पद्मनाभस्वामी मंदिर का रहस्य व् इतिहास Padmanabhaswamy temple history in hindi

Swami padmanabha temple history in hindi

Padmanabhaswamy temple – दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से भारत देश के केरल राज्य में स्थित पद्मनाभस्वामी मंदिर के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं । तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस आर्टिकल को पढ़कर पद्मनाभस्वामी  मंदिर के इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Padmanabhaswamy temple history in hindi
Padmanabhaswamy temple history in hindi

पद्मनाभस्वामी मंदिर के बारे में – पद्मनाभस्वामी मंदिर भारत देश का सबसे सुंदर अद्भुत चमत्कारी मंदिर है । इस मंदिर से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है । भारत देश का यह पद्मनाभस्वामी  मंदिर भगवान विष्णु के लिए समर्पित है जिस मंदिर से सभी लोगों की आस्था जुड़ी हुई है । यह मंदिर भारत देश के केरल राज्य के तिरुअनंतपुरम मे स्थित है जहां पर प्रति वर्ष लाखों की संख्या में विष्णु भगवान के सभी भक्त जाते हैं और मंदिर के दर्शन करके अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं । यह मंदिर भारत देश का सबसे प्राचीन मंदिर है । यह मंदिर विष्णु भगवान का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है ।

यह भारत देश का सबसे अमीर मंदिर है  जिस मंदिर में लाखों की संख्या में पर्यटक जाकर भगवान विष्णु के दर्शन करके अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं । मंदिर के निर्माण के बारे में ऐसा कहा जाता है कि 1733 में त्रावणकोर के महान शासक मार्तंड वर्मा के द्वारा इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया था । मंदिर के गर्भ गृह में भगवान विष्णु की एक विशाल मूर्ति स्थापित की गई है जिस मूर्ति को देखने के बाद आनंद और खुशी प्राप्त होती है । इस मंदिर में भगवान विष्णु अपनी विश्राम अवस्था में विराजमान हैं और जब भगवान विष्णु विश्राम अवस्था में होते हैं तब वह पद्मनाभ कहलाते हैं इसीलिए इस मंदिर को पद्मनाभस्वामी  मंदिर कहा गया है ।

जब इस मंदिर पर पर्यटक आते हैं तब वह इस मंदिर की सुंदरता को देखकर मोहित हो जाते हैं । मंदिर की सुंदरता को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इस मंदिर के निर्माण में केरल की संस्कृति और साहित्य समाया हुआ है । मंदिर के आसपास की सुंदरता दर्शनीय हैं । मंदिर के एक तरफ समुद्र तट स्थित है जो समुद्र तट मंदिर की सुंदरता में चार चांद लगाने का काम करते हैं । मंदिर के दूसरी तरफ सुंदर-सुंदर पहाड़ियां स्थित हैं जिन पहाड़ियों पर हरे भरे पेड़ पौधे , घास , दूबा , फूल लगे हुए हैं जिससे मंदिर के आसपास का स्थान खूबसूरत दर्शनीय दिखाई देता है ।

इस मंदिर को देखने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि इस मंदिर के निर्माण के लिए वहीं कारीगरों को बुलाया गया होगा जिन कारीगरों ने अपनी मेहनत और लगन से अपनी कारीगरी से इस मंदिर के निर्माण कार्य को पूूरा किया है । जब महाराजा मार्तंड वर्मा ने इस मंदिर के निर्माण की योजना बनाई तब उन्होंने इस मंदिर के निर्माण में किसी तरह की कोई कमी नहीं रखी थी । उनके द्वारा मंदिर निर्माण के लिए दूर-दूर से जाने-माने कारीगरो को बुलाया गया था और इस मंदिर की सुंदरता को अधिक से अधिक सुंदर बनाने के प्रयास महाराजा मार्तंड वर्मा के द्वारा किए गए थे ।

जब हम इस मंदिर की सुंदरता देखते हैं तब हमें गर्म होता है कि यह सुंदर और अद्भुत मंदिर भारत देश में स्थित है । यह हिंदू धर्म के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है । मंदिर का जो गोपुरम है वह गोपुरम देखने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि मंदिर का जो गोपुरम बनाया गया है वह गोपुरम द्रविड़ शैली में बनाया गया है जिस गोपुरम को देखने के बाद एक आनंद की अनुभूति होती है । मंदिर की सुंदरता नक्काशी की चर्चा प्राचीन समय से ही दूर-दूर तक की जाती रही है ।

जब भारत देश पर कई विदेशियों के द्वारा , घुसपैठियों के द्वारा हमले किए गए तब इस मंदिर की सुंदरता को सुनने के बाद इस मंदिर को भी हासिल करने के प्रयास भी आक्रमणकारियों के द्वारा किए गए थे । 1790 में  पद्मनाभस्वामी मंदिर को हासिल करने के लिए टीपू सुल्तान के द्वारा भी हमला किया गया था । परंतु वह इस मंदिर को हासिल करने में नाकामयाब हो गया था और टीपू सुल्तान को कोच्चि में हार का सामना भी करना पड़ा था । इसके बाद टीपू सुल्तान ने हार मानकर मंदिर पर कब्जे करने की जिद छोड़ दी थी । टीपू सुल्तान के बाद और भी विदेशी आक्रमणकारियों के द्वारा इस मंदिर को हासिल करने के काफी प्रयास किए गए थे ।

पर त्रावणकोर के शासकों के द्वारा इस मंदिर की रक्षा सुरक्षा की गई थी ।  त्रावणकोर के शासक यह जानते थे कि यह मंदिर हिंदू धर्म के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है यदि इस मंदिर की रक्षा नहीं की गई तो यह मंदिर आक्रमणकारियों के द्वारा तहस-नहस कर दिया जाएगा ।

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