विजयराघवगढ़ किले का रहस्य व् इतिहास vijayraghavgarh fort history in hindi

vijayraghavgarh fort history in hindi

vijayraghavgarh ka kila – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से  विजयराघवगढ़ किले के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और  विजयराघवगढ़ किले के इतिहास एवं रहस्य के बारे में जानते हैं ।

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Image source – https://en.m.wikipedia.org/wiki/Vijayraghavgarh

विजयराघवगढ़ किले का इतिहास – विजयराघवगढ़ किले का इतिहास काफी प्राचीन समय का है । विजयराघवगढ़ किले का निर्माण मैहर के राजा प्रयाग दास ने करवाया था । इस विजयराघवगढ़ किले का निर्माण कार्य 1826 को शुरू किया गया था । जब मैहर के राजा प्रयाग दास ने इस किले का निर्माण कार्य शुरू करने का विचार बनाया था तब राजा प्रयाग दास के द्वारा कई कलाकार एवं नक्काशी करने वालों को बुलाया गया था । उन कलाकारों को विजयराघवगढ़  किले का निर्माण करने के लिए कहा गया था ।

इस विजयराघवगढ़ किले के निर्माण में मैहर के राजा प्रयाग दास ने किसी तरह की कोई भी कमी नहीं रखी थी । मैहर के राजा प्रयाग दास विजयराघवगढ़ किले  के निर्माण के लिए बहुत उत्साहित थे । मैहर के राजा प्रयाग दास बहुत ही साहसी और शक्तिशाली राजा थे । उन्होंने अपने बल पर कई लड़ाइयां जीती थी ।  विजयराघवगढ़ का किला मध्य प्रदेश के कटनी जिले के एक छोटे से कस्बे एवं नगर पंचायत में स्थित है । यह विजयराघवगढ़ किला 1857 की क्रांति के लिए प्रसिद्ध है ।

यह विजयराघवगढ़ किला प्रथम स्वतंत्रता सेनानी सरयू प्रसाद सिंह के किले के नाम से भी जाना जाता है । इस विजयराघवगढ़ किले में कई प्रसिद्ध मंदिर बने हुए हैं जिसकी सुंदरता देखने के लायक है । इस विजयराघवगढ़ किले को अच्छी सुंदरता देकर बनाया गया है । यह विजयराघवगढ़ किला मध्य प्रदेश के कटनी जिले का सबसे सुंदर और सबसे अच्छा किला है । इस विजयराघवगढ़ किले को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आते हैं और इसकी सुंदरता की फोटो अपने कैमरे में खींच कर ले जाते हैं ।

यह विजयराघवगढ़ किला देश विदेशों में तक फेमस है । इस विजयराघवगढ़ किले की जितनी भी प्रशंसा की जाए उतनी कम है । इस विजयराघवगढ़ किले के चारों तरफ खाई बनी हुई हैं । इस विजयराघवगढ़ किले  को बाहर से कोई भी व्यक्ति आसानी से नहीं देख पाता है ।विजयराघवगढ़ किले के अंदर आने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है क्योंकि विजयराघवगढ़ किले के चारों तरफ खाई ही खाई है । विजयराघवगढ़ किले की खाई में पानी भरा हुआ है और कई तरह के जानवर उस पानी में रहते हैं ।

इसलिए यह विजयराघवगढ़ किला आसानी से नहीं दिखाई देता है । यह विजयराघवगढ़ किला बहुत सुंदर नक्काशी के लिए जाना जाता है । इस विजयराघवगढ़ किले को बनाने के लिए चूना और बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया था ।

विजयराघवगढ़ किले में रंग महल की सुंदरता – विजयराघवगढ़ किले में स्थित रंग महल की सुंदरता देखने के लायक है । इस विजयराघवगढ़ किले को बनाने के लिए कई तरह के रंगों को उपयोग में लाया गया था । इसलिए इस विजयराघवगढ़ किले की सुंदरता बहुत अच्छी लगती है । इस विजयराघवगढ़ किले में रंग महल को बनाने के लिए सबसे अच्छे कारीगरों को बुलाया गया था । कई कारीगरों को इस विजयराघवगढ़ किले में रंग महल को बनाने का काम दिया गया था । विजयराघवगढ़ किले का रंग महल देखने में बहुत सुंदर लगता है ।

