शुक्र प्रदोष (भुगुवारा प्रदोष) पूजा विधि, व्रत कथा shukra pradosh puja vidhi, vrat katha in hindi

shukra pradosh puja vidhi, vrat katha in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से शुक्र प्रदोष पूजा विधि , व्रत , कथा के बारे में बताने जा रहे हैं . चलिए अब हम शुक्र प्रदोष पूजा विधि , व्रत कथा को बड़े ध्यान से पढ़ते हैं . शुक्र प्रदोष व्रत शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष को किया जाता है . यह व्रत करने से सभी कष्ट एवं नकारात्मक सोच से मुक्ति मिलती है . इस  व्रत की बड़ी  धूमधाम से  पूजा की जाती है  . इस व्रत में भगवान शिवजी की पूजा की जाती है . इस व्रत को भुगुवारा प्रदोष भी कहते हैं .

shukra pradosh puja vidhi, vrat katha in hindi
shukra pradosh puja vidhi, vrat katha in hindi

image source –https://www.bhaskarhindi.com/news/know

पूजा विधि – यह व्रत प्रदोष शुक्रवार के दिन किया जाता है . इस व्रत में भगवान शिव जी की पूजा , अर्चना की जाती है . जो भी व्यक्ति इस व्रत को करता है वह सुबह उठकर स्नान करके , घर को शुद्ध करके एक शुद्ध स्थान पर रंगोली बनाकर वहां पर शिव जी की मूर्ति स्थापित करे . इसके बाद भगवान शिव जी को घी , दूध से स्नान कराकर , फल चढ़ाकर , घी  का दीपक जलाकर एवं सिंदूर , रोली , चावल का तिलक लगाकर भगवान शिव की पूजा एवं आरती की जाती है . पूजा करने के बाद सभी को कथा सुनना चाहिए . कथा सुनने के बाद सभी को भगवान शिव से आराधना करनी चाहिए .

कथा – एक राज्य  में 3 मित्र रहते थे एक मित्र जो कि राजा का पुत्र था , दूसरा ब्राह्मण का पुत्र था , तीसरा धनवान व्यक्ति का पुत्र था . तीनों की आपस में गहरी मित्रता थी . तीनों की शादी हो जाती है . दोनों यानी ब्राह्मण और राजकुमार की पत्नियां शादी के बाद उनके साथ में ही रहने लगती हैं लेकिन तीसरा मित्र धनवान की पत्नी अपने मायके में ही रहती है क्योंकि उनका गौना नहीं हुआ था . एक बार जब तीनों मित्र मिले तब वह अपनी पत्नियों के बारे में बातचीत कर रहे थे .

इस मुलाकात में  ब्राह्मण के पुत्र एवं राजकुमार के पुत्र ने अपने तीसरे दोस्त से कहा कि बिना पत्नी के घर सूना सूना लगता है . यह बात सुनकर  उस धनवान के पुत्र ने यह निश्चय करा कि वह अपनी पत्नी को वापस लेने के लिए जाएगा . जब धनबान  पुत्र की माता को यह पता चला तब उसने अपने पुत्र को ऐसा करने से मना कर दिया था . धनबान पुत्र की माँ अपने पुत्र से कहने लगी की कल  शुक्र प्रदोष का दिन है . उस दिन बहू , बेटियों को घर से ना तो विदा किया जाता है और ना ही कोई विदाई की जाती है लेकिन वह धनबान  पुत्र नहीं माना और अपनी ससुराल चला गया था .

ससुराल वालों ने भी धनबान पुत्र को बहुत समझाया लेकिन वह नहीं माना . जब  धनबान  पुत्र के  ससुराल वालों ने यह देखा कि  यह मान ही नहीं रहे हैं तब उन्होंने अपनी बेटी  को  विदा  कर दिया था . जैसे ही धनबान पुत्र अपनी पत्नी के साथ  बेल गाड़ी में बैठा , बेल गाड़ी का पहिया टूट गया और वह धड़ाम से नीचे गिर पड़े लेकिन फिर भी वह वहां पर रुकने के लिए तैयार नहीं थे . वह जैसे ही आगे बढ़े उनको एक डाकुओं का गिरोह  मिल गया और उनको पूरी तरह से लूट लिया  था . वह एक जंगल में  घुस  गए थे .

जहां पर  उस  धनबान पुत्र   को एक सांप ने डस लिया था . धनबान पुत्र और उसकी पत्नी जैसे तैसे घर पर पहुंचे . जब धनबान पुत्र की हालत खराब होती जा रही थी तब  उसके परिबार बाले बहुत घबरा गए थे . ब्राह्मण पुत्र एवं राजकुमार ने यह सुना की उनके  दोस्त को सांप ने डस लिया है तब ब्राह्मण पुत्र , राजकुमार  उसके पास पहुंचे . ब्राह्मण पुत्र ने धनबान पुत्र के माता पिता से कहा  कि इसकी यह दशा प्रदोष शुक्रवार को घर से विदा कराने के कारण हुई है यदि इस को ठीक करना है तो इसे अपनी पत्नी के साथ ससुराल भेज दो .

वहीं पर इसका इलाज होने दो इस तरह से धनबान पुत्र में अपने मित्र की बात मान ली और अपनी पत्नी को लेकर अपनी ससुराल चला गया और वहां पर इलाज करवाया . अपनी  ससुराल में वह पूरी तरह से ठीक हो गया था . तभी से यह प्रदोष शुक्र या शुक्र प्रदोष व्रत सभी लोग करने लगे हैं . यह व्रत करने से सभी के अंदर से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है .

दोस्तों हमारे द्वारा लिखा गया यह आर्टिकल शुक्र प्रदोष पूजा विधि , व्रत , कथा विधि shukra pradosh puja vidhi, vrat katha in hindi पसंद आए तो शेयर अवश्य करें धन्यवाद .

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *