वर्षा जल संचयन पर निबंध Rainwater harvesting speech in hindi

Rainwater harvesting speech in hindi

Rainwater harvesting – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से वर्षा जल संचयन पर लिखें निबंध के बारे में बताने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और वर्षा जल संचयन पर लिखें निबंध को पढ़कर वर्षा जल संचयन के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Rainwater harvesting speech in hindi
Rainwater harvesting speech in hindi

वर्षा जल संचयन के बारे में – वर्षा जल संचयन वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से बारिश के पानी को संचयन करके रखा जाता है । कई तरह की विधि के माध्यम से , जल संचयन की प्रक्रिया के माध्यम से जल को एकत्रित करके आने वाले भविष्य के लिए रखा जाता है । जब बरसात होती है तब कुदरत से पानी पृथ्वी पर आता है और हम सभी उस पानी का उपयोग करते हैं । पानी की आवश्यकता मनुष्य को ही नहीं बल्कि प्रकृति , जीव-जंतु , पेड़-पौधे और जानवरों को भी होती है । मनुष्य की सभी जरूरतों में पानी आवश्यक है ।

जल संचयन एक ऐसी तकनीक है जिसके माध्यम से जल एकत्रित करके रखा जाता है । जब भूमि का जल स्तर नीचे पहुंच जाता है तब उस संचय किए गए जल का उपयोग हम कर सकते हैं ।वर्षा जल संचयन कई तकनीकों के माध्यम से , अलग-अलग संसाधनों के माध्यम से बारिश के पानी को एकत्रित किया जा सकता है । जल संचयन ही जल आपूर्ति मे सबसे ज्यादा सहायक है । प्राचीन समय में जल संचयन के कई तरीके उपयोग में लाए जाते थे ।

जिसमें कुए बनाकर बरसात का पानी एकत्रित किया जाता था और जब उस कुएं में बरसात का पानी एकत्रित हो जाता था तब उस कुएं का पानी सभी पीते थे । पीने के साथ-साथ उस कुएं के पानी का उपयोग खेती की सिंचाई में भी किया जाता था । कुए के माध्यम से ही पशुओं को पानी पिलाया जाता था । धीरे धीरे जल संचयन की तकनीक में बदलाव आया और हैंडपंप जैसी सुविधा के माध्यम से जल संचयन किया गया था । जब जल संचयन बरसात के पानी का किया जाता है तब आने वाले भविष्य में पानी की कमी महसूस नहीं होती है ।

उन स्थानों पर  वर्षा जल संचयन करने की आवश्यकता है  जिन स्थानों पर कम बारिश होती है , जहां पर लोग पानी की समस्या से जूझते हैं । यदि वहां पर वर्षा जल संचयन अलग-अलग संसाधनों के माध्यम से किया जाए तो वहां की पानी की समस्या को खत्म किया जा सकता है । जैसा कि हम जानते हैं पानी का उपयोग सिंचाई में सबसे अधिक किया जाता है । सिंचाई के बाद ही फसल की उत्पत्ति होती है । कहने का तात्पर्य यह है कि पानी के बिना खेती करना नामुमकिन है । इसके साथ साथ यदि कोई पशुपालन करता है तो उसके लिए पानी की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है ।

जिस आवश्यकता की पूर्ति के लिए वह टैंक या तालाब का सहारा लेता है । जब बरसात होती है तब तालाब और टैंक में जो बरसात का पानी एकत्रित होता है उस पानी के माध्यम से वह पशुपालन बहुत आसानी से करता है । शहरों में रहने वाले लोग भी वर्षा जल संचयन  नई-नई तकनीक के माध्यम से करते हैं क्योंकि शहरों में पानी की कमी सबसे ज्यादा होती है । शहरों में रहने वाले लोग अपने घर के बगल में एक टैंक खुदबाते हैं और उस टैंक में आसपास से जो पानी बहकर आता है वह पानी उस टैंक में एकत्रित हो जाता है और वह टैंक जिस टैंक में पानी एकत्रित है वह पानी भूमि को नमी देता रहता है ।

जिससे कि ट्यूबवेल के पानी का स्तर नीचे ना पहुंचे । वर्षा जल संचयन वह तकनीक है जिसका उपयोग भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में भी किया जाता है । पहाड़ी इलाकों में जब वर्षा होती है तब वह पानी पहाड़ों की चट्टानों की दरारों में एकत्रित हो जाता है और पहाड़ी इलाकों मे एक विस्तृत तालाब बनाया जाता है । जिस तालाब में वर्षा का पानी पहाड़ों से बहता हुआ एकत्रित हो जाता है और वह पानी सभी लोग उपयोग में लाते हैं और पानी की कमी को खत्म करते हैं । मैं आप लोगों से पूछना चाहता हूं कि ऐसा कौन सा कार्य है जिस कार्य को आप पानी के बिना कर सकते हो ।

खाने से लेकर के व्यक्ति के हर कार्य में पानी की आवश्यकता होती है । भारत देश में वर्षा जल संचयन के माध्यम से वर्षा के पानी को एकत्रित किया जाता है और पानी की कमी को खत्म किया जाता है । भारत देश में 214 बिलियन घन मीटर वर्षा के जल का संचयन प्रतिवर्ष किया जाता है ।जिस संचयन के माध्यम से 160 बीसीएम पुनः जल की प्राप्ति हो जाती है । वर्षा जल संचयन भविष्य में आने बाली पानी की कमी को पूरा करती है । हम किसी भी माध्यम से वर्षा के जल को बचा कर रखें वह माध्यम जल संचयन कहलाती है ।

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