पाम जुमेराह का इतिहास Palm jumeirah history in hindi

Palm jumeirah history in hindi

Palm jumeirah – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से पाम जुमेराह के बारे में बताने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और पाम जुमेराह के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Palm jumeirah history in hindi
Palm jumeirah history in hindi

दुबई के पाम जुमेराह  के बारे में –  पाम जुमेराह दुबई का सबसे सुंदर स्थान है । पाम जुमेराह दुबई के समुद्र में स्थापित किया गया है । पाम जुमेराह को बनाने के लिए काफी मेहनत की गई है । पाम जुमेराह को बनाने के लिए समुद्र में पत्थरों की शिला बिछाई गई है । पाम जुमेराह को बनाने के लिए स्टील का उपयोग एवं सीमेंट का उपयोग नहीं किया गया है । पाम जुमेराह के निर्माण के लिए 5,500,000 वर्ग मीटर  ग्रेनाइट पत्थर  का उपयोग  किया गया है । पत्थर के साथ-साथ  पाम जुमेराह के निर्माण में 94,000,000 वर्ग मीटर  रेत का भी उपयोग किया गया है ।

पाम जुमेराह विश्व का , पृथ्वी का सबसे बड़े कृत्रिम द्वीप के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है । यदि हम पाम जुमेराह के निर्माण में किस की महत्वपूर्ण भूमिका है इसके बारे में बात करें तो दुबई की खाड़ी में कृत्रिम द्वीप बनाने का विचार सबसे पहले  संयुक्त  अरब  अमीरात शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के दिमाग में आया था । यह विचार उनके दिमाग में 1990 के दशक में आया था । जिस विचार को पूरा करने के लिए वह जुट गए थे और उन्होंने 2001 में पाम जुमेराह के निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिए थे ।  तकरीबन 4 से 5 साल बाद 2006 में पाम जुमेराह के निर्माण कार्य को पूरा कर लिया गया था ।

जब पाम जुमेराह को बनाने का फैसला किया गया था तब यह निर्णय लिया गया था  की पाम जुमेराह के निर्माण में ऐसे पत्थर का उपयोग किया जाएगा जो पत्थर पानी में कई सालों तक खराब ना हो , किसी भी तरह की कोई हानि पत्थर को ना हो और जीन इंजीनियर को पाम जुमेराह को बनाने का काम सौंपा गया था उन इंजीनियरों ने ऐसे पत्थर की तलाश करना प्रारंभ कर दिया था । जो पत्थर पानी में क्षतिग्रस्त ना हो । विश्व के सभी देशों से पत्थरों के सैंपल दुबई भेजे गए थे । परंतु कई देशों से आए हुए चट्टानों के पत्थरों के सैंपल फेल कर दिए गए थे ।

भारत के मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के पत्थर के सैंपल को भी दुबई भेजा गया था । जिस सैंपल को वहां के इंजीनियरों ने पास कर दिया था । इसके बाद भारत को ग्रेनाइट पत्थर को दुबई भेजने का काम सौंप दिया था । जिसके बाद भारत के छतरपुर के गढ़ी मलेहरा एवं लौंडी तहसील के पास स्थित कटेहरा खदान से ग्रेनाइट पत्थरों को तैयार किए गए थेे । जब ग्रेनाइट पत्थर पूरी तरह से तैयार हो गए थे तब यह पत्थर छतरपुर से गुजरात राज्य में भेजे गए थे । गुजरात राज्य में जब यह पत्थर पहुंचे तब गुजरात राज्य मे स्थित बंदरगाह के माध्यम से यह ग्रेनाइट पत्थर दुबई भेज दिए गए थे ।

जब छतरपुर से पत्थर गुजरात भेजे गए तब छतरपुर से गुजरात तक ग्रेनाइट पत्थरों को पहुंचने में 1 महीने से भी ऊपर का समय लग गया था । छतरपुर की खदान में ग्रेनाइट पत्थरों की कटिंग की जा रही थी । पत्थरों का आकार 25 से 30 फीट का रखा गया और पत्थरों का बजन तकरीबन 35 से 40 टन रखा गया था । जब यह ग्रेनाइट पत्थर दुबई पहुंचे तब इन पत्थरों से पाम जुमेराह की नींव रखी गई थी । आज भी दुबई में पाम जुमेराह मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से भेजे गए  ग्रेनाइट पत्थर पर टिका हुआ है ।

विश्व से कई पर्यटक दुबई के पाम जुमेराह को देखने के लिए जाते हैं और अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं ।

पाम जुमेराह की बनावट के बारे में –  पाम जुमेराह के निर्माण के लिए विश्व के सबसे बड़े इंजीनियरों को ठेका दिया गया था और इस पाम जुमेराह को बनाने की जिम्मेदारी भी इंजीनियरों को दी गई थी । इंजीनियरों के द्वारा पाम जुमेराह को बनाने के लिए कहा गया था और इंजीनियरों ने 5 किलोमीटर लंबाई और चौड़ाई में पाम जुमेराह को बनाने का काम किया गया था । पाम जुमेराह की नीव ग्रेनाइट पत्थरों की रखी गई थी । जब पाम जुमेराह बनके तैयार हो गया था तब पाम जुमेराह की सुंदरता देखने के लायक थी । कई पर्यटक देश विदेश से पाम जुमेराह की सुंदरता को देखने के लिए पहुंचे थे ।

जब ऊपर से पान जुमेराह को देखते हैं तब यह पाम जुमेराह एक वृक्ष के आकार का दिखाई देता है । सबसे बड़ी बात यह है कि यह पाम जुमेराह समुद्र के बीचो-बीच बना हुआ है । जिससे इस पाम जुमेराह की सुंदरता और भी सुंदर दिखाई देने लगती है । पाम जुमेराह के आइसलैंड में कई महान हस्तियों के बिला हैं । हमारे भारत देश के महान अभिनेता शाहरुख खान के द्वारा भी इस आइसलैंड में एक विला खरीदा गया है । जिसकी कीमत 200 करोड़ रुपए है और इस बिला का नाम सिग्नेचर रखा गया है ।

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