संतोष सबसे बड़ा धन पर निबंध santosh sabse bada dhan essay in hindi

santosh sabse bada dhan essay in hindi

मनुष्य के लिए संतोष सबसे बड़ा धन होता हैं जब तक हर मनुष्य के पास संतोष रूपी धन नहीं होगा तब तक हर व्यक्ति अपना जीवन खुशी से नहीं जी सकता क्योंकि हम सोना , चांदी और पैसों से कोई भी वस्तु खरीद सकते हैं पर मन की शांति नहीं खरीद सकते । संतोष रूपी धन से मनुष्य का जीवन खुशियों से भर जाता है ।

santosh sabse bada dhan essay in hindi
santosh sabse bada dhan essay in hindi

मनुष्य की इच्छाओं का कभी भी अंत नहीं होता यदि उसे कुछ पाने की इच्छा होती है तो वह उसको मिल जाता है जितना उसको मिलता है उससे और अधिक पाने की इच्छा उसके मन में आ जाती है और उसका मन अशांत रहता है और उसकी जिंदगी असंतोष में बीतने लगती है और वह अपने जीवन मैं संतोष की प्राप्ति नहीं कर पाता .

आज हर मनुष्य पैसो के पीछे भाग रहा है जिसके कारण मनुष्य का मन अशांत रहता है और वह अपना जीवन अंधकार में धकेल देता है उस व्यक्ति को यह पता नहीं होता कि धन से हम वस्तु तो खरीद सकते हैं लेकिन मन की शांति कभी भी नहीं खरीद सकते। अगर हमको मन की शांति चाहिए तो हमारे जीवन में हमे संतोष रखना होगा . जब हमारे जीवन में संतोष रूपी धन आ जाएगा तो हमारा मन शांत रहेगा और हमारी जिंदगी खुशियों से भर जायगी ।

कुछ लोग धन प्राप्ति के लिए लड़ाई करते हैं तो कुछ लोग ऐसे ऐसे गलत काम करने लगते हैं जिसके कारण दूसरों को हानि पहुंचती है । यह सब वह लोग करते हैं जिनके पास संतोष रूपी धन नहीं होता और जिस व्यक्ति के पास संतोष रूपी धन होता है वह व्यक्ति संसार में अच्छे काम करते हैं और वह व्यक्ति जो काम करते हैं उनके कामों से उनका मन भी खुश रहता है और उनके साथ साथ सभी को उनके कामों से खुशी मिलती है इसलिए हम कहते हैं कि हमारे जीवन में संतोष रूपी धन होना आवश्यक है जिससे हमारी जिंदगी खुशी से बीते और हम इस संसार में खुशियां फैला सके।

आज हम देख रहे हैं कि ज्यादातर मनुष्य पैसो के पीछे भाग रहे है मनुष्य जीवन मे खुश नही हो पा रहा है उदाहरण के तौर पर हम एक कहानी पढ़ते है एक व्यक्ति था जो बहुत ही गरीब था उसके पास खाने के लिए अनाज भी नहीं था . एक बार वह व्यक्ति जंगल में गया और जंगल से बाहर आने का रास्ता भूल गया। कई दिनों तक वह भूखा प्यासा भटकता रहा . एक दिन उस जंगल से शंकर और पार्वती जी निकल रहे थे ।

शंकर भगवान और माता पार्वती ने उस व्यक्ति की ऐसी हालत को देखकर पार्वती माता ने शंकर भगवान से कहा की हमको इस व्यक्ति की मदद करना चाहिए . शंकर भगवान उस व्यक्ति की मदद करने के लिए तैयार हो गए । शंकर भगवान एक साधु का रूप धारण कर उस व्यक्ति के पास गये और उस व्यक्ति से कहा कि मुझे प्यास लग रही है क्या आप मुझे पानी दोगे उस व्यक्ति ने साधु महाराज को पानी पिलाया और साधु महाराज प्रसन्न हो गए ।

वह व्यक्ति साधु को पहचान नहीं सका । साधु महाराज ने उस व्यक्ति से पूछा कि तुम्हारी यह हालत कैसे हुई और उस व्यक्ति ने भगवान को सब बताया फिर भगवान ने उस व्यक्ति से कहा की आपने मुझे पानी पिलाकर मेरी प्यास बुझाई है अब मैं आपको वरदान देना चाहता हूं .

अब आप जो भी मुझसे मांगोगे वह मैं आपको दे दूंगा लेकिन वह व्यक्ति सोच विचार करने लगा क्या मांगू फिर उस व्यक्ति ने साधु महाराज से कहा मैं आपसे कल वरदान मांगूंगा और साधु महाराज उसको यह कहकर चले गए की मैं कल आकर आपको वरदान दूंगा । इसके बाद वह व्यक्ति उसी जंगल मैं एक नीम के पेड़ के नीचे लेट गया और सोचने लगा कि वह उस साधु से कल क्या मांगे ।

उसने सोचा कि मेरे पास रहने के लिए मकान नहीं है मकान मांग लूं लेकिन कुछ समय बाद उसको विचार आया की क्यों ना वह महल मांग ले , लेकिन कुछ समय बाद फिर उसका विचार बदल गया उसने सोचा क्यों ना में सोना चांदी और पूरा राज्य ही मांग लूं जिससे मैं अपनी पूरी जिंदगी खुशी से जिऊंगा । इस तरह से उस व्यक्ति की पूरी रात गुजर गई ।

जब सुबह हुई और उस साधु के आने का समय हुआ और वह साधु उस व्यक्ति के सामने आकर उस व्यक्ति से कहने लगा अब मांगो क्या मांगते हो अब तो तुम्हें सोचने के लिए पूरी रात का समय मिल गया फिर वह व्यक्ति बोलता है कि मुझे कुछ नहीं चाहिए धन दौलत की चाह में मुझे पूरी रात भर नींद नहीं आई अगर यह सब मुझे मिल जाए तो मेरा क्या होगा . मुझे तो आप ऐसा आशीर्वाद दीजिए जिससे मैं प्रभु की भक्ति कर सकूं और मेरे जीवन मैं संतोष रहे . वास्तव में मनुष्य को खुश रहने के लिए धन से ज्यादा संतोष की आवश्यकता होती है .

इसलिए हम सभी को संतोष रूपी धन को पाने का प्रयत्न करना चाहिए क्योंकि संतोष रूपी धन जिस व्यक्ति के पास होता है उस व्यक्ति के पास संसार के सभी सुख होते हैं और उसका जीवन खुशियों से भरा होता है . आज मनुष्य अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए भाग रहा है। आज के मनुष्य की इच्छा प्राप्ति की कोई सीमा नहीं है बस वह पाना चाहता है और पाने की इच्छा से वह दुनिया में भागता रहता है । ना तो उसको अपनी कोई फिकर है और ना ही अपने परिवार की।

जब वह यह समझ जाएगा की संसार का सबसे बड़ा धन तो संतोष रूपी धन होता है इससे हमारे जीवन में खुशियां आती हैं और हमारा पूरा परिवार खुशी से अपना पूरा जीवन बिताता हैं इसलिए हर व्यक्ति को अपने जीवन में जितनी धन की आवश्यकता हो उतना ही पाना चाहिए और सभी के पास संतोष रूपी धन अवश्य होना चाहिए।

हमे जरुर बताये की ये लेख santosh sabse bada dhan essay in hindi आपको कैसा लगा.

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