रैगिंग पर निबंध ragging essay in hindi

ragging essay in hindi

दोस्तों आज हम आपके लिए लाएं हैं रैगिंग पर लिखें इस निबंध को । चलिए अब हम पढ़ेंगे रैगिंग पर लिखे इस निबंध को । रैगिंग हमारे भारत देश के कॉलेजों एवं स्कूलों में की जाती है । रैगिंग की वजह से काफी स्टूडेंट आत्महत्या कर चुके हैं । जब कॉलेजों में नए स्टूडेंट पढ़ने के लिए आते हैं तब पुराने स्टूडेंट के द्वारा रैगिंग की जाती है। रैगिंग करने से कई स्टूडेंट परेशान हो जाते हैं और आत्महत्या कर लेते हैं । रैगिंग करने का मतलब होता है नए स्टूडेंट के साथ हंसी ,मजाक करना, उसको परेशान करना ।

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image source –https://odishasuntimes.com/aicte

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो रैगिंग को सहन कर लेते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो रैगिंग से बहुत ज्यादा परेशान हो जाते हैं । रैगिंग करते समय पुराने स्टूडेंट नए स्टूडेंट के कपड़े तक उतार देते हैं और उनको चिढ़ाते हैं जिससे वह बहुत परेशान हो जाते हैं। कई संस्थानों में रैगिंग करने वाले छात्र नए स्टूडेंटो के अजीब से नाम भी रख देते हैं ।

रैगिंग के कारण होने वाली मौतों से सुप्रीम कोर्ट ने यू.जी.सी एक्ट 1956 बनाया है इसके अंतर्गत सभी स्कूल , कॉलेजों एवं संस्थाओं में विद्यार्थियों को रैगिंग करने से रोका जाता है यदि कोई विद्यार्थी क़िसी के साथ रैगिंग करता है और वह व्यक्ति उसके खिलाफ शिकायत करता है तो उसके खिलाफ 1956 एक्ट के तहत कार्यवाही की जाएगी । रैगिंग के मामले थम नहीं रहे हैं । 2009 से 2010 तक रैगिंग के कारण सर्वाधिक मौतें हो चुकी हैं ।

पूरे भारत में रैगिंग के कारण होने वाली मौतें सबसे जायदा महाराष्ट्र में हुई हैं । हमें सबसे ज्यादा रैगिंग मेडिकल कॉलेजों एवं इंजीनियर कॉलेज में देखने को मिलती है । रैगिंग एक्ट 1956 लागू होने के बाद भी रैगिंग रुक ही नहीं रही हैं । इसका सबसे बड़ा कारण है की नए विद्यार्थी रैगिंग करने वालों के खिलाफ आवाज नहीं उठाते हैं , उनकी शिकायत नहीं करते हैं । जिससे वह बच जाते हैं और उन्हें किसी भी तरह का डर नहीं लगता है ।

इस एक्ट के आधार पर यदि कोई व्यक्ति आपके साथ रैगिंग करता है तो आप उसके खिलाफ विद्यालय के प्राचार्य को सूचना दे सकते हैं । प्राचार्य रैगिंग करने वालों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे । सभी लोग हंसी, मजाक करने के लिए रैगिंग करते हैं लेकिन हंसी, मजाक कभी कभी मेहंगी पड़ जाती है । यदि कोई व्यक्ति हमारे साथ रैगिंग करता है तो हम उसके खिलाफ रिपोर्ट कर सकते हैं । हमें किसी भी तरह की कोई भी रैगिंग सहन नहीं करना चाहिए ।

यदि कोई भी व्यक्ति हमारे साथ जबरदस्ती कुछ भी करता है तब हमें विद्यालय के प्राचार्य को सूचना देना चाहिए । यदि प्राचार्य कोई सुनवाई नहीं कर रहा है तो हमें इसकी रिपोर्ट थाने में करनी चाहिए । हमारे परिवार वालों को भी इस बात की सूचना दे देनी चाहिए क्योंकि जुल्म करने वाले से सबसे बड़ा गुनहगार जुल्म सहन करने वाला होता है । इसीलिए हमें किसी के द्वारा किए गए अत्याचार को सहन नहीं करना चाहिए ।

उसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए क्योंकि हमारे भारत के संविधान में सभी को अपनी जिंदगी जीने का अधिकार होता है । कोई भी व्यक्ति हमारे जीवन में इंटरफेयर नहीं कर सकता है । हम स्कूल ,कॉलेज एवं संस्थानों में पढ़ाई करने के लिए जाते हैं ना कि रैगिंग करने के लिए । रैगिंग करने से हमारा एवं कई विद्यार्थियों का समय नष्ट होता है । यदि हम रैगिंग ना करके अपना ध्यान पढ़ाई में लगाएं तब हमें सफलता प्राप्त होगी ।

विद्यालय एवं संस्थानों के प्राचार्य की जिम्मेदारी होती है कि वह विद्यार्थियों को रैगिंग करने से रोके और रैगिंग से होने वाले दुष्प्रभाव को बताएं । रैगिंग के कारण कई विद्यार्थियों की जान जा चुकी है इसीलिए रैगिंग को रोकने के लिए भारतीय कानून में यू.जी.सी एक्ट 1956 लाया गया है ।

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