सुहागन की कथा इन हिंदी Suhagan ki katha in hindi

Suhagan ki katha in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से सुहागन की कथा इन हिंदी के बारे में बताने जा रहे है तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस आर्टिकल को पढ़कर सुहागन की कथा इन हिंदी के बारे मे जानकारी प्राप्त करते है ।

एक राजा रानी थे उनकी कोई संतान नहीं थी । राजा और रानी के यहां पर एक दासी थी वह दासी बहुत ही ईमानदार थी । राजा रानी दासी से बहुत ही स्नेह करते थे । एक समय की बात है कि राजा सुबह-सबह घर के दरवाजे पर बैठा हुआ था । जब राजा दरवाजे पर बैठा था तब वहां पर एक जमादार झाड़ू लगा रहा था । जमादार ने जब राजा की शक्ल देखी तब जमादार वहां के आसपास के लोगों से कहने लगा कि आज का दिन मेरा पूरा बेकार जाने वाला है क्योंकि एक निसंतान राजा का चेहरा मैंने देख लिया है । यह बात राजा के कानों तक पहुंच गई जिसके बाद राजा को बहुत ही बुरा लगा ।

वह राजा था वह उस जमादार के साथ कुछ भी कर सकता था परंतु राजा ने उसके साथ कुछ नहीं किया । राजा घर के अंदर गया और बहुत ही परेशान रहने लगा । दासी ने राजा का जब उतरा हुआ चेहरा देखा तब दासी राजा से कहने लगी की तुम बहुत  परेशान दिखाई दे रहे हो तुम्हें किस बात का दुख है । जब राजा ने दासी से पूरी बात कही तब दासी राजा से कहने लगी अब तुम किसी बात की चिंता मत करो तुम्हारे संतान अवश्य हो जाएगी । ऐसा कहने के बाद दासी रानी के पास गई तो रानी उसे कहा कि राजा संतान के कारण बहुत ही दुखी हैं ।

रानी कहने लगी राजा ही नहीं मैं भी दुखी हूं परंतु मैं क्या कर सकती हूं । दासी ने रानी से कहा की रानी किसी प्रकार की चिंता मत करो । दासी में रानी से कहा कि तुम राजा से कहना की मैं गर्भवती हूं । इसके बाद दासी राजा के पास जाती है और राजा से कहती है कि तुम्हारी रानी गर्व से है तुम्हारे संतान होने वाली है । राजा यह सुनकर बड़ा बड़ा खुश हुआ परंतु दासी राजा से कहने लगी कि खुश होने की आवश्यकता नहीं है । जब तक तुम्हारी संतान बड़ी नहीं हो जाती तब तक तुम अपनी संतान का मुख नहीं देख सकते हो ।

राजा आश्चर्य में पड़ गया और दासी से कहने लगा कि ऐसा क्यों  तब दास जी ने कहा कि यदि तुमने अपनी संतान का चेहरा देखा तो उसकी मृत्यु हो जाएगी । राजा ने दासी से कहा कि ठीक है । मैं अपने पुत्र का चेहरा नहीं देखूंगा । धीरे-धीरे समय बीतने लगा । 4 से 5 महीने बाद रानी बड़ी चिंतित होने लगी क्योंकि रानी ने राजा से गर्भवती होने की बात कही थी । रानी सोचने लगी की मेरे पेट में अभी कुछ भी नहीं है । मैंने चाची की बात मानकर राजा से गर्भवती होने की बात कही थी । जब राजा को पता चलेगा कि मैं गर्भ से नहीं हू तो वह बहुत दुखी और क्रोधित होंगे ।

रानी दासी से कहने लगी की राजा को पता चलेगा तब क्या होगा तब दासी रानी से कहने लगी कि तुम किसी बात की चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा । धीरे-धीरे समय बीतने लगा और 9 महीने के बाद रानी को और भी चिंता होने लगी । 9 महीने के बाद दासी ने और रानी ने मिलकर राजा से यह कह दिया कि एक सुंदर पुत्र ने जन्म लिया है तब राजा बहुत ही खुश हुआ था । जब 18 से 20  साल बीत गए तब राजा दासी से कहने लगा कि अब तो मैं अपने पुत्र का चेहरा देख लूं । दासी कहने लगी की शादी के बाद तुम्हें अपनी संतान का चेहरा देख पाना मुमकिन होगा ।

धीरे-धीरे समय बीतता गया दासी राजा से कहने लगी कि अब तुम्हारा पुत्र शादी के लायक हो गया है अब उसकी शादी की तैयारियां करो । इधर रानी आश्चर्य में पड़ गई की संतान तो है ही नहीं तो फिर किसकी शादी की बात दासी कर रही है । राजा ने दासी की बात मानकर अपने पुत्र की शादी की बात की और एक सुंदर लड़की के साथ विवाह पक्का कर दिया । शादी का समय निकट आ गया और डोली ले जाने की तैयारी हुई । एक सुंदर आभूषणों से जुड़ी हुई डोली राजा ने तैयार कराई और बारात लेकर जाने लगे ।

रास्ते में एक नीम का पेड़ पड़ा वहां पर डोली रख कर सभी बाराती आराम करने लगे । नीम के पेड़ के नीचे अवसान देवी आराम कर रही थी । देवी ने सोचा की डोली के अंदर देखा जाए जैसे ही अवसान देवी ने पर्दा हटाया वैसे ही दासी ने देवी से आगे खड़ी होकर कहा कि तुम ने दूल्हे को गायब कर दिया अब तुम्हें दूल्हा देना होगा । देवी कहने लगी कि यह कहां की समस्या आ गई है मैंने तो दूल्हे को गायब ही नहीं किया  परंतु दासी अवसान देवी के चरणों में गिर गई और रोने लगी कि यदि दूल्हा वापस नहीं आया तो राजा रानी को आत्महत्या करना पड़ेगी और सभी बारातियों को बड़ा दुख होगा ।

अवसान देवी ने दासी की बात सुनकर एक सुंदर दूल्हे को उत्पन्न किया । इसके बाद बारात लड़की के घर पर पहुंची और वहां पर सुंदर दूल्हे से उस लड़की की शादी हुई और शादी होने के बाद दूल्हा दुल्हन की डोली लेते हुए बारातियों के साथ अपने नगर को प्रस्थान कर रहे थे । दासी पहले ही रानी के पास पहुंची और रानी से कहने लगी की बारात आने वाली है तुम स्वागत की तैयारियां करो । रानी बड़ी आश्चर्य में थी कि मेरी तो कोई संतान ही नहीं थी । फिर दासी रानी से कहने लगी कि तुम चिंता मत करो ।

एक सुंदर दूल्हे के साथ लड़की का विवाह हुआ है और वह सुंदर दूल्हा तुम्हारा लड़का है । फिर उसने रास्ते की सारी बात रानी को बताई । इसके बाद रानी ने निश्चय किया कि वह अवसान देवी की पूजा व्रत और कथा अवश्य करेगी । जब बारात घर पर आई तो बारात का बड़ा स्वागत किया गया और पत्र और मधु का स्वागत किया गया । इसके बाद रानी ने अवसान देवी का व्रत करना प्रारंभ किया और पूरी विधि के साथ अवसान देवी की पूजा करने लगे । जो भी सुहागन अवसान देवी की पूजा सच्चे मन से करती है उसकी सारी मुरादें पूरी करती हैं । निसंतान को संतान देती है और उसके सुहाग की रक्षा करती है ।

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