फणीश्वर नाथ रेणु जीवनी Phanishwar nath renu biography in hindi

Phanishwar nath renu biography in hindi

Phanishwar nath – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से फणीश्वर नाथ रेणु के जीवन के बारे में बताने जा रहे हैं ।चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और फणीश्वर नाथ रेणु के जीवन के बारे में जानते हैं ।

Phanishwar nath renu biography in hindi
Phanishwar nath renu biography in hindi

Image source – https://en.m.wikipedia.org/wiki/Phanishwar_Nath_%27Renu%27

भारत के हिंदी साहित्य के महान साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु के जन्म स्थान व् परिवार के बारे में – फणीश्वर नाथ रेणु भारत देश के हिंदी साहित्य के महान साहित्यकार के रूप में पहचाने जाते हैं । जिन्होंने अपने जीवन को देश के हित में लगा दिया था । हिंदी साहित्य के महान साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु का जन्म 4 मार्च 1921 को भारत देश के बिहार राज्य के अररिया जिले में फोरबिसगंज के पास स्थित हिंगना गांव में हुआ था । जो उस समय पूर्णिया जिले में आता था । भारत के हिंदी साहित्य के महान साहित्यकार के रूप में अपनी पहचान बना चुके फणीश्वर नाथ रेणु का जन्म शिलानाथ मंडल एवं उनकी माता पाणो देवी के यहां पर हुआ था ।

फणीश्वर नाथ रेणु के पिता शिलानाथ मंडल एक समृद्ध  परिवार से ताल्लुक रखते थे और फणीश्वर नाथ रेणु के पिता शिलानाथ मंडल खेती करके अपना और अपने परिवार का भरण पोषण किया करते थे । फणीश्वर नाथ रेणु के पिता शिलानाथ मंडल उस समय भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी हिस्सा लिया करते थे । कहने का तात्पर्य यह है कि फणीश्वर नाथ रेणु का परिवार देशभक्त परिवार था । अपने परिवार से ही फणीश्वर नाथ रेणु जी को देश हित में कार्य करने के विचार प्राप्त हुए थे ।

फणीश्वर नाथ रेणु के पिता शिलानाथ मंडल उनको अक्सर यह कहा करते थे कि यदि देश को आजादी दिलाने के लिए एवं देश के नागरिकों को सही रास्ता दिखाने के लिए यदि उनकी जान चली जाए तो इसका दुख मत करना और तुम भी देश के नागरिकों को देश की आजादी के लिए सचेत करना । फणीश्वर नाथ रेणु के पिता शिलानाथ मंडल एक भारतीय किसान होने के साथ-साथ भारतीय स्वतंत्रता सेनानी भी रहे हैं ।

जिस तरह से फणीश्वर नाथ रेणु के पिता शिलानाथ मंडल के दिल के अंदर अपने देश के लिए मर मिटने का जज्बा था उसी तरह से उनकी माता भी एक गृहिणीका होने के साथ-साथ भारत देश की भारतीय महिला भी थी और वह भारतीय महिला होने का कर्तव्य निभा रही थी । जब भी देशहित के कार्यों के लिए उनकी माता को अपना योगदान देने का मौका मिलता था तब उनकी माता  स्वतंत्रता संग्राम में अपना महत्वपूर्ण योगदान देती थी ।

फणीश्वर नाथ रेणु का पूरा गांव उनके पिता शिलानाथ मंडल का सम्मान करता था और उनके पिता के द्वारा बताए गए रास्ते पर चलते थे । फणीश्वर नाथ रेणु के माता-पिता ने उनको बचपन से ही राष्ट्र हित के लिए कार्य करने के लिए कहा था और वह अपने माता-पिता के बताए गए रास्तों पर चलने लगे थे ।

फणीश्वर नाथ रेणु की शिक्षा के बारे में – फणीश्वर नाथ रेणु ने अपनी शिक्षा भारत और नेपाल देश में ग्रहण की है । यदि हम फणीश्वर नाथ रेणु की प्रारंभिक शिक्षा के बारे में बात करें तो फणीश्वर नाथ रेणु जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा फारबिसगंज अररिया से प्राप्त की है । जब फणीश्वर नाथ रेणु ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी कर ली थी तब वह अपनी आगे की पढ़ाई करने के लिए भारत में ही स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय से इंटर की पढ़ाई करने लगे थे और काशी हिंदू विश्वविद्यालय से फणीश्वर नाथ रेणु ने इंटर की पढ़ाई पूरी की थी । इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद फणीश्वर नाथ रेणु नेपाल चले गए थे ।

