रविंद्रनाथ जी की पोस्टमास्टर की कहानी the postmaster by rabindranath tagore full story in hindi

the postmaster by rabindranath tagore full story in hindi

हेलो दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं रविंद्र नाथ टैगोर जी द्वारा लिखित कहानी पोस्टमास्टर चलिए पढ़ते हैं इनके द्वारा लिखी इस कहानी को मेरी भाषा में

the postmaster by rabindranath tagore full story in hindi
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image source-http://www.sliceofreallife.com/2012/05/21/ratan-a-study-on-how-a-lonely-heart-longs-for-affection/

पोस्ट मास्टर जिसको हम डाकिया भी कहते हैं पोस्ट मास्टर की पहली पोस्ट उलापुर हुई थी यह गांव बहुत ही छोटा गांव था और पोस्ट मास्टर कोलकाता का रहने वाला था जिस वजह से उसने इस तरह का वातावरण नहीं देखा था इस गांव में एक छोटा सा पोस्ट ऑफिस था जिसमें खपरेल चढे हुए थे इस पोस्ट ऑफिस के सामने ही एक तालाब था इस गांव में जंगल और खेत थे और बहुत सारे ऊंचे ऊंचे वृक्ष थे वह इससे पहले कभी ऐसे स्थान पर नहीं रहा जिस वजह से उसका इस गांव में कैसे मन लगता.

वह मन मारे यहां पर अपना काम करता था यहां पर काम भी कोई ज्यादा नहीं था आखिर फ्री रहते रहते वह बोर हो जाता था और जब भी वह फ्री रहता था वह तरह तरह की कविताएं लिखकर अपना मन बहलाता था अपनी कल्पनाओं की कविताओं से वह पोस्ट ऑफिस की कल्पना करता था वह ऐसे पोस्ट ऑफिस की कल्पना करता था कि जिसकी पक्की पक्की इमारते हो और कार्यालय में सभी सुख सुविधाएं हैं जब शाम का समय हो जाता तो गांव में धीरे-धीरे ऊपर धुआ होता जाता. पोस्ट मास्टर की तनख्वाह बहुत कम थी इसलिए वह स्वयं ही घर का खाना बनाता था लेकिन घर में एक 12 साल की लड़की को रखे हुआ था जिसे कुछ खर्चा मिल जाता वह घर के और काम करती.

पोस्ट मास्टर घर के एक कोने में एक दिए की लौ में बैठा रहता वह उस 12 साल की लड़की रतन को आवाज़ देता और रतन तभी अंदर आई वह बापूजी है को कुछ आगे नहीं बोलने देती और उसकी बीच में ही बात काटते हुए बोलती अपनी रसोई में अंगीठी जला दूं तब पोस्ट मास्टर कहता नहीं नहीं पहले हुक्का लेकर आओ. वह वहां से चली जाती और हुक्के की चिलम को ले आती

तभी उसने पूछा रतन तुम्हें कभी मां की याद नहीं आती तभी वह लड़की रतन अपने बारे में बताने लगती है वह पोस्ट मास्टर के पैरों के पास खड़ी थी कहती मुझे ज्यादा कुछ तो याद नहीं है लेकिन बस इतना याद है कि मेरे पिता मेरी मां से भी ज्यादा मुझे प्यार करते थे मेरा एक भाई था उसके साथ हम बरसात के मौसम में मछली पकड़ने का खेल खेलते थे इस तरह की बातें करते करते रात हो जाती अब पोस्ट मास्टर का खाना बनाने का मन नहीं करता वह सुबह की बासी रोटी खा लेता.

पोस्ट मास्टर गांव के चबूतरे पर बैठा बैठा उस नन्ही सी बच्ची को अपने परिवार के बारे में बताता रहता तभी बरसात का मौसम आया तो उसे भी अकेले रहते रहते अपने परिवार वालों की याद आती है तभी उसने उस 12 साल की लड़की रतन को आवाज दी और उससे बोला कि चलो आज से मैं तुझे पढ़ना सिखाऊंगा.

वह उसे रोजाना पढ़ना सिखाते वह पढ़ने में बहुत ही निपुण हो गई थी एक दिन वह दरवाजे के पास खड़ी थी सोच रही थी कि बापूजी पढ़ने के लिए बुलाएंगे वह इंतजार करते-करते थक गयी और अंदर आ गई उसने देखा कि बापूजी लेटे हुए हैं वह फिर बाहर आने लगी तभी बापूजी ने आवाज दी यह देख मेरा शरीर गर्म हो रहा है शायद तबीयत खराब है तभी वह बच्ची वेद को बुलाकर लाई और उनका उपचार करवाया.पोस्ट मास्टर को इस गांव में रहना रास ना आया वह कुछ दिनों बाद शहर में गया और तबादले के लिए अर्जी लगाई.गांव की वह 12 साल की लड़की रतन अपनी पुरानी जगह पर निवास करने लगी है वह बार-बार सोचती की कोई मुझे आवाज़ लगाएगा.

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