ऋषि पंचमी व्रत कथा व् पूजा विधि Rishi panchami vrat katha, puja vidhi in hindi

Rishi panchami vrat katha, puja vidhi in hindi

दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं ऋषि पंचमी व्रत कथा व् पूजा विधि को । चलिए अब हम इस आर्टिकल के माध्यम से ऋषि पंचमी व्रत कथा व् पूजा विधि को पढ़ेंगे ।

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ऋषि पंचमी का व्रत हिंदू धर्म की महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ करती हैं । ऐसा कहा जाता है कि जो भी महिला एवं कन्या ऋषि पंचमी व्रत कथा व् पूजा करती हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं । यह व्रत कुंवारी कन्याओं के लिए सबसे लाभदायक होता है । ऋषि पंचमी व्रत से  महिला को सुख समृद्धि एवं शांति प्राप्त होती है । ऋषि पंचमी का व्रत एवं कथा भाद्रपद की शुक्ल पंचमी को रखी जाती है ।

ऋषि पंचमी के दिन महिलाएं एवं कन्याएं सप्त ऋषियों के साथ साथ अरुंधति की पूजा करती हैं एवं कथा सुनती हैं ।

rishi panchami puja vidhi in hindi

पूजा विधि – जो भी कन्या एवं महिला ऋषि पंचमी का व्रत करती है और कथा सुनती है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं । जो भी कन्या ऋषि पंचमी का व्रत करती है वह सुबह अपने घर की साफ सफाई करती हैं । उस दिन महिला मिट्टी के सप्त ऋषि बनाकर पूजा करती है । सप्त ऋषियों के साथ-साथ अरुंधति की भी पूजा करती हैं । हल्दी , चावल , रोली से सप्त ऋषि एवं अरुंधति की पूजा की जाती है ।

इस दिन व्रत करने वाली महिला अनाज का सेवन नहीं करती है । ऐसा कहा जाता है की ब्रह्मा जी ने एक राजा को यह व्रत करने के लिए कहा था और उस राजा ने ब्रह्माजी के बताएं अनुसार राजा रानी ने व्रत किया था ।  इस व्रत के कारण उसका पूरा परिवार धनवान हो गया था । उस व्यक्ति के ऊपर जो संकट थे  वह सभी दूर हो गए थे । तभी से ऋषि पंचमी का व्रत सभी करते है ।

कथा – विदर्भ देश में एक उत्तक नाम का ब्राह्मण रहता था । उसकी एक पत्नी थी जिसका नाम सुशीला था । वह ब्राह्मण बहुत ही सदाचारी ब्राह्मण था । वह ब्राह्मण हमेशा लोगों के कल्याण के लिए तत्पर रहता था । उसकी दो संताने थी । उसने अपनी लड़की का विवाह एक लड़के से कर दिया था । कुछ ही समय बीतने के बाद ब्राह्मण  की लड़की  के पति का देहांत हो जाता है और वह कन्या अपने पिता के यहां आकर  रहने लगती है ।

उस ब्राह्मण के ऊपर संकटों का पहाड़ टूटने लगता है । वह पूरी तरह से बर्बाद हो जाता है । ब्राह्मण अपने परिवार को लेकर हिमालय की चोटी पर चला जाता है और वहां पर एक कुटिया बनाकर अपने परिवार के साथ रहने लगता है । कुछ समय बीत जाने के बाद उसकी लड़की के शरीर में कीड़े पड़ने लगे हैं  और वह लड़की रोने लगी हैं । उस  लड़की ने मां को बताया । मां ने जब देखा कि उसके शरीर में कीड़े पड़ रहे हैं तब लड़की की मां ने अपने पति को बताया ।

ब्राह्मण ने  उस लड़की को देखा और तपस्या करके यह मालूम किया कि इस लड़की के शरीर में कीड़े क्यों पड़ रहे हैं । ब्राह्मण ने तपस्या करके यह पता लगा लिया था कि उस लड़की के शरीर में कीड़े क्यों पड़ रहे हैं । उस ब्राह्मण ने अपनी पत्नी से कहा कि यह लड़की पिछले जन्म में रजस्वला थी और उसने बर्तनों को छू लिया था जिसके कारण इस लड़की का पिछला जन्म  कष्टों से भरा हुआ था ।

इस जन्म में भी इस लड़की ने ऋषि पंचमी का व्रत नहीं किया जिसके कारण इसकी यह दशा हुई है । उस ब्राह्मण ने अपनी पत्नी को रजस्वला के बारे में बताया । रजस्वला का जीवन पहले दिन चंडालियानी होता है , इसके बाद ब्रह्माघातनी एवं तीसरा दिन धोबिन के समान अपवित्र होता है । चौथे दिन रजस्वला नहा धोकर एवं स्नान करके पवित्र होती है । ब्राह्मण ने अपनी पत्नी से कहा कि यदि यह लड़की ऋषि पंचमी का व्रत करेगी तो इसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे ।

लड़की ने अपने पिता की बात को मानकर ऋषि पंचमी का व्रत करना प्रारंभ कर दिया था । कुछ ही समय बाद  लड़की के जीवन में बदलाव आया और वह हर क्षेत्र में सफल होने लगी थी । इस तरह से जो भी महिला एवं लड़की ऋषि पंचमी का व्रत करती है कथा सुनती है एवं सुनाती है उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं ।

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