टीपू सुल्तान का इतिहास Tipu sultan history in hindi

Tipu sultan history in hindi

Tipu sultan – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से टीपू सुल्तान के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं । तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस आर्टिकल को पढ़कर टीपू सुल्तान के इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Tipu sultan history in hindi
Tipu sultan history in hindi

Image source – https://commons.m.wikimedia.org/wiki/File:Tipu_Sultan_BL.jpg

टीपू सुल्तान के बारे में – टीपू सुल्तान मैसूर साम्राज्य का शासक था । टीपू सुल्तान का जन्म 30 नवंबर 1750 को भारत देश के कर्नाटक राज्य के देवनाहल्ली मे हुआ था ।यह बहुत ही साहसी और ताकतवर शासक था । जिसने कई सही काम करने के साथ-साथ कुछ ऐसे काम भी किए थे जिस काम की अवहेलना की गई है । टीपू सुल्तान के पिता का नाम हैदर अली था । जो मैसूर साम्राज्य का पहला सेनापति के तौर पर नियुक्त किया गया था । टीपू सुल्तान के पिता हैदर अली ने अपनी ताकत और शक्ति के बल पर तकरीबन 1761 ईसवी में मैसूर साम्राज्य मे अपना शासन स्थापित किया था ।

हैदर अली को वहां का पहला शासक नियुक्त किया गया था । टीपू सुल्तान के बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि टीपू सुल्तान को उस समय  मैसूर का शेर भी कहा जाता था । टीपू सुल्तान अपने साहस और बुद्धि के बल पर लड़ाई  लड़ता था और कई लड़ाइयो में उसने जीत भी हासिल की थी । टीपू सुल्तान एक विद्वान व्यक्ति भी था ।  उसकी बुद्धि और तर्क की प्रशंसा चारों तरफ की जाती थी । वह किसी भी युद्ध में जाने से घबराता नहीं था । इसके साथ-साथ टीपू सुल्तान एक कवि भी था ।  कई कविताएं उसके द्वारा लिखी गई थी । टीपू सुल्तान अपने राज्य के विकास के लिए निरंतर कार्य करता रहता था ।

टीपू सुल्तान एक ऐसा शासक था जिसने पिछड़े , दलित और गरीब जैसे लोगों को ऊपर उठाने का काम किया था , उनको आगे बढ़ाने का काम किया था । पिछले , दलितों पर जो अन्याय अगड़ो के द्वारा किए जा रहे थे । उनके अन्याय से सभी पिछड़े , दलितों को टीपू सुल्तान के द्वारा बचाया गया था ।  पिछड़े , दलितों को जो अधिकार मिलना चाहिए था पर अधिकार टीपू सुल्तान ने उनको दिलाए थे । इसलिए पिछड़े , दलित वर्ग के लोग टीपू सुल्तान को भगवान मानते थे , उनका सम्मान करते थे । टीपू सुल्तान महिला सशक्तिकरण का पक्षधर भी था ।

वह अपने राज्य की सभी महिलाओं का सम्मान करता था । जो व्यक्ति महिलाओं पर अत्याचार करता था उसको टीपू सुल्तान के द्वारा सख्त से सख्त सजा दी जाती थी । टीपू सुल्तान महिलाओं के विकास के लिए भी निरंतर कार्य करता रहता था । इसलिए टीपू सुल्तान के राज्य को महिला सशक्तिकरण राज्य कहा जाता था । टीपू सुल्तान एक ऐसा महान योद्धा था जिसने अपनी शक्ति और बुद्धि से कई शासकों से युद्ध करके उनको हराया था । वह एक ताकतवर शासक माना जाता था ।  टीपू सुल्तान के अच्छे कामों की प्रशंसा की गई थी । उसके कुछ बुरे कामों के कारण उसकी अवहेलना भी की गई थी ।