इस विजयराघवगढ़ किले को जो भी व्यक्ति एक बार देखता है वह इसकी सुंदरता का दीवाना हो जाता है । देश विदेशों से कई पर्यटक विजयराघवगढ़ किले में स्थित रंग महल की सुंदरता को देखने के लिए आता है । जब कोई व्यक्ति इस रंग महल के अंदर प्रवेश करता है तब उसको बड़ा आनंद आता है और वह इसकी सुंदरता को कैमरे के माध्यम से फोटो खींच लेता है ।

मां शारदा के प्रसिद्ध मंदिर – इस विजयराघवगढ़ किले में मां शारदा के सबसे प्रसिद्ध मंदिर बनाए गए हैं । कई हिंदू धर्म के लोग देश के कोने कोने से मां शारदा के मंदिर के दर्शनों के लिए विजयराघवगढ़  किले में आते हैं और मां शारदा के मंदिर में माथा टेककर मां शारदा से विनती करते हैं । जो भी व्यक्ति कटनी जाता है वह विजयराघवगढ़ किले में घूमने के लिए अवश्य जाता है । क्योंकि यह सबसे प्रसिद्ध किला है । इस विजयराघवगढ़ किले में मां शारदा के प्रसिद्ध मंदिर बने हुए हैं जिसकी सुंदरता देखने के लायक है ।

विजयराघवगढ़ किले में पचमठा धाम और बंजारी माई का मंदिर – विजयराघवगढ़ किले में पचमढ़ी धाम और बंजारी माई का मंदिर सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है । इस मंदिर को देखने के लिए काफी पर्यटक आते हैं और इसकी सुंदरता को देखकर मोहित हो जाते हैं । विजयराघवगढ़ किले की सुंदरता बहुत अच्छी है । बाहर से आसानी से इस विजयराघवगढ़ किले  को नहीं देखा जा सकता है । इसलिए कई परेशानियां झेल कर इस विजयराघवगढ़ किले को देखने के लिए कई पर्यटक किले के अंदर आते हैं और विजयराघवगढ़ किले की सुंदरता को देखकर खुश हो जाते हैं ।

यह विजयराघवगढ़ किला राजा प्रयाग दास के द्वारा बनवाया गया था । यह विजयराघवगढ़ किला इतना मजबूत बनाया गया था की जो भी इस विजयराघवगढ़ किले को एक बार देखता है वह इस किले की सुंदरता को देखकर मोहित हो जाता है ।

विजयराघवगढ़ किला 1857 की क्रांति का सबसे प्रसिद्ध किले के रूप में जाना जाता है – विजयराघवगढ़ का किला 1857 की क्रांति के लिए प्रसिद्ध है क्योंकि इस विजयराघवगढ़ किले  में 1857 की लड़ाई लड़ी गई थी ।मैहर के राजा प्रयाग दास के पुत्र सरजू प्रसाद ने अंग्रेजों से लोहा लिया था और अंग्रेजों को यह बता दिया था कि यदि अंग्रेजों ने इस विजयराघवगढ़ के किले में आने की कोशिश की तो उनको इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा । अपनी जान जोखिम में डालकर अंग्रेजों से लोहा लेकर इस विजयराघवगढ़ किले की रक्षा की थी और अंग्रेजों को हराया था ।

अंग्रेजों ने जब इस विजयराघवगढ़ किले पर कब्जा करने के लिए हमला किया तब वह यह नहीं जानते थे कि इस किले की दीवारें बहुत मजबूत हैं । किले की दीवारें मजबूत होने के कारण अंग्रेज इस लड़ाई में हार गए थे और मैहर के राजा सरजू प्रसाद ने यह लड़ाई जीत ली थी । 1857 की क्रांति में मैहर के राजा प्रयाग दास के पुत्र सरजू प्रसाद ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और अंग्रेजों से डटकर लोहा लिया था । जब 1845 में मैहर के महाराज राजा प्रयाग दास का निधन हो गया था तब विजयराघवगढ़ का राजा उनके पुत्र सरजू प्रसाद को बनाया जाना था ।

