संत रविदास जी की कविता sant ravidas poems in hindi

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दोस्तों संत रविदास जी एक महान समाज सुधारक कवि एवं संत थे इन्होंने अपने जीवन में कई समाज सुधारक कार्य किए। वो ईश्वर के प्रति काफी श्रद्धा रखते थे और हमेशा लोगों के लिए, अपने समाज के लिए कार्य करते थे। आज हम संत रविदास जी पर सूर्यकांत त्रिपाठी जी द्वारा लिखित एक कविता आप सभी के लिए लाए हैं आप इस कविता को जरूर पढ़ें तो चलिए पढ़ते हैं आज की हमारी इस कविता को

sant ravidas poems in hindi
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image source-https://commons.wikimedia.org/wiki/File:SriGuruRavidasJi.jpg

ज्ञान के आकार मुनीश्वर थे परम

धर्म के ध्वज, हुए उनमें अन्यतम

पूज्य अग्रज भक्त कवियों के, प्रखर

कल्पना की किरण नीरज पर सूघर

 

पड़ी जियो अंगड़ाइयां ले कर खड़ी

हो गई कविता की आई शुभ घड़ी

जाति की देखा सभी ने मिचकर

दृग, तुम्हें श्रद्धा सलिल से सींचकर

 

रानियां अवरोध की घेरी हुई

वाणीया ज्यो बनी जब चेरी हुई

छुआ पारस भी नहीं तुम ने, रहे

कर्म के अभ्यास में, अबिरत बहे

 

ज्ञान गंगा में, समुज्जवल चर्मकार

चरण छूकर कर रहा मैं नमस्कार।

हमें बताएं कि संत रविदास जी पर सूर्यकांत त्रिपाठी जी द्वारा लिखित यह कविता sant ravidas poems in hindi आपको कैसी लगी इसी तरह की नई नई कविताओं को पढ़ने के लिए इस आर्टिकल को शेयर करना ना भूलें।

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