टीपू सुल्तान का सबसे गलत काम था हिंदुओं पर अत्याचार करके उनको मुस्लिम धर्म अपनाने को मजबूर करना । टीपू सुल्तान ने अपने शासनकाल में कई हिंदू को मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर कर दिया था । जिसके कारण उसके शासनकाल में उसकी अवहेलना की गई थी । परंतु कुछ ऐसे हिंदू थे जिन्होंने टीपू सुल्तान के इस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया था । जिसके कारण टीपू सुल्तान ने उन हिंदुओं की गर्दन काट के मार दिया गया था । कुछ हिंदू टीपू सुल्तान के आतंक से बचने के लिए उसके राज्य को छोड़ने को मजबूर हो गए थे ।

इस तरह से टीपू सुल्तान ने राज्य में कुछ अच्छे काम किए तो कुछ गलत काम किए थे । टीपू सुल्तान ने मैसूर साम्राज्य पर 10 सितंबर 1982 से शासन  प्रारंभ किया और मैसूर साम्राज्य पर टीपू सुल्तान का शासन 4 मई 1799 तक रहा था । जब तक वहां पर टीपू सुल्तान का शासन काल रहा था उसने कई ऐसे कार्य भी किए थे जिस कार्य ने  अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे । अंग्रेजों का टीपू सुल्तान के साथ शत्रुता थी । जिसके कारण अंग्रेज बहुत परेशान थे । अग्रेज मैसूर साम्राज्य को प्राप्त करना चाहते थे और टीपू सुल्तान मैसूर साम्राज्य को अंग्रेजों के अधीन नहीं करना चाहता था ।

जिसके लिए टीपू सुल्तान ने अपनी शक्ति के बल पर अंग्रेजों से लोहा लिया था । टीपू सुल्तान के द्वारा अंग्रेजों से तृतीय मैसूर युद्ध भी किया गया था ।  जब 1786 में लार्ड कार्नवालिस को भारत का गवर्नर नियुक्त किया गया था तब लार्ड कार्नवालिस ने टीपू सुल्तान को राज्य अंग्रेजों के हवाले करने को कहा गया था । परंतु  टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था । जिसके कारण लार्ड कार्नवालिस टीपू सुल्तान का सबसे बड़ा शत्रु था और अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान के खिलाफ लड़ाई का ऐलान कर दिया था ।

अंग्रेजों ने जब यह देखा कि टीपू सुल्तान एक पावरफुल शासक है , उससे युद्ध करना यानी मौत को चुनौती देना है तब अंग्रेजों ने निजाम के साथ संधि करने का विचार बना लिया था और अंग्रेजों ने निजाम के साथ संधि कर ली थी । निजाम के साथ साथ अंग्रेजों ने मराठों के साथ भी संधि कर ली थी । अंग्रेजों ने मैसूर साम्राज्य के शासक टीपू सुल्तान के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा खोल दिया था । जब अंग्रेजों ने देखा कि मराठों और निजाम के साथ मिलकर अंग्रेजों की ताकत दुगनी हो गई हैं तब अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान के खिलाफ युद्ध करने का फैसला किया था  और  युद्ध की घोषणा भी अंग्रेजों के द्वारा कर दी गई थी ।

जब टीपू सुल्तान और अंग्रेजो के बीच युद्ध हुआ तब युद्ध केे प्रारंभ  में टीपू सुल्तान ने अपनी पकड़ मजबूत बनाकर रखी थी । परंतु जैसे-जैसे यह युद्ध आगे बढ़ता गया तब अंग्रेज भी इस युद्ध में जीत हासिल करते गए थे । जब यह पाया गया कि युद्ध के कारण काफी हानि दोनों पक्ष को हो रही है तब मार्च 1792 श्रीरंगापटय की संधि की गई थी और युद्ध को समाप्त कर दिया गया था । इस संधि के अनुसार टीपू ने अपने राज्य का आधा हिस्सा अंग्रेजों को देने का निर्णय किया था । आधे हिस्से के साथ-साथ टीपू सुल्तान ने 30,000,00 पौंड भी अंग्रेजों को दे दिए थे ।

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