नेपाल के विराटनगर में स्थित विराटनगर आदर्श विद्यालय से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी । जब वह मैट्रिक की पढ़ाई करने के लिए नेपाल गए थे तक वह कोईराला परिवार के साथ रहते थे । जिस परिवार में रहकर उन्होंने अपनी मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की थी । जब फणीश्वर नाथ रेणु अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे थे तब बह भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने लगे थे ।अपनी पढ़ाई पूरी करने के दौरान फणीश्वर नाथ रेणु छात्र संघर्ष समिति में हिस्सा लेने लगे थे ।

फणीश्वर नाथ रेणु जी ने बिहार राज्य के पटना में स्थित विश्वविद्यालय से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था । जब फणीश्वर नाथ रेणु जी अपना ग्रेजुएशन पूरा कर रहे थे तब पटना विश्वविद्यालय में छात्र संघर्ष समिति मे अपना महत्वपूर्ण योगदान देने लगे थे और अपने मित्रों के साथ मिलकर छात्र के अधिकार के लिए लड़ने लगे थे । इस प्रकार से फणीश्वर नाथ रेणु जी ने अपनी शिक्षा प्राप्त की है ।

फणीश्वर नाथ रेणु के द्वारा किए गए क्रांतिकारी आंदोलन के बारे में – भारत के हिंदी साहित्य के महान लेखक , उपन्यासकार फणीश्वर नाथ रेणु जब नेपाल में अपनी पढ़ाई करने के लिए गए थे तब 1950 में  नेपाल में क्रांतिकारी आंदोलन प्रारंभ हुआ था और फणीश्वर नाथ रेणु ने 1950 में नेपाली क्रांतिकारी आंदोलन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था । जिसके बाद नेपाल में जनतंत्र की स्थापना हुई थी । नेपाल में जनतंत्र की स्थापना के पीछे फणीश्वर नाथ रेणु का महत्वपूर्ण योगदान रहा है ।

फणीश्वर नाथ रेणु ने छात्र संगठन , छात्र समिति के साथ मिलकर यह जनतंत्र आंदोलन प्रारंभ किया था और इस आंदोलन को फणीश्वर नाथ रेणु ने सफल बनाया था । फणीश्वर नाथ रेणु ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी हिस्सा लिया था । जब फणीश्वर नाथ रेणु इंटर की पढ़ाई कर रहे थे तब फणीश्वर नाथ रेणु भारत देश में चल रहे स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए थे । फणीश्वर नाथ रेणु जी ने जयप्रकाश नारायण के द्वारा किए गए क्रांति आंदोलन की संपूर्ण क्रांति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है ।

फणीश्वर नाथ रेणु के पहले सफल  उपन्यास के बारे में – फणीश्वर नाथ रेणु जी को शिक्षा प्राप्त करने के दौरान से ही लेख लिखने में बड़ी रुचि थी । जैसे-जैसे उनका जीवन आगे बढ़ता गया वह लेख लिखने  की ओर अपना ध्यान केंद्रित करने लगे थे । फणीश्वर नाथ रेणु जब सन 1952  के समय रोग ग्रस्त हो गए थे तब  फणीश्वर नाथ रेणु जी ने अपना पूरा ध्यान लेख लिखने की ओर लगा दिया था और फणीश्वर नाथ रेणु ने हिंदी भाषा में लेख लिखने मे अपनी रुचि दिखाई थी । फणीश्वर नाथ रेनू के द्वारा पहला और सफल उपन्यास मैला आंचल लिखा गया था ।

जिस उपन्यास को  काफी लोगों ने पढ़ा और फणीश्वर नाथ रेणु के लेख की प्रशंसा की है । यह उपन्यास इतना अच्छा और सफल रहा था कि फणीश्वर नाथ रेणु के इस उपन्यास के लिए फणीश्वरनाथ रेणु को भारत सरकार के द्वारा पदम श्री से सम्मानित किया गया था क्योंकि फणीश्वर नाथ रेणु ने इस उपन्यास को लिखने के लिए काफी मेहनत की थी और पूरा दिमाग इस उपन्यास को लिखने में लगा दिया था ।

फणीश्वर नाथ रेणु के उपन्यास – फणीश्वर नाथ रेणु का पहला और सफल उपन्यास मैला आंचल था । जिस उपन्यास ने काफी ख्याति प्राप्त की थी । इस उपन्यास ने रातो रात हिंदी के एक बड़े कथाकार के रूप में फणीश्वर नाथ रेणु को प्रसिद्ध कर दिया था और सफलता की उस ऊंचाई तक पहुंचा दिया था जहां पर पहुंचना एक आम व्यक्ति को बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है । हिंदी साहित्य में गोदान के बाद यह मैला आंचल दूसरा सर्वश्रेष्ठ उपन्यास था । जिस उपन्यास को दूसरा सर्वश्रेष्ठ उपन्यास घोषित किया गया था । इसके बाद फणीश्वर नाथ रेणु ने और भी कई उपन्यास लिखे थे ।

