काले कौवे की दुखद कहानी Sad story of black crows

दोस्तों एक इन्सान को कभी भी जलन नहीं करना चाहिए क्योकि जलन करने से कुछ भी नहीं होगा,आप जो भी हो अच्छे हो,और आपमें कुछ ना कुछ ख़ास जरुर है,लेकिन कुछ लोग दुसरो में कुछ अच्छे गुणों के कारण उन जैसा बनना चाहते है,चलिए इस काले कौवे की ये prernadayak kahani पढते है.

एक काला कौवा था,वोह जिन्दगी में काफी दुखी था,क्योकि उसका रंग काला था,यही उसके दुःख की वजह थि,वोह जब भी बदक को देखता तोह उसे बहुत दुःख होता वोह सोचता की काश में बदक होता तोह कितना अच्छा दीखता मुझे कितनी ख़ुशी मिलती. एक दिन वोह बदक के पास गया उसने बदक से पूछा की तुम्हारा रंग तोह बहुत ही अच्छा है,तुम तोह बड़े खुश रहते होगे तब बदक बोला हां लेकिन में खुश नहीं रहता,में सोचता हु की काश मेरा कलर तोते जैसा होता तोह में कितना खुश रहता तोह वोह कौवा तोते के पास जाता है,उससे पूछता है की तुम तोह जरुर ही बहुत खुश रहते होगे,तुम्हारा रंग हरा है इसलिए.

तब तोता बोला की में खुश नहीं रहता.में सोचता हु की अगर में मोर होता या फिर मेरा रंग मोर जैसा होता तोह कितना अच्छा होता तब वोह मोर के पास जाता है. तोह देखता है की मोर सर्कस में है,वोह देखता है की काफी लोग मोर को देख रहे होते है.जब सभी लोग सर्कस देखखर चले जाते है तोह कौवा मोर से बोला की तुम्हारा रंग तोह बहुत अच्छा है.

तुम तोह बहुत सुन्दर दीखते हो काश मेरा भी रंग तुम्हारी तरह होता तब मोर बोला में अपने रंग की वजह से ही दुखी रहता हु की काश में तुम्हारी तरह एक कौवा होता तोह तुम्हारी तरह ही आजाद होकर आश्मान में घूमता.मुझे लोगो ने इस सरकश में रखा है,में चाहकर भी कही घूमने नहीं जा पाता.तब कौवा समझ चूका था की में जो भी हु मेरे लिए ठीख है.

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इन्सान के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है.अगर एक इन्सान के पास कुछ होता है तो वोह अपने पास जो है उसमे खुश नहीं रहता यानी सोचता है की काश मेरे पास दुसरे व्यक्ति की तरह कुछ होता.लेकिन भगवान् ने इन्सान को अगर एक व्यक्ति में कुछ ख़ास दिया है तोह उसमे कुछ बुराई भी दी है.साथ में अगर दुसरे व्यक्ति में कुछ बुरा दिया तोह ये पक्का है की उस इन्सान के अन्दर कुछ ऐसी चीज जरुर होती है जो उसे जिन्दगी में आगे बढने या फिर खुश रखने के लिए काफी होती है.

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