माता-पिता की यह जिम्मेदारी बनती है की वह बच्चों को जागरूक करें , बच्चों को यह बात बताएं कि यदि कोई व्यक्ति परेशान करें, डराए या धमकाए तो इसकी जानकारी जल्द से जल्द माता-पिता को दें । यह छोटी समस्या नहीं है बाल शोषण के कारण कई बच्चे अपनी जान तक गंवा देते हैं । हमें अपने बच्चों को बाल शोषण से बचाए रखने के लिए बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखना चाहिए । यदि बच्चा चिड़चिड़ा सा दिखाई देता है तब माता पिता को बच्चे से प्यार से बात करना चाहिए और बच्चे की परेशानी का कारण पूछना चाहिए ।

इस स्थिति में माता पिता को अपने बच्चे को धमकाना या डराना नहीं चाहिए । डराने से बच्चा अपने माता पिता से खुलकर बात नहीं कर पाता है । यदि कोई भी व्यक्ति 18 साल के कम उम्र के बच्चे पर अत्याचार करता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाती है । घर के पास में रहने वाले पड़ोसी या रिश्तेदारों के द्वारा बच्चों का बाल शोषण सबसे ज्यादा किया जाता है । जब हम ऐसे व्यक्तियों को देखते हैं तब हमें बिल्कुल भी इस बात का अंदेशा नहीं रहता है कि वह हमारे बच्चे को प्रताड़ित कर रहा है । वह व्यक्ति हमारे बच्चे को डराता , धमकाता है ,बच्चों से अश्लील बातें करता है जिससे वह बच्चा मानसिक रोगी बन जाता है ।

अधिकतर बच्चे इस स्थिति में डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं । उस बच्चे का व्यवहार चिड़चिड़ा सा हो जाता है । कुछ बच्चे अपने माता पिता से अपशब्द भी बोलने लगते हैं । जब कोई बच्चा कम बोलने लगता है , उसका व्यवहार चिड़चिड़ापन सा हो जाता है , वह किसी से कुछ भी बात नहीं करता है तब उसके परिवार वालों को उस बच्चे पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए । इस स्थिति में बच्चे को डराना नहीं चाहिए बल्कि उस बच्चे से प्यार से बात करना चाहिए । यदि कोई हमारे बच्चे को प्रताड़ित कर रहा है तो इस स्थिति में हमें उस व्यक्ति के खिलाफ पुलिस थाने में एफ आई आर दर्ज कराना चाहिए । हमें अपने बच्चे के भविष्य के साथ कभी भी खिलवाड़ नहीं करना चाहिए ।

बाल शोषण की घटनाएं कई बार सामने आई हैं । बाल शोषण की घटनाएं निरंतर बढ़ने के कारण भारत सरकार ने 2011 में एक नियम पारित किया था और 2012 में संसद से यह नियम पारित करा लिया था । इस नियम के तहत यदि कोई भी व्यक्ति बच्चों को प्रताड़ित करता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी , उसको सजा दिलाई जाएगी । घर के माता पिता एवं परिवार वालों को भी इस बात की पूरी जानकारी होनी चाहिए कि उनका बच्चा किस व्यक्ति से मिल रहा है । बाल शोषण की समस्या सबसे जटिल समस्या है इस समस्या से निपटने के लिए हमें हमारे बच्चों को जागरुक करना चाहिए जिससे कि हमारे बच्चे निडर हो ।

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