संत एकनाथ का जीवन परिचय Sant eknath information in hindi

Sant eknath information in hindi

दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं संत एकनाथ का जीवन परिचय । चलिए अब हम पढ़ेंगे संत एकनाथ का जीवन परिचय को ।

जन्म – संत एकनाथ महाराज का जन्म 1533 ईस्वी में हुआ था । संत एकनाथ महाराज का जन्म महाराष्ट्र के पैठन में हुआ था । उनके पिता का नाम सूर्यनारायण एवं माता का नाम रुक्मणि था । इन्होने जनार्दन स्वामी से ज्ञान प्राप्त किया था । इनका जन्म सोलवीं सदी में हुआ था ।

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जब यह छोटे थे तभी इनके माता पिता का देहांत हो गया था । जब एकनाथ महाराज के माता पिता का निधन हो गया था तब वह अपने दादा दादी जी के साथ रहने लगे थे । संत एकनाथ जी धर्म के अनुयाई थे । उन्होंने लोगों को धर्म के रास्ते पर चलाने के लिए जागरूक किया था ।

वह कई लोगों को उपदेश देते रहते थे । यह कहा जाता है कि उनके दादा जी वारकरी संप्रदाय के थे । संत एकनाथ जी महाराज का विवाह गिरजा बाई से हुआ था । उनकी दादी चक्र वाणी ने एकनाथ जी महाराज का लालन पालन किया था । वह अपने पोते से बहुत प्रेम करती थी ।

वह बचपन में अपने पोते की बुद्धि को देखकर आश्चर्य में पड़ जाती थी कि अभी यह लड़का इतना छोटा है और इतनी ज्ञान की बातें करता है । जब यह बड़ा होगा तब यह जरूर लोगों को सही रास्ता दिखाने का काम करेगा ।

संत एकनाथ महाराज के गुरु – संत एकनाथ महाराज ने जनार्दन स्वामी जी को अपना गुरु बनाया था । जनार्दन स्वामी से वह अच्छे-अच्छे ज्ञान के उपदेश सीखते थे । जनार्दन स्वामी से उन्होंने ज्ञान प्राप्त किया था । ज्ञान प्राप्त करने के बाद वह भगवान की भक्ति में लग गए थे और लोगों को अच्छे अच्छे उपदेश देते रहते थे । संत एकनाथ महाराज जी सच्चे एवं महान संत थे ।

जीवन में किए गए कार्य – संत एकनाथ महाराज के द्वारा कई महान कार्य किए गए थे । संत एकनाथ महाराज जी ने भगवत पुराण को अपनी भाषा में लिखा था । किताब लिखने के बाद इस किताब को अपना ही नाम दिया था । संत एकनाथ महाराज जी पुराने समय में जो नीति चल रही थी उनके खिलाफ थे ।

संत एकनाथ महाराज ने प्राचीन समय में चल रही नीतियों को बदलने के लिए संघर्ष किया था । उनका एक ही मकसद था की हम सभी मिलकर इन नीतियों को बदलें जिससे कि हम सभी आगे बढ़े और हम सभी लोगों का कल्याण हो सके । संत एकनाथ जी महाराज ईश्वर की भक्ति किया करते थे ।

यह कहा जाता था कि एक नाथ जी महाराज ईश्वर के परम भक्त थे । उनके जीवन में कई चमत्कारी घटनाएं घटी हैं । यह कहा जाता है कि जब एकनाथ जी महाराज गोदावरी नदी से नहाकर वापस आते थे तब एक दुष्ट मौलवी उनके ऊपर कुल्ला कर देता था जिससे कि वह अपवित्र हो जाते थे लेकिन एक नाथ जी महाराज उनको कुछ भी नहीं कहते थे और वह दोबारा से स्नान करके घर चले जाते थे ।

संत एकनाथ जी महाराज जी का कहना था कि सिर्फ पूजा पाठ करने से कोई व्यक्ति ब्राह्मण नहीं बन जाता है । यदि व्यक्ति अच्छे कर्म करता है ,अच्छी सोच रखता है तो वह व्यक्ति महान व्यक्ति बन जाता है । एक अच्छा व्यक्ति कभी भी किसी से किसी तरह का कोई भी भेदभाव नहीं करता है वह सिर्फ कर्म करता है।

जो लोग पीड़ितों की मदद करते है ,दूसरों के दुखों को दूर करने की कोशिश करते है वह लोग महान होते है । संत एकनाथ जी महाराज बचपन से ही ज्ञान प्राप्त करते थे । बचपन से ही ईश्वर की पूजा किया करते थे । यह कहा जाता है कि जब एकनाथ महाराज की उम्र 12 वर्ष की थी तब उन्होंने धर्मशास्त्र को सीख लिया था ।

मृत्यु – संत एकनाथ जी महाराज ने 1599 ईस्वी में गोदावरी नदी के तट पर समाधि ले ली थी ।

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