तानसेन की जीवनी Tansen biography in hindi

Tansen biography in hindi

दोस्तों कैसे हैं आप सभी, आज हम आपके लिए लाए हैं एक संगीतकार तानसेन की जीवनी आप इसे जरूर पढ़ें तो चलिए पढ़ते हैं आज के हमारे इस आर्टिकल को

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जन्म और परिवार- शास्त्रीय गायक तानसेन जी का जन्म 1520 ईस्वी में हुआ था इनका जन्मदिन कब हुआ यह पूरी तरह से निशचित नहीं है. तानसेन जी के पिता का नाम मुकुंद मिश्रा था जो कि एक कवि थे.

बचपन का जीवन- तानसेन जी को बचपन से ही संगीत का विशेष शौक था. एक बार वो जंगल में अपने कुछ मित्रों के साथ भ्रमण कर रहे थे तभी गुरु हरिदास जी अपने कुछ शिष्यों के साथ उस जंगल से गुजर रहे थे जब रविदास जी को डराने के लिए तानसेन जी ने एक शेर की आवाज निकाली तब उसके बाद वह ऋषि के समक्ष प्रस्तुत हुए तो उनकी इस तरह की आवाज को सुनकर सभी ऋषि चकित हो गए क्योंकि उनकी शेर की आवाज एकदम असली शेर की लगती थी. गुरु हरिदास जी ने तानसेन जी की इस कला को पहचाना. उसके बाद तानसेन जी के पिता मुकुंद मिश्रा जी ने तानसेन जी को हरिदास जी के साथ वृंदावन भेज दिया.

तानसेन ने वृंदावन में ही गुरु हरिदास जी से शिक्षा प्राप्त की, कई तरह के शास्त्रीय राग उन्होंने गाये. वास्तव में वह एक ऐसे गायक थे जिनकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है. कुछ समय बाद जब तानसेन जी के पिता की तबीयत खराब हुई तो वह अपने पिता से मिलने आए लेकिन इसी बीच उनके पिता का देहांत हो गया फिर वह अपनी मां की सेवा करने लगे लेकिन उनकी मां का देहांत भी कुछ ही समय बाद हो गया.

मोहम्मद घौस जी से शिक्षा- तानसेन जी ने हरिदास जी से शिक्षा प्राप्त करने के बाद मोहम्मद घोष जी से अपनी आगे की शिक्षा प्राप्त की और संगीत में पारंगत होते गए उन्होंने अकबर के दरबार में एक शास्त्री गायक के रूप में भूमिका निभाई, वह अकबर के नवरत्नों में से एक माने जाते हैं.

वैवाहिक जीवन और परिवार- तानसेन जी का विवाह प्रेम कुमारी से हुआ था जिनसे उनके पुत्र हमीर सेन, विलास खान, तान रस खान एवं पुत्री सरस्वती जी थे. तानसेन जी ने कुछ समय बाद धर्म परिवर्तित कर दिया.

तानसेन जी ने अपने जीवन में कई तरह के राग गाये, उन्होंने कई तरह के ऐसे गीतों की भी रचना की जो वास्तव में लोगों को भावुक कर देते थे, कई तरह के शिक्षाप्रद शास्त्रीय रागों का भी उन्होंने निर्माण किया, शास्त्रीय राग जैसे कि दीपक राग, मल्हार आदि काफी प्रसिद्ध है.

इनकी मृत्यु- तानसेन जी ने अपने जीवन में एक महान शास्त्रीय गायक की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अकबर के दरबार में वह सभी के प्रशंसा के योग्य थे. तानसेन जी की मृत्यु ग्वालियर में हुई और ग्वालियर में ही उन्हें दफना दिया गया था. ग्वालियर में ही उनकी कब्र स्थित है. तानसेन जी की मृत्यु के बाद अकबर को काफी दुख हुआ क्योंकि वह अकबर के नवरत्नों में से एक थे वास्तव में तानसेन जी ने अपने पूरे जीवन में काफी शास्त्रीय रागों की रचना की. तानसेन जी को उनके किए हुए कार्यों की वजह से हमेशा याद किया जाएगा. वास्तव में ऐसे गायक का हम सभी को सम्मान करना चाहिए.

दोस्तों हमारे द्वारा लिखित तानसेन की यह जीवनी Tansen biography in hindi आप सभी को कैसी लगी हमें जरूर बताएं और हमें कमेंट्स के जरिए भी बताएं कि यह लेख आपको कैसा लगा, हमें सब्सक्राइब करना ना भूलें.

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