पराधीन सपनेहु सुख नाहीं निबंध Paradhin sapne sukh nahi essay in hindi

Paradhin sapne hun sukh nahi essay in hindi

Paradhin sapne sukh nahi essay in hindi
Paradhin sapne sukh nahi essay in hindi

paradhin sapnehu sukh nahi hindi-जो व्यक्ति पराधीन होता है उसे सपने में भी सुख नहीं होता। यह बात श्री तुलसीदास जी ने कई है वास्तव में यह बात पूरी तरह से सही है। पराधीन व्यक्ति ना तो जीवन में कुछ खास कर पाता है और ना ही सफल हो पाता है। और जीवन में वहीं के वहीं रह जाता है। पराधीन एक व्यक्ति का दुश्मन होता है जो उसको दूसरे लोगों पर आधीन रहना सिखाता है। वास्तव में हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए स्वाधीन होना चाहिए।

जो व्यक्ति स्वाधीन होता है वह जीवन में सफलता की बुलंदियों को छूता है और जीवन में बहुत कुछ करके दिखा देता है। लेकिन पराधीन व्यक्ति का गुण व्यक्ति को कुछ भी नहीं करने देता अगर पराधीन व्यक्ति अपने जीवन में सुख पाने की लालसा रखता है तो उसे समझ जाना चाहिए कि कभी भी उसे सुख नहीं मिल सकता।

अगर कोई व्यक्ति आलसी है तो वह व्यक्ति धीरे-धीरे पराधीन होता जाता है वह अपना कार्य स्वयं नहीं कर पाता वह कई समस्याओं के घेरे में आ जाता है। जिस तरह से आलस्य मनुष्य का शत्रु है उसी तरह से पराधीन भी एक तरह से मनुष्य का शत्रु ही है। आज हम देखें तो हमारे देश के कई लोग ऐसे हैं जो विदेशी वस्तुओं को, विदेशी संस्कृति को अपनाते हैं। वो आज स्वतंत्र हो चुके हैं फिर भी पराधीन है वास्तव में हमारे देश का विकास तभी हो सकता है जब हम स्वाधीन हैं।

हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को आजादी दिलाने के लिए काफी संघर्ष किया। यहां तक कि अपने प्राणों का बलिदान दे दिया लेकिन यदि हम आज भी पराधीन हैं तो यह हमारे देश के विकास के लिए एक बाधा है। हमें देश के विकास के लिए स्वाधीन होने की जरूरत है।

हर एक इंसान जीवन में विकास करना चाहता है उसके परिवार वाले भी अपने परिवार के सदस्य को आगे बढ़ते हुए देखना चाहते हैं। लेकिन वास्तव में पराधीनता की वजह से सफलता मनुष्य से दूर ही रहती है। मनुष्य को वह सफलता नहीं मिलती और जीवन में पीछे रह जाता है। अगर किसी देश में पराधीन लोग अधिक हो तो वास्तव में उस देश का विकास भी होना कम हो जाता है क्योंकि देश के लोगों से ही देश का विकास होना या ना होना होता है। अगर देश के लोग विकास करते हैं तो देश विकास करता है। पराधीन देश के विकास में एक अवरुद्ध होता है। मनुष्य को पराधीन होने से बचना चाहिए और अपने भविष्य को बचाना चाहिए। मनुष्य को स्वाधीन होना चाहिए।

क्योंकि स्वाधीन ही मनुष्य को आगे बढ़ाता है साथ में मनुष्य को चाहिए कि अपने आलस्य को दूर करें, निरंतर व्यायाम करें, सुबह शाम भ्रमण करें जिससे उसका आलस्य दूर हो क्योंकि जो लोग पराधीन होते हैं ज्यादातर वह आलसी ही होते हैं। कोई भी व्यक्ति पराधीन व्यक्ति को पसंद नहीं करता उसके परिवार वाले भी उसको पसंद नहीं करते वह कुछ हद तक उस व्यक्ति की मदद करते हैं लेकिन आगे चलकर उस व्यक्ति की कोई मदद भी नहीं करता अगर व्यक्ति पराधीन होता है तो।

वह कई बीमारियों की चपेट में भी आ सकता है और साथ में समाज में भी उसे अच्छा नहीं समझा जाता उसे कहीं तरह की बातें भी सुनना पड़ती हैं। अगर वह कोई नौकरी या बिजनेस करता है तो उसका बॉस उसे कई बातें सुना देता है। और जीवन में एक बुरी जिंदगी जीता है इसलिए हमें स्वाधीन होना चाहिए खुद को और देश को आगे बढ़ाना चाहिए। वास्तव में देश और समाज का विकास स्वाधीन व्यक्ति कर सकता है। पराधीन व्यक्ति जीवन में कभी भी आगे नहीं बढ़ सकता।

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