परंतु कुछ अटकलें लग गई थी लेकिन महाराज प्रयाग दास के निधन के 5 साल बाद उनके पुत्र सरजू प्रसाद को वहां का उत्तराधिकारी बनाया गया था ।विजयराघवगढ़ की पूरी जागीर उनको विरासत में मिल गई थी । जब विजयराघवगढ़ की पूरी जागीर सरजू प्रसाद को मिली तब उनका राज्याभिषेक कराया गया था । जब सरजू प्रसाद  का  राज्याभिषेक कराया गया था  तब उन्होंने यह प्रण लिया था कि महाराज प्रयाग दास के द्वारा जो यह विजयराघवगढ़ किला बनवाया गया है उसकी रक्षा के लिए वह अपनी जान तक दे देंगे ।

इसलिए जब अंग्रेजो के द्वारा विजयराघवगढ़ किले पर हमला किया गया तब उन्होंने डटकर अंग्रेजों का सामना किया था और विजयराघवगढ़ किले को अपने कब्जे में लेकर के रखा था । पुरातत्व विभाग के लोगों का भी यह मानना है कि जब 1857 की लड़ाई चल रही थी तब उस समय जबलपुर क्षेत्र में सबसे साहसी शूरवीर योद्धा के रूप में सरजू प्रसाद डटकर अंग्रेजों का सामना कर रहे थे । इसलिए सरजू प्रसाद को शूरवीर योद्धा कहा जाता है । उन्होंने डटकर अंग्रेजों का सामना किया था ।

1857 की क्रांति के अंत में अक्टूबर महीने में उन्होंने अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह छेड़ दिया था । सरजू प्रसाद ने तहसीलदार सुजीत अली को मारकर वहां पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया था और डाक घोड़ों पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया था । तहसीलदार सुजीत अली को हराने के बाद वह अपनी सेना के साथ आगे बढ़े और अंग्रेजों से लोहा लिया था । कुछ समय के बाद अंग्रेजों की सेना और उनके वफादार रीवा सैनिक दलों ने उन पर आक्रमण कर दिया था ।

सरजू प्रसाद ने उन आक्रमणकारियों का डटकर सामना किया था और उन को हराया था । यह युद्ध जीतने के बाद वह विजयराघवगढ़ किले की ओर चले गए थे । विजयराघवगढ़ किले की हिफाजत करने के साथ-साथ सरजू प्रसाद पर विजयराघवगढ़ में रहने वाले लोगों की हिफाजत करने का भी जिम्मा उनके ऊपर था । सरजू प्रसाद वहां के नागरिकों की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते थे ।

यह विजयराघवगढ़ किला कई रहस्यों एवं खजाने के लिए जाना जाता है – यह विजयराघवगढ़ किला खजाने के लिए प्रसिद्ध है । कई लोगों के द्वारा कई तरह की कहानियां इस विजयराघवगढ़ किले  को लेकर सुनाई जाती हैं और यह बताया जाता है कि इस विजयराघवगढ़ किले में पुराना खजाना छिपा हुआ है । कई तरह की अफवाह लोगों के द्वारा फैलाई जाती हैं कि इस विजयराघवगढ़ किले  में पुराना खजाना दबा हुआ है । आज भी यह विजयराघवगढ़ किला पुराने खजाने के लिए जाना जाता है और काफी लोग इस विजयराघवगढ़ के किले को देखने के लिए आतेे हैं ।

जब कोई विजयराघवगढ़ किले के अंदर जाता है तब वह इस विजयराघवगढ़ किले के इतिहास को जानने की कोशिश करता हैं । जो भी व्यक्ति इस विजयराघवगढ़ के किले के इतिहास को पढ़ता है तो वह इस विजयराघवगढ़ किले  को देखने के लिए अवश्य आता है । इस विजयराघवगढ़ किले के चारों तरफ खाई हैं और वह खाई किसी को दिखाई नहीं देती है । बाहर से कोई भी इस  विजयराघवगढ़ किले को स्पष्ट रूप से नहीं देख सकता है क्योंकि इस विजयराघवगढ़ किले को इस तरह से बनाया गया है कि जब कोई दुश्मन इस किले पर आक्रमण करें तो वह इस किले को स्पष्ट रूप से ना देख पाए ।

