भृगुनन्दन उतंग मुनि का जीवन परिचय Uttang muni biography in hindi

Uttang muni biography in hindi

दोस्तों नमस्कार, आज हम आपके लिए लाए हैं भृगुनन्दन उतंग मुनि के बारे में एक कथा, आप इसे जरूर पढ़ें यह कथा इंटरनेट पर दी गई जानकारी के आधार पर लिखी गई है तो चलिए पढ़ते हैं आज के हमारे इस आर्टिकल को

महाऋषि उतंग मुनि एक ऐसे महात्मा थे जो संसार का कल्याण करना चाहते थे, संसार के कल्याण के लिए वह एक बार मरुस्थल में तपस्या कर रहे थे, मरुस्थल में तपस्या करते करते उन्हें जोर की प्यास लगी, अपनी प्यास बुझाने के लिए वह पानी बरसने का इंतजार करने लगे।

दरअसल उत्तंग मुनि को श्री कृष्ण भगवान से यह वर था कि जब भी उन्हें प्यास लगेगी तब छोटे-छोटे बादल पानी बरसाएंगे और आपकी प्यास को दूर करेंगे तभी भगवान श्रीकृष्ण ने अपने वर को पूरा करने के लिए देवराज इंद्र को आदेश दिया कि वो उस स्थान पर अमृत जल की बरसात करें जहां पर उत्तंग मुनि तपस्या कर रहे हैं लेकिन देवराज इंद्र ने भगवान श्री कृष्ण से कहा कि भगवान हम मनुष्य को अमृत कैसे प्रदान कर सकते हैं? 

फिर श्री कृष्ण ने कहा की उत्तंग मुनि अमृत पाने के योग्य हैं आप उनकी परीक्षा ले सकते हैं तभी देवराज स्वयं एक चांडाल का रूप रखकर उत्तंग मुनि की परीक्षा लेने के लिए गए। चंदाल रूपी देवराज इंद्र ने उत्तंग मुनि से कहा कि मैं हमेशा अपने साथ पानी रखता हूं लगता है कि आपको भी काफी प्यास लगी है आप पानी पी सकते हैं तभी उत्तंग मुनि ने चांडाल को देखकर कहा कि मैं तुम्हारे हाथ से पानी तो क्या अमृत भी नहीं पी सकता इसके बाद चंदाल रूपी देवराज इंद्र वहां से अंतर्ध्यान हो गए।

अब उत्तम मुनि को अपनी भूल का पछतावा होने लगा वह सोचने लगे कि मैं लोगों के बीच में भेदभाव करता हूं, मैं एक अच्छा महात्मा नहीं हूं यह सोचते हुए अपने आपको दंड देने के बारे में सोचने लगे। मुनि अपने तप बल से अपने आपको खत्म करना चाहते थे लेकिन तभी श्रीकृष्ण प्रकट हुए और उन्होंने मुनि उत्तंग को रोका और कहा कि आपको लंबे समय तक पृथ्वी पर रहना है इसलिए आप ऐसा न कीजिए आप ही को महाभारत के बाद अब सत्य की स्थापना करनी होगी और सभी का कल्याण हो, इस ओर प्रयत्न करना होगा।

दोस्तों मुझे बताएं कि उत्तंग मुनि की यह कथा आपको कैसी लगी, यदि पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों में शेयर करना ना भूलें और हमें सब्सक्राइब जरूर करें।

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