पुरुषोत्तम मास की पौराणिक कथा purushottam maas katha in hindi

purushottam maas katha in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से पुरुषोत्तम मास की पौराणिक कथा सुनाने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और पुरुषोत्तम मास की पौराणिक कथा को सुनते हैं ।

purushottam maas katha in hindi
purushottam maas katha in hindi

image source –https://iskconvrindavan.com/2018/05/18/

प्राचीन ग्रंथ के अनुसार पुरुषोत्तम मास की कथा – सभी नक्षत्र , राशि , करण एवं सभी 12 मास के स्वामी होते हैं ।परंतु अधिक मास या मलमास का कोई भी स्वामी नहीं है । इस बात से अधिक मास बहुत ही परेशान थे ।  अधिक मास का सोचना था की सभी के स्वामी हैं परंतु मेरा कोई भी स्वामी नहीं है । इसलिए मुझे कोई भी नहीं पूछता है ।अधिक मास का कोई स्वामी ना होने के कारण अधिक मास को मलमास कहने लगे ।

जब उसे कोई मलमास के नाम से पुकारता तब मलमास को बड़ा ही दुख होता था ।एक समय अधिक मास बहुत दुखी था और वह भगवान विष्णु जी के पास गए । वहां अधिक मास ने विष्णु भगवान को अपनी पूरी दुख भरी कहानी बताई । जब भगवान विष्णु जी ने अधिक मास की कहानी सुनी तब उन्होंने अधिक मास को गोलोक जाने के लिए कहा । जब अधिकमास गोलोक गया तब अधिक मास की मुलाकात भगवान श्रीकृष्ण से हुई ।

अधिक मास ने भगवान कृष्ण को अपनी दुख भरी कहानी बताई । भगवान श्री कृष्ण ने जब अधिक मास की दुख भरी कहानी सुनी तब उनको बड़ा दुख हुआ । भगवान श्री कृष्ण अधिक मास से कहने लगे  कि आज से मैं तेरा स्वामी हूं । आज और अभी से मेरे सभी दिव्य गुण तुम में समाहित हो जाएंगे । मुझे यह पूरी दुनिया पुरुषोत्तम के नाम से पुकारती है । इसलिए मैं तुमको अपना नाम देता हूं । आज से तुमको सभी पुरुषोत्तम मास के नाम से जानेंगे ।

जो भी व्यक्ति पूरी भक्ति एवं मन से तीसरे वर्ष में तुम्हारे आगमन पर तुम्हारी पूजा करेगा उसको मनचाहा वरदान प्राप्त होगा , उस व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाएंगे । इस तरह से अधिक मास को पुरुषोत्तम मास का नाम मिला । तभी से सभी प्रति तीसरे वर्ष में पुरुषोत्तम मास के आगमन पर पुरुषोत्तम मास की पूजा करते हैं , कथा कहते हैं । इस दिन दान पुन करने से , गंगा नदी में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और सभी कष्ट दूर होते हैं ।

जिस तरह से भगवान श्री कृष्ण ने अधिक मास के दुख को दूर किया हैं । उसी तरह से पुरुषोत्तम मास के दिन पूजा पाठ करने से , व्रत करने से , कथा सुनने से सभी कष्ट दूर होते हैं और खुशियां आती है । तभी से अधिक मास के स्वामी श्री कृष्ण कहलाए जाते हैं और जिस तरह से श्री कृष्ण भगवान को पूजा जाता है उसी तरह से पुरुषोत्तम मास को भी मान-सम्मान एवं पूजा की जाती है , कथा कही जाती है ।

ऐसा कहा जाता है कि तीसरे वर्ष में जब पुरुषोत्तम मास का आगमन होता है तब दान पुण्य करने से मन की शांति प्राप्त होती है और भगवान श्री कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है । पुरुषोत्तम मास के आगमन पर सभी शुभ कार्य , देव कार्य , पितृ कार्य वर्जित माने जाते हैं ।

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