जिस उपन्यासो को पढ़कर काफी लोगों ने आनंद प्राप्त किया था । फणीश्वर नाथ रेणु के द्वारा लिखा गया उपन्यास परती परीकथा काफी लोकप्रिय उपन्यास रहा है । जिस उपन्यास की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है । इसके बाद फणीश्वर नाथ रेणु जी के द्वारा लिखा गया उपन्यास जुलूस था । जिस उपन्यास में फणीश्वर नाथ रेणु जी ने जुलूस की आत्मकथा के बारे में बताया है । इसके बाद फणीश्वर नाथ रेणु के द्वारा लिखा गया सबसे प्रसिद्ध और सबसे अच्छा उपन्यास कितने चौराहे था ।

जिसमें फणीश्वर नाथ रेणु जी के द्वारा भारत के विभिन्न क्षेत्रों में , विभिन्न राज्यों , विभिन्न जिलों में स्थित चौराहे के बारे में विस्तार रूप से बताया है । इसके बाद फणीश्वर नाथ रेणु जी के द्वारा लिखा गया उपन्यास दीर्घ तपा है । जिस उपन्यास की काफी प्रशंसा पढ़ने वालों के द्वारा की गई थी । उसके बाद फणीश्वर नाथ रेणु जी के द्वारा पलटू बाबू रोड बेहतरीन उपन्यास लिखा गया था । जिस उपन्यास को पढ़ने के बाद बहुत ही आनंद आता है ।

फणीश्वर नाथ रेणु जो भी उपन्यास लिखते थे उस उपन्यास में पूरी सच्चाई लिख दिया करते थे क्योंकि फणीश्वर नाथ रेणु जी यह चाहते थे कि भारत का विकास और भारत के लोगों का विकास होना बहुत ही जरूरी है ।भारत का विकाश तब तक संभव नहीं है जब तक लोगों को उनकी असली पहचान मालूम ना हो । इस तरह से फणीश्वर नाथ रेणु जी के द्वारा प्रसिद्ध उपन्यास हिंदी भाषा में लिखे गए थे । फणीश्वर नाथ रेणु के द्वारा लिखे गए उपन्यास को पढ़कर भारत देश के विकास में काफी तेजी देखी गई थी ।

फणीश्वर नाथ रेणु के रिपोतार्ज के बारे में – फणीश्वर नाथ रेणु ने अपने रिपोतार्ज मे कई लेख लिखे हैं । ऋण जल लेख फणीश्वर नाथ रेणु का सबसे प्रसिद्ध लेख है । इसके बाद फणीश्वर नाथ रेणु जी के द्वारा नेपाली क्रांति कथा भी रिपोतार्ज में लिखी है । जिसमे फणीश्वर नाथ रेणु जी ने नेपाल में हुई क्रांति के बारे में लिखा है । इसके बाद फणीश्वर नाथ रेणु जी के द्वारा रिपोतार्ज मे बन तुलसी की गंध लिखा है । उसके बाद फणीश्वर नाथ रेणु जी के द्वारा श्रुत अश्रुत  पूर्वे लेख लिखा है ।

फणीश्वर नाथ रेणु के कथा संग्रह के बारे में – फणीश्वर नाथ रेणु जी के द्वारा कई कथाएं लिखी गई हैं । फणीश्वर नाथ रेणु जी के द्वारा लिखी गई प्रसिद्ध कथाओं के नाम इस प्रकार से हैं । फणीश्वरनाथ रेणु के द्वारा लिखा गया सबसे प्रसिद्ध कथा संग्रह एक आदिम रात्रि की महक है । जिस कथा को काफी प्रसिद्धि प्राप्त हुई है । इसके बाद फणीश्वर नाथ रेणु के द्वारा लिखा गया सबसे प्रसिद्ध कथा संग्रह ठुमरी है । जिस कथा संग्रह को भारतीय लोगों ने काफी पसंद किया था । इसके बाद फणीश्वर नाथ रेणु जी के द्वारा लिखा गया सबसे अच्छा कथा संग्रह अच्छे आदमी था ।

जिसमें फणीश्वर नाथ रेणु जी ने अच्छे आदमी में होने वाले अच्छे गुणों के बारे में बताया है और इस लेख में फणीश्वर नाथ रेणु जी के द्वारा यह बताया गया है कि यदि इंसान अपने अंदर अच्छी भावना रखे तो वह अच्छे कर्म करना प्रारंभ कर देता है और वह अच्छा आदमी बन जाता है । इसके बाद फणीश्वर नाथ रेणु के द्वारा लिखा गया सबसे अच्छा सबसे प्रसिद्ध कथा संग्रह अग्नि खोर है । जिस कथा संग्रह को काफी लोगों ने पसंद किया है । फणीश्वर नाथ रेणु जी के द्वारा लिखी गई कथा को पढ़कर एक आनंद प्राप्त होता है ।

