सिख गुरु की बलिदानी परंपरा पर निबंध Sikh guru ki balidani parampara essay in hindi

Sikh guru ki balidani parampara essay in hindi

दोस्तों कैसे हैं आप सभी, आज हम पढ़ेंगे सिख गुरु की बलिदानी परंपरा पर हमारे द्वारा लिखित निबंध तो चलिए पढ़ते हैं आज के इस आर्टिकल को

Sikh guru ki balidani parampara essay in hindi
Sikh guru ki balidani parampara essay in hindi

हमारे भारत देश में सिख गुरुओं की बलिदानी परंपरा एक तरह से शुरू से ही देखने को मिलती है। हमारे भारत देश की रक्षा में सिख गुरुओ का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, हम उनके योगदान को बिल्कुल भी नहीं भुला सकते वास्तव में सतगुरुओ के इस बलिदान से ही आज हम काफी सुरक्षित हैं। गुरु नानक देव जिन्होंने एक ऐसे धर्म की स्थापना की जिसका उद्देश्य एक ही था कि ईश्वर एक है, हम सभी को सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। सिख धर्म के गुरुओं ने सत्य के मार्ग पर चलने के लिए एवं अपने आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए कई बलिदान दिए, यह बलिदान हम कभी भी भूल नहीं सकते। सिख धर्म के प्रथम गुरु नानक माने जाते हैं, गुरु नानक ने सिख धर्म के प्रचार प्रसार के लिए कई जगह भ्रमण किया था वास्तव में सिखों के गुरुओं ने हमारे देश में एक ऐसे धर्म की स्थापना कि जिससे हिंदू, मुस्लिम दोनों ही उनके अनुयाई बन गए। गुरु अर्जुन जिन्होंने सिख धर्म को आगे बढ़ाने में काफी योगदान दिया था लेकिन जहांगीर के आदेश पर गुरु अर्जुन का वध कर दिया गया था।

सिक्खों के गुरु तेग बहादुर ने भी बलिदान दे दिया था दरअसल दुष्ट औरंगजेब ने तेग बहादुर जी की हत्या इसलिए कर दी थी क्योंकि उन्हें इस्लाम धर्म स्वीकार नही था। दुष्ट औरंगजेब ने कहा था कि या तो इस्लाम धर्म स्वीकार करो या फिर अपने प्राणों को दे दो आखिर में दुष्ट औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर जी को मार डाला था वास्तव में सिखों की बलिदान की परंपरा रही थी। सिखों ने अपनी अच्छाई को बचाने के लिए किसी के सामने अपना सिर नहीं झुकाया। तेग बहादुर जी के बाद में महान गुरु गोविंद सिंह जी ने राष्ट्र की रक्षा की, उन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए शांति प्रिय सिख संप्रदाय के लोगों को एक ऐसा रूप दे दिया जिससे मुसलमान भी उनसे भयभीत होने लगे। उस समय मुसलमानों का काफी अत्याचार था लेकिन गुरु गोविंद सिंह जी की इस सैनिक संगठन की शक्ति ने मुसलमानों के अत्याचार को कुछ हद तक दूर करने का प्रयत्न किया।

गुरु गोविंद सिंह जी ने मुसलमानों के अत्याचार की वजह से अपने बालकों को भी खो दिया था लेकिन वह अधिक निराश नहीं हुए, उन्होंने अपनी मृत्यु तक हमेशा डटकर सामना किया था लेकिन कुछ समय बाद किसी ने उनकी हत्या कर दी थी लेकिन वास्तव में सिखों का यह बलिदान हम सभी को हमेशा याद रहेगा। सिखों का बलिदान हमें स्वतंत्रता संग्राम में भी देखने को मिलता है, स्वतंत्रता संग्राम में भी सरदार भगत सिंह ने अपने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था वास्तव में सिको की बलिदानी परंपरा अद्भुत थी। हम सभी को सिखों की इस बलिदानी परंपरा की प्रशंसा करनी चाहिए।

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