सकट चौथ व्रत कथा इन हिंदी sakat chauth vrat katha in hindi

sakat chauth vrat katha in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस लेख के माध्यम से सकट चौथ व्रत कथा इन हिंदी के बारे में बताने जा रहे . चलिए अब हम इस आर्टिकल के माध्यम से सकट चौथ व्रत कथा को पढ़ेंगे .

sakat chauth vrat katha in hindi
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सकट चौथ व्रत माघ कृष्ण चतुर्थी के दिन किया जाता है . इस दिन भगवान श्री गणेश की पूजा अर्चना की जाती है . तिलकुट के गणेश जी बनाकर उनकी पूजा की जाती है . सकट चौथ व्रत कथा करने से सबकी मनोकामनाएं पूरी होती है . इस दिन जो भी महिला सकट चौथ व्रत करती है उसको यह व्रत निर्जला रखना पड़ता है . दिन भर वह महिला निर्जला व्रत रखती है , शाम को  पूजा करने की बाद भोजन  करती है . दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके प्रसाद में पूरी एवं पकवान बनाती है .

उस दिन तिल  एवं गुड़ को मिलाकर एक बकरा भी बनाया जाता है और उस बकरे की पूजा की जाती है . पूजा करने के बाद घर के किसी बच्चे से उस बकरे की गर्दन कटवा दी जाती है . गर्दन कटवाने के बाद प्रसाद बांटा जाता है . प्रसाद बांटने के बाद जो महिला व्रत रखती है वह पूजा में बनाए गए पूरी एवं पकवान का ही भोजन करती है .

सकट चौथ व्रत कथा – एक गांव में एक बहुत बड़ा साहूकार रहता था और उसकी एक पत्नी भी थी लेकिन उनकी  कोई संतान नहीं थी . वह संतान प्राप्ति के लिए दर-दर की ठोकरे खा रहे थे . एक बार जब साहूकार की पत्नी   अपने पड़ोस में गई तब पड़ोस की महिलाएं सकट चौथ माता की कथा सुन रही है . उस साहूकार की पत्नी ने उन महिलाओं से पूछा कि यह तुम क्या कर रही हो . तब सभी महिलाओं ने उस साहूकार की पत्नी से कहां की हम सकट माता का व्रत एवं कथा करती  हैं ऐसा करने से सुख समृद्धि व संतान की प्राप्ति होती है .

ऐसा सुनकर साहूकार की पत्नी  उन महिलाओं से कहने लगी की यदि भगबान  मेरे पेट में गर्भ धारण करें तो मै  सबा मन  तिल लड्डू चढ़ाऊंगी . जब उसने ऐसा कहा तो गणेश  भगवान प्रसन्न हो गए और  वह गर्भवती हो गई थी . फिर उसने गणेश जी भगवान से कहा कि यदि मैं एक सुंदर पुत्र को जन्म दूंगी तो मैं दो मन के तिल लड्डू चढ़ा दूंगी और  उसके गर्भ से एक सुंदर पुत्र जन्म लेता है लेकिन वह तिल लड्डू नहीं चढ़ाती है . फिर वह कहने लगती है की मेरे बच्चे का विवाह एक सुंदर कन्या से हो जाएगा तो  मैं 5 मन के तिल लड्डू चढ़ाऊंगी .

उस लड़के का विवाह एक सुंदर लड़की से तय हो जाता है लेकिन साहूकार की पत्नी श्री गणेश भगवान को तिल लड्डू नहीं चढ़ाती है जिससे गणेश भगवान नाराज हो जाते हैं और साहूकार का लड़का जैसे ही  विवाह करने के लिए  बैठता है तो श्री गणेश उस लड़के को वहां से उठाकर पीपल के पेड़ के ऊपर बैठा देते हैं . एक रोज जब वह कन्या जिसका विवाह साहूकार के बेटे से होने वाला था वह  अपनी सहेलियों के साथ गणगोर की पूजा के लिए जंगल में दूबा लेने के लिए गई और वह उस पेड़ के पास पहुंची जहां पर  साहूकार का लड़का बैठा था .

वह उस पेड़ के बगल में आई तो उस पेड़ से आवाज आने लगी कि मैं तुम्हारा पति हू  और वह कन्या घर चली गई थी . जब जब वह लड़की जंगल में जाती थी उसे उस पेड़ से वही आवाज सुनाई देती  थी . यह सोचकर वह लड़की परेशान होने लगी थी जिसके कारण उसका शरीर  कमजोर होता जा रहा था . एक रोज उसकी मां ने पूछ लिया कि तुम्हें किस बात की चिंता है . तुम्हारा शरीर कमजोर होता जा रहा है  और लड़की ने अपनी मां को सारी बात बता दी की जब हम   जंगल में गए तो उस पेड़ में से  आवाज आ रही थी .

वह लड़की अपनी मां को लेकर उस पेड़ के पास पहुंची तो  साहूकार के बेटे ने कहा कि मेरी मां ने मेरे जन्म पर पांच मन लड्डू बांटने की मनोकामना मांगी थी लेकिन मेरी मां ने मनोकामना पूरी होने के बाद लड्डू नहीं चढ़ाएं इसलिए गणेश भगवान ने मुझे पीपल के पेड़ पर बैठा दिया है . यह सब जानकर लड़की की मां साहूकार के यहां गई और उसकी मां को सारी कहानी बता दी . साहूकार की पत्नी ने भगवान से प्रार्थना करी  कि आप मेरे बच्चे को सही सलामत मेरे पास भेज दो .

ऐसा करने पर मैं तिल लड्डू अवश्य  चढ़ाऊंगी और सकट चौथ व्रत कथा करुगी .  ऐसा कहने पर गणेश भगवान प्रसन्न हो गए और उन्होंने उसके पुत्र को सही सलामत भेज दिया था . उसी समय से साहूकार की पत्नी सकट चौथ व्रत कथा करने लगी थी और गांव की सभी महिलाएं सकट चौथ व्रत कथा करने लगी थी .

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