जब तक आक्रमणकारी इस विजयराघवगढ़ किले  को देखने की कोशिश करेंगे तब तक  सैनिकों के द्वारा उन पर आक्रमण कर दिया जाता था । कई ऐसे रहस्य इस विजयराघवगढ़ किले में छुपे हुए हैं जिसको जानने की इच्छा सभी को होती है । इस विजयराघवगढ़ किले में ना दिखने वाला दरवाजा भी है । इस दरवाजे को बड़ी गहराई से देखना पड़ता है । इस विजयराघवगढ़ किले के अंदर 7 दरवाजे वाली बावड़ी भी है जिसकी सुंदरता देखने के लायक है ।सात दरवाजे इस बावड़ी में लगे हुए हैं ।

विजयराघवगढ़ किले के अंदर सबसे सुंदर देखने लायक स्थान – विजयराघवगढ़ किले के अंदर कई ऐसे प्रसिद्ध स्थान हैं जिसको देखने के लिए देश विदेशों से पर्यटक आते हैं और इसकी सुंदरता को अपने कैमरे में कैद करके ले जाते हैं क्योंकि इसकी सुंदरता देखने के लायक है । जो भी व्यक्ति इसकी सुंदरता को एक बार देखता है वह दोबारा इस विजयराघवगढ़ किले को देखने के लिए अवश्य आता है क्योंकि इसकी सुंदरता बहुत अच्छी है ।काफी लोग इस विजयराघवगढ़ किले की सुंदरता की प्रशंसा करते हैं ।

इस विजयराघवगढ़ किले के अंदर विजय के प्रतीक के रूप में पहचाने जाने वाले प्रतीक राघव जी का भव्य मंदिर भी बनाया गया है । जिसकी सुंदरता देखने के लायक है । यह बहुत ही सुंदर है । इस विजयराघवगढ़ किले  को बनाने के लिए रनिवास का आकार दिया गया है जिससे इसकी सुंदरता बहुत अच्छी और दर्शनीय है । इस  विजयराघवगढ़ किले के अंदर गढ़ी के निर्माण की कलाकृति बहुत अच्छी और सुंदर बनाई गई है । किले के चारों तरफ बहुत ही सुंदर लाजवाब नक्काशी की गई है ।

जब हम इस किले के अंदर की नक्काशी को देखते हैं तब हमें बहुत अच्छा लगता है क्योंकि यह नक्काशी बहुत मेहनत और लगन से की गई है । इस किले के अंदर राजा सरजू प्रसाद का किला भी बनाया गया है क्योंकि राजा सरजू प्रसाद एक शक्तिशाली योद्धा थे । उन्होंने 1857 की क्रांति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था । 1857 की क्रांति में उनके योगदान को हम कभी भी भुला नहीं सकते हैं । किले के अंदर बावड़ी सबसे प्रसिद्ध जगह है । इस जगह को देखने की इच्छा हम सभी की करती है क्योंकि बावड़ी बहुत प्रसिद्ध स्थान है ।

इस विजयराघवगढ़ किले के अंदर गुड़िया महल भी है जिसको देखने के लिए लोग आते हैं । कई तरह के स्मारक इस विजयराघवगढ़ किले के अंदर बनाए गए हैं । इस विजयराघवगढ़ किले के अंदर के शिलालेख देखने के लायक है । जो भी इस विजयराघवगढ़ किले के अंदर जाता है वह प्रसन्न हो जाता है क्योंकि इस  विजयराघवगढ़ किले की सुंदरता बहुत अच्छी है । विजयराघवगढ़ किले के अंदर गुप्त द्वार , समाधि स्थल भी हैं । गुप्त द्वार और समाधि स्थल को देखने के लिए देश विदेशों से पर्यटक आते हैं और इसकी सुंदरता को देखते हैं ।

यह भारत के मध्य प्रदेश राज्य के कटनी जिले का सबसे प्रसिद्ध किला है । यह किला प्रथम स्वतंत्रता सेनानी राजा सरजू प्रसाद के किले के नाम से प्रसिद्ध है । इस विजयराघवगढ़ किले को देखने के लिए काफी पर्यटक आते हैं । इस विजयराघवगढ़ किले के चारों तरफ कई तरह की खाई भी है जो आज भी मौजूद हैं । इस खाई में कई जानवर निवास करते हैं । विजयराघवगढ़ किले के चारों तरफ दीवारों पर कई प्रकार के छेद बनाए गए हैं ।

यह छेद इसलिए बनाए गए हैं कि जब कोई आक्रमणकारी किले पर आक्रमण करें तब उस पर पूरी नजर रखी जाए और सही समय पर दुश्मनो पर हमला किया जाए ।

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