विकलांगता पर कविता Poem on handicapped in hindi

विकलांगता पर कविता Poem on handicapped in hindi

दोस्तों कैसे हैं आप सभी,दोस्तों आज हम विकलांगता पर कविता लिखने वाले है. विकलांग जो प्रकृति के अभिशाप या बस, किसी वाहन से दुर्घटना के कारण होते हैं और किसी दूसरे पर निर्भर होते हैं.विकलांग व्यक्ति वास्तव में समाज के कुछ लोगों द्वारा समझा जाने वाला एक बोझ है लेकिन हमारी कविता वास्तव में विकलांगों का हौसला बढ़ा देगी और हमें भी विकलांगो के प्रति अपने कर्तव्य को निभाने के प्रति जागरुक करेगी आप हमारी इस कविता को जरुर पढ़े तो चलिए पढ़ते हैं हमारी आज की इस कविता को

poem on handicapped in hindi
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बढ़ते चलो तुम बढ़ते चलो तुम
विकलांग हो भले ही बढ़ते चलो तुम
बोझ कोई तुम्हें समझता
बोझ ना हो तुम किसी पर                                                                                                                                                                         बढ़ते चलो तुम बढ़ते चलो तुम

अपनी क्षमता को पहचानो
नए नए रोजगार को पहचानो
बोझ ना रहोगे तुम खुश रहोगे तुम                                                                                                                                                               बढ़ते चलो तुम बढ़ते चलो तुम
विकलांग हो भले ही बढ़ते चलो तुम 

विकलांगो के प्रति कर्तव्य तुम निभाओ
खुशी के दो पल उनके संग तुम बिताओ
उन्हें बोझ तुम ना समझो कर्तव्य तुम निभाओ
बढ़ते चलो तुम बढ़ते चलो तुम
विकलांग हो भले ही बढ़ते चलो तुम

वास्तव में हम सभी विकलांगो के प्रति अपने कर्तव्य को निभाना चाहिए और उनकी मदद करनी चाहिए.

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