उल्लू और साहूकार की कहानी Story on foolishness in hindi

Story on foolishness in hindi

दोस्तों काफी समय पहले की बात है कि एक गांव में एक ठाकुर साहब रहते थे उनके पास बहुत सारे जानवर थे उन जानवरों में से एक उल्लू भी था उल्लू ठाकुर साहब को अच्छा लगता था वह हमेशा कुछ समय उल्लू के साथ व्यतीत किया करते थे. उल्लू में एक खास बात यह थी कि वह ठाकुर साहब के द्वारा दी हुई सोने की गिन्नी को निगल जाता था और जब भी ठाकुर साहब कहते थे तो वह उल्लू सोने की गिन्नी को बाहर उगल देता था एक समय की बात है कि अचानक ही ठाकुर साहब की बिटिया की शादी तय हो गई और ठाकुर साहब के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपनी बिटिया की शादी धूमधाम से कर सकें.

Story on foolishness in hindi
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वह पास में ही रहने वाले एक साहूकार के पास गए और बोले कि मुझे ₹10000 चाहिए क्योंकि मैं मेरी बिटिया की शादी करना चाहता हूं और पैसा होगा तभी मैं उसकी शादी कर सकता हूं अभी मेरे पास रुपए नहीं है.₹10000 पहले के जमाने में बहुत ज्यादा हुआ करते थे ₹10000 मांगने की बात सुनकर साहूकार सकपका गया और और कहने लगा की ठाकुर साहब मैं आपको पैसे तो दे सकता हूं लेकिन पैसे देना मेरा व्यापार है मैं आपको ऐसे ही पैसे नहीं दे सकता आपको कुछ चीज मेरे यहां पर गिरवी रखना होगी

तभी मैं आपको ₹10000 दे सकता हूं.साहूकार की बात सुनकर ठाकुर साहब कुछ सोच कर बोले की साहूकार जी मेरे पास एक बहुत ही कीमती चीज है मैं आपको गिरवी रखने के लिए उसे दे दूंगा और आप मुझे ₹10000 दे देना.

कीमती वस्तु की बात सुनकर साहूकार के मन में लालच आ गया वह सोचने लगा कि पता नहीं कितनी कीमती चीज होगी उसने कहा की ठाकुर साहब बताइए क्या कीमती चीज है साहूकार की बात पर ठाकुर साहब कहने लगे कि मेरे पास एक उल्लू है. उल्लू की बात सुनकर साहूकार कुछ देर तक उसकी तरह पागलों की तरह देखने लगे और कहने लगे कि ठाकुर साहब आप पागल हो गए हो क्या? मैं आपको एक उल्लू के बदले ₹10000 दे दू मैं पागल नहीं हूं मैं किसी उल्लू के बदले उल्लू नहीं बनने वाला

तभी ठाकुर साहब बोले साहूकार जी उल्लू बहुत ही बेहतरीन है वह रोज सुबह सुबह मेरे कहने पर सोने की गिन्नी उगलता है यह बात सुनकर साहूकार ने कहा कि मैं तुम्हें ₹10000 उसके बदले दे सकता हूं लेकिन सबसे पहले मैं उल्लू को सोने की गिन्नी उगलते हुए देखूंगा.

यह बात सुनकर ठाकुर साहब अगले दिन ही अपने उल्लू को कुछ सोने की गिन्नी खिला कर ले आए और साहूकार के पास लाकर उन्होंने उससे कहा चल गिन्नी उगल. यह सुनकर उल्लू ने सोने की गिन्नी उगल दी तभी कुछ समय बाद उस साहूकार ने दोबारा कहा कि चल एक बार फिर से सोने की गिन्नी उगल तब भी उल्लू ने सोने की गिन्नी उगल दी और फिर साहूकार को विश्वास हो गया कि उल्लू तो बड़ा काम का है ये तो सोने की गिन्नी रोजाना उगलता है मैं तो अमीर बन जाऊंगा.

साहूकार ने उल्लू के बदले उस ठाकुर को ₹10000 दे दिए. अगले दिन साहूकार ने उल्लू से कहा गिन्नी उगलो. उल्लू ने एक गिन्नी उगल दी अगले दिन फिर से उस साहूकार ने उल्लू से कहा कि चल गिन्नी उगल तो उल्लू ने गिननी उगल दी.

अगले दिन साहूकार ने फिर से उस उल्लू से वही बात कही तो उल्लू ने साहूकार ने जो खिलाया था वह उगल दिया.उसने एक-दो दिन यही प्रतिक्रिया की लेकिन जो साहूकार खिलाता उल्लू वही उगल देता अब वह बहुत ही गुस्सा हो गया और सोचने लगा कि ठाकुर ने मुझे बेवकूफ बनाया है उसने ठाकुर को अपने यहां पर बुलाया और ठाकुर से कहा ठाकुर जी आपने अपना उल्लू देकर अपना उल्लू सीधा किया है और मुझे बेवकूफ बनाया है यह अब गिन्नी नहीं उगलता यह तो जो खिलाते हैं वह उगल देता है.

उस साहूकार की बात पर ठाकुर साहब कहने लगे तुमने जो उल्लू को खिलाया है वो वही तो उगलेगा गिन्नी कैसे उगलेगा.यह बात कहकर ठाकुर जी हंसते हंसते वहां से चले गए और साहूकार माथा पिटता रह गया।

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