महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का जीवन परिचय Vashishtha narayan singh biography in hindi

Vashishtha narayan singh biography in hindi

Vashishtha narayan singh – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से भारत देश के महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के जीवन परिचय के बारे में बताने जा रहे हैं । तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस आर्टिकल को पढ़कर भारत के महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के जीवन परिचय के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Vashishtha narayan singh biography in hindi
Vashishtha narayan singh biography in hindi

Image source – https://commons.m.wikimedia.org/wiki/File:A_Great_Mathematicia

महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के जीवन परिचय और परिवार के बारे में – भारत के महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का जन्म भारत देश के बिहार राज्य के भोजपुर जिले के बसंतपुर गांव में 2 अप्रैल 1942 को हुआ था । भारत के महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के पिता पुलिस विभाग में कार्यरत थे । महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का विवाह बंदना रानी सिंह से हुआ था ।

 भारतीय महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह की शिक्षा के बारे में –  महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण की उम्र जब पढ़ने लिखने की हुई तब उनके माता-पिता के द्वारा उनको गांव के ही एक स्कूल में भर्ती करा दिया था । जहां से उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी । इसके बाद उनके पिता के द्वारा उनको आगे की पढ़ाई कराने के लिए नेतरहाट विद्यालय में भर्ती करा दिया गया था । जहां से वह अपनी आगे की पढ़ाई कर रहे थे । इसी विद्यालय से वशिष्ठ नारायण सिंह के द्वारा मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास की गई थी ।

मैट्रिक पास करने के बाद वह अपनी आगे की पढ़ाई करना चाहते थे जिसके लिए उन्होंने बिहार राज्य के पटना में स्थित पटना यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया और वहां से वह साइंस की पढ़ाई करने लगे थे । जब वह इस यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे तब उन पर कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन केली की नजर पड़ी और वह वशिष्ठ नारायण सिंह को पसंद करने लगे थे । इसके बाद वह वशिष्ठ नारायण सिंह को अपने साथ 1965 में अमेरिका ले गए थे और वहां पर वह कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने लगे और उन्होंने 1969 में कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की थी ।

महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के जीवन के बारे में – महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ने जब पीएचडी की डिग्री प्राप्त कर ली थी तब उनको वाशिंगटन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर की नौकरी करने के लिए आमंत्रित किया गया और उन्होंने उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था और वह वाशिंगटन विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर कार्य करने लगे थे । परंतु वशिष्ठ नारायण सिंह का मन अधिक समय तक वहां पर नहीं लगा और उन्होंने भारत लोटने का विचार बनाया और वह 1971 में वहां से भारत लौट कर वापस आ गए थे । इसके बाद उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर मे कार्य करके अपनी सेवाएं दी थी ।

इसके बाद वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई में कार्य करने लगे थे । इसके बाद उनको सांख्यिकी संस्थान कोलकाता में नियुक्त किया गया और कोलकाता में वह सांख्यिकी संस्थान में काम करने लगे थे । धीरे-धीरे समय व्यतीत होता गया और वह बहुत ही शिक्षित व्यक्ति होते गए थे । महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के व्यवहार के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वह अधिक क्रोधित हो जाते थे । जब वह परेशान और क्रोधित होते थे तब वह अपने आप को एक कमरे में बंद कर लेते थे । उनके इस व्यवहार को उनकी पत्नी बर्दाश्त नहीं कर पाई और उन्होंने वशिष्ठ नारायण सिंह से तलाक ले लिया था ।

इसके बाद वशिष्ठ नारायण सिंह अकेले हो गए और यह अकेलापन उनको बीमार करने लगा था । 1974 में उनको पहला दिल का दौरा पड़ा । दौरा पड़ने के बाद वह रांची के अस्पताल में अपना इलाज कराने के लिए गए और वहां पर उनका इलाज हुआ । परंतु उनकी बीमारी में सुधार नहीं हो रहा था । इसके बाद वह 1987 में अपने गांव लौट गए और गांव में अपने भाई और माता के साथ अपना जीवन व्यतीत करने लगे थे । उनकी हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही थी । उनके भाई उनका इलाज कराने के लिए रांची ले गए थे ।

जब वशिष्ठ नारायण सिंह 1989 में रांची से इलाज कराकर बेंगलुरु अपने भाई के साथ जा रहे थे तब रास्ते में ही खंडवा स्टेशन पर वशिष्ठ नारायण सिंह उतर गए और भीड़ में खो गए थे । बहुत खोजने के बाद वशिष्ठ नारायण सिंह नहीं मिले । जब 5 साल बीत गए थे तब वह गांव के ही एक व्यक्ति को नजर आए और उनका परिवार उनको वहां से ले आया था । जिसके बाद प्रदेश सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय मानसिक जांच एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान बंगलुरु में भर्ती करा दिया था । जहां पर उनका इलाज 1993 से 1997 तक चला था । इसके बाद वह अपने गांव वापस आ गए थे । परंतु उनकी मानसिक स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती जा रही थी ।

जब भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा की नजर उन पर पड़ी तब उन्होंने उनकी स्थिति को सुधारने के लिए 2002 में मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान में उनको भर्ती करा दिया गया था । जहां पर उनका 1 साल तक इलाज चला था । इसके बाद उनकी वहां से छुट्टी कर दी गई थी और वह अपने गांव वापस आ गए थे । 14 नवंबर 2019 को उन्हें हालत बिगड़ जाने के कारण पटना ले जाया गया जहां पर डॉक्टर  के द्वारा उनको मृत घोषित कर दिया गया था ।

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