जो भी व्यक्ति फणीश्वर नाथ रेणु के द्वारा लिखी गई कथा को पड़ता है वह अपने जीवन में एक सफल इंसान बनता है क्योंकि फणीश्वर नाथ रेणु की  कथाओं में अच्छे व्यक्ति के चरित्र के बारे में बताया है ।

फणीश्वर नाथ रेणु की प्रसिद्ध कहानियों के बारे में – फणीश्वर नाथ रेणु की सबसे प्रसिद्ध कहानियां इस प्रकार से है । मारे गए गुलफाम कहानी फणीश्वर नाथ रेणु की सबसे प्रसिद्ध कहानी है । जिस कहानी को पढ़ने के बाद बहुत ही आनंद प्राप्त होता है । इसके बाद फणीश्वर नाथ रेणु की सबसे अच्छी कहानी लाल पान की बेगम है । जिस कहानी को पढ़ने के बाद काफी आनंद प्राप्त होता है । इसके बाद फणीश्वर नाथ रेणु की सबसे अच्छी कहानी एक आदिम रात्रि की महक है । इसको पढ़ने के बाद बहुत ही आनंद प्राप्त होता है । फणीश्वर नाथ रेणु के द्वारा लिखी गई कहानी पंचलाइट बहुत ही अच्छी प्रसिद्ध कहानी है ।

जिसको पढ़ने के बाद एक आनंद की अनुभूति प्राप्त होती है । इसके बाद फणीश्वरनाथ की सबसे प्रसिद्ध कहानी ठेस है । इस कहानी को पढ़ने के बाद आनंद प्राप्त होता है ।फणीश्वर नाथ रेणु के द्वारा लिखी गई कहानी तबे एकला चलो रे सबसे प्रसिद्ध कहानी है । इस कहानी को पढ़ने के बाद आनंद प्राप्त होता है । इसके बाद फणीश्वर नाथ रेणु की और भी प्रसिद्ध कहानी संवदिया है । जिस कहानी को पढ़ने के बाद अंदर से फणीश्वर नाथ रेणु के प्रति सम्मान प्राप्त होता है ।

फणीश्वर नाथ रेणु की लेखन शैली के बारे में – फणीश्वर नाथ रेणु  की लेखन शैली वर्णनात्मक थी । जिस लेखन शैली में फणीश्वर नाथ रेणु पात्र के प्रत्येक मनोवैज्ञानिक सोच का विवरण फणीश्वर नाथ रेणु ने लुभावने तरीके से किया था क्योंकि इसमें पात्रों का निर्माण काफी तेज गति से होता है । जिस बात का प्रमाण फणीश्वर नाथ रेणु के द्वारा लिखा गया लेख एक आदमी रात्रि की महक से प्राप्त होता है । फणीश्वर नाथ रेणु के द्वारा लिखे गए उपन्यास और कहानी में उन्होंने आंचलिक जीवन के हर लए , हर धुन , हर गंध , हर सुर , हर ताल एवं हर कुरूपता को शब्दों बांधने की कोशिश फणीश्वर नाथ रेणु के द्वारा की गई है ।

फणीश्वर नाथ रेणु ने अपनी भाषा शैली में जादुई सा असर दिखाया है । जो भी व्यक्ति फणीश्वर नाथ रेणु के लेख पड़ता है वह लेख सभी पाठकों को अपने साथ बांधकर रखता है ।

फणीश्वर नाथ रेणु की पुस्तक के बारे में – फणीश्वर नाथ रेणु की सबसे प्रसिद्ध पुस्तक फणीश्वर नाथ रेणु का कथा शिल्प है । जिस पुस्तक को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के ग्रांड से प्रकाशित किया गया है । यह पुस्तक 1990 में प्रसिद्ध लेखक रेणु शाह के द्वारा प्रकाशित की गई है ।

फणीश्वर नाथ रेणु को मिले पुरस्कार के बारे में – फणीश्वर नाथ रेणु भारत के महान हिंदी भाषा के उपन्यासकार हैं ।जिन्होंने कई लेख लिखे हैं । उनका सबसे प्रसिद्ध लेख मैला आंचल ने काफी सफलता प्राप्त की है । जिसके लिए फणीश्वर नाथ रेणु को पदम श्री से सम्मानित किया गया है ।

दोस्तों हमारे द्वारा लिखा गया यह है जबरदस्त आर्टिकल फणीश्वर नाथ रेणु का जीवन परिचय Phanishwar nath renu biography in hindi यदि आपको पसंद आए तो सबसे पहले आप सब्सक्राइब करें इसके बाद अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों में शेयर करना ना भूलें धन्यवाद ।

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *