मुगलकालीन कवयित्री ताज का जीवन परिचय Taj begum biography in hindi

Taj begum biography in hindi

Taj begum – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से मुगलकालीन कवयित्री  ताज का जीवन परिचय के बारेे में बताने जा रहे हैं । तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस आर्टिकल को पढ़कर मुगलकालीन कवयित्री ताज के बारे में विस्तृत जानकारी  प्राप्त करते हैं ।

Taj begum biography in hindi
Taj begum biography in hindi

मुगलकालीन कवयित्री ताज के बारे में – ताज बेगम भारत देश का एक ऐसा नाम है जिसने कृष्ण भक्ति में विलीन होकर अपने आपको कृष्ण भक्ति में ही समर्पित कर दिया था । ताज बेगम मुगल बादशाहा औरंगजेब की भतीजी थी जो कृष्ण भक्ति को अपनाकर कृष्ण भक्ति में ही खो गई थी । मैं आपको बता देना चाहता हूं कि औरंगजेब की पुत्री जिसका नाम जेबुन्निसा बेगम था वह और औरंगजेब की भतीजी ताज बेगम दोनों ने कृष्ण भक्ति की दीक्षा लेकर अपने आपको कृष्ण भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया था । जब ताज बेगम कृष्ण भक्ति में लीन हो गई तब मुसलमान समुदाय के कुछ कट्टरपंथी मुसलमान परेशान हो गए थे ।

जब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ताज बेगम का विरोध व्यक्त किया तब उस विरोध का ताज बेगम पर कोई भी असर नहीं पड़ा था । ताज बेगम अकबर की पत्नी थी परंतु उन्होंने कृष्ण भक्ति को ही अपनाकर अपना जीवन जीने का निर्णय लिया था । ताज बेगम कृष्ण भक्ति से  कब  परिचित हुई इसको लेकर एक कथा भी कही जाती है । ताज बेगम के बारे में ऐसा कहा जाता है कि जब ताज बेगम ने काबा शरीफ की यात्रा करने का विचार बनाया था तब वह काबा शरीफ की यात्रा करने के लिए अपने जत्थे के साथ निकल पड़ी थी ।

जब वह काबा शरीफ की यात्रा करने के लिए निकली तब रास्ते में ब्रजभूमि पड़ी थी । जब ब्रजभूमि से वह निकल रही थी तब ब्रज के मंदिरों से घंटियों की आवाज ताज बेगम को सुनाई दी थी । इसके बाद ताज बेगम ने अपने सैनिकों से पूछा कि यह घंटियां कहां से बज रही हैं तब मंत्री ने कहा कि यहां पर कुछ लोगों के भगवान निवास करते हैं । यह सुनकर ताज बेगम ने अपनी सेना और मंत्रियों से कहा कि हम भगवान के दर्शन करके ही आगे की यात्रा प्रारंभ करेंगे । जब ताज बेगम मंदिर के अंदर प्रवेश कर रही थी तब मंदिर के पंडितों के द्वारा उनको रोक दिया गया था ।

इसके बाद ताज बेगम ने मंदिर के दरबार में ही , मंदिर के गेट पर ही कृष्ण की भक्ति करना प्रारंभ कर दिया था । इस कथा में यह भी कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने ताज बेगम की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें साक्षात दर्शन दिए थे । इसके बाद ताज बेगम ने अपना जीवन कृष्ण भक्ति में भी समर्पित कर दिया था । इसके बाद ताज बेगम विट्ठल नाथ गोस्वामी से मिली और उनसे मिलने के बाद वह गोस्वामी विट्ठलनाथ की सेविका बन गई थी । गोस्वामी विट्ठलनाथ की सेविका बनने के बाद ताज बेगम ने कृष्ण भक्ति मे रमकर कई कविताएं लिखी थी ।  ताज बेगम के द्वारा कई मंदिरों में कृष्ण भक्ति के गीत भी  गाए गए हैं ।

जब ताज बेगम का निधन हुआ तब ताज बेगम की समाधि ब्रजभूमि की रमन रेती से तकरीबन 2 किलोमीटर दूर उनकी समाधि बनाई गई थी  जो आज भी वहां पर स्थित है । ताज बेगम कृष्ण भगवान की भक्त के रूप में पहचानी जाती हैं । उन्होंने कृष्ण भक्ति को अपनाकर , कृष्ण भक्ति के गीत गाकर अपना सारा जीवन कृष्ण भक्ति के रास्ते पर चल कर बिताया है । जब कोई ब्रजभूमि के दर्शन करने के लिए जाता है तब वह ताज बेगम की समाधि के दर्शन करने के लिए अवश्य जाता है । ताज बेगम के द्वारा कृष्ण भगवान के कई गीत , दोहे , छंद लिखे गए हैं जिसके बाद ताज बेगम एक कवि के रूप में भी अपनी पहचान बना पाने में सफल हुई हैं ।

ताज बेगम के द्वारा लिखे गए गीत , छंद आज भी पढ़ने वाले श्रोताओं का मन मोह लेते हैं । ताज बेगम भले ही मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखती थी  । जब ताज बेगम ने कृष्ण भक्ति को ही अपना धर्म मान लिया था तब वह उसी धर्म के रास्ते पर निकल पड़ी और कई लोगों के विरोध व्यक्त करने के बाद भी उन्होंने कृष्ण भक्ति के रास्ते को नहीं छोड़ा था । वह कृष्ण भक्ति की यात्रा करने के लिए दृढ़ निश्चय कर निकल पड़ी थी । ऐसी महान कृष्ण भक्त के दर्शन करने के लिए हमें ब्रजभूमि पर अवश्य जाना चाहिए और ब्रजभूमि से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर उनकी समाधि पर माथा टेक कर इनकी भक्ति का सम्मान करना चाहिए ।

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