राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतिहास Rashtriya swayamsevak sangh(rss) history in hindi

Rashtriya swayamsevak sangh(rss) history in hindi

दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास को . चलिए अब हम पढ़ेंगे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास को .

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना-राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को सभी आर एस एस के नाम से भी जानते हैं . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 को की गई थी . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ केशव बलिराम हेडगेवार के द्वारा की गई थी . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव सुरेश भैया जी जोशी है और सरसंघचालक मोहन भागवत जी हैं . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भारतीय जनता पार्टी का संगठन माना जाता है .

Rashtriya swayamsevak sangh(rss) history in hindi
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का उद्धेश्य- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक ही उद्देश्य है देश को हिंदू राष्ट्र बनाना एवं राष्ट्र के हिंदुओं को एकजुट करना . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदुओं की एकता को बढ़ाने के साथ साथ हिंदू धर्म का प्रचार प्रसार भी करती है . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूरोपीय अधिकार  बिंग समूहो  से प्रारंभिक प्रेरणा ली और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को मजबूत बनाया था . भारत में जब आपातकाल लगाया गया था तब संघ के साथ साथ जनसंघ पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था . आपातकाल हटने के बाद आर एस एस का विलय जनता पार्टी के रूप में किया गया था .

1975 के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ धीरे धीरे भारतीय राजनीति के महत्व को समझ चुकी थी और 1975 के बाद इस संगठन का राजनीतिक महत्व बढ़ता गया . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पूरे भारत में 55,000 से ज्यादा शाखाएं लगती हैं . सुबह, शाम 1 घंटे की शाखा पूरे देश में लगाई जाती है . इन शाखाओं के माध्यम से जुड़े लोगों को खेल , योग सिखाया जाता है . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठन में सबसे बड़ा पद सरसंघचालक का होता है .

जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई थी तब सरसंघचालक का पद डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार को दिया गया था . जिन्होने 1925 से 1940 तक सरसंघचालक के पद को संभाला था . 1940 को माधव सदाशिवराव गोलवलकर को यह पद दे दिया था  इन्होने  1940 से 1973 तक सरसंघचालक का पद संभाला था . 1973 को सरसंघचालक का पद मधुकर दत्तात्रेय देवरस को दे दिया था जन्होने  1973 से 1993 तक सरसंघचालक का पद संभाला था . 1993 के बाद प्रोफेसर राजेंद्र सिंह को इस  पद  पर बैठाया गया था  इन्होंने 1993 से 2000 तक इस  पद को संभाला था  .

इसके बाद 2000 में कृपाहल्ली सितारमैया सुदर्शन को यह पद दे दिया गया था जिन्होंने 2000 से 2009 तक इस पद को संभाला था . 2009 में यह पद डॉ मोहन राम मधुकर राव भागवत को दे दिया गया था जो  2009 से अभी तक इस पद को संभाल रहे हैं . यह पद सबसे बड़ा पद माना जाता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सारे काम सरसंघचालक की देखरेख में किए जाते हैं . सरसंघचालक की नियुक्ति मनोनयन के द्वारा की जाती है . हर जिले , गांव , कस्बे , नगर , महानगर एवं प्रदेशों में शाखाएं चलाने के लिए संघचालक होते हैं .

संघचालक अपने उत्तराधिकारी की नियुक्ति करता है . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बुनियाद शाखाएं होती हैं . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शाखाओं के द्वारा ही मजबूत होता है . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सुबह लगने वाली शाखा प्रभात शाखा कहलाती है . सायं को लगने वाली शाखा सायं शाखा कहलाती है . रात्रि में लगने वाली शाखा रात्रि शाखा कहलाती है . सप्ताह में एक या दो बार लगने वाली शाखा मिलन शाखा कहलाती है .

शाखा में  कार्यवाहक का पद सबसे बड़ा होता है . शाखाओं का दैनिक काम सुचारू रूप से चलाने के लिए मुख्य शिक्षक का पद रखा गया है . मुख्य शिक्षक के द्वारा पूरे देश में शाखाएं लगाई जाती है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को मजबूत किया जाता है . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में जो व्यक्ति स्वयं की इच्छा से आता है वह स्वयं सेवक कहलाता है .

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश में  जब बुरे हालात उत्पन्न होते हैं तब पूरा संगठन उस हालात से बाहर निकलने में अपना योगदान देता है . 1971 में जब उड़ीसा में चक्रवात आया तब राष्ट्रीय संघ ने वहां पर जाकर वहां के लोगों की मदद की थी . 1977 में जब आंध्र प्रदेश में चक्रवात आया तब  आंध्र प्रदेश को संकट से बाहर निकालने में राष्ट्रीय संघ सेवक की अहम भूमिका थी .

आजादी के समय राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ-जब हमारा देश आजाद हुआ था तब नाथूराम गोडसे ने 1948 को महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी जिसके बाद राष्ट्रीय संघ को बंद कर दिया गया था . राष्ट्रीय संघ सेवक संघ ने पूरे सबूतों एवं गवाहों के साथ राष्ट्रीय संघ संगठन को बेगुनाह साबित किया था जिसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को पुनः प्रारंभ किया गया था . भारत देश के कई लोग राष्ट्रीय संघ स्वयंसेवक संघ को फासीवादी और हिंदूवादी कहकर संघ की आलोचना करते हैं . लेकिन आज राष्ट्रीय संघ सेवक संघ बहुत मजबूत हो चुका है . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सभी हिंदू धर्म के लोग जुड़े हुए हैं . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माध्यम से ही हिंदू धर्म के लोगों में एकता बनी हुई है .

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ जुड़े संगठन –भारतीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संगठन से बहुत सारे संगठन जुड़े हुए हैं जैसे कि भारतीय जनता पार्टी , सेवा भारती , अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद , भारतीय किसान संघ , भारतीय मजदूर संघ , राष्ट्रीय शिख संगत , लघु उद्योग भारती , स्वदेशी जागरण मंच , वनवासी कल्याण आश्रम , विश्व हिंदू परिषद , मुस्लिम राष्ट्रीय मंच , बजरंग दल , हिंदू जागरण मंच , संवाद केंद्र , विवेकानंद केंद्र , सरस्वती शिशु मंदिर , भारतीय विचार केंद्र , विद्या भारती , हिंदू स्वयंसेवक संघ आदि .

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