नागार्जुन जी की जीवनी Nagarjuna biography in hindi

Nagarjuna biography in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस लेख के माध्यम से भारत के महान लेखक एवं उपन्यासकार नागार्जुन के बारे में बताने जा रहे हैं . अब हम इस आर्टिकल को पढ़ते हैं और नागार्जुन के जीवन के बारे में जानते हैं .

nagarjuna biography in hindi
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image source –https://www.duniyahaigol.com

जन्म स्थान व् परिवार – नागार्जुन भारत के महान लेखक एवं साहित्यकार थे . जिनका जन्म 30 जून 1911 को मधुबनी जिले के सतलखा में हुआ था . इनका जन्म इनकी नानी के यहां पर हुआ था . नागार्जुन जी मैथिली एवं हिंदी के महान लेखक थे जिन्होंने अनेक भाषाओं में अनेकों लेख लिखे हैं .  नागार्जुन जी के पास कई भाषाओं का ज्ञान था . इनको सभी भाषाओं का ज्ञाता भी कहा जाता था . इनकी भाषाएं हिंदी , संस्कृत  एवं वार्डला आदि थी .

नागार्जुन जी के पिताजी का नाम गोकुल मिश्र था एवं माता जी का नाम उमा देवी था . बचपन  में नागार्जुन जी को ढक्कन  के नाम से  लोग पुकारते थे . उनको सभी ढक्कन मिसर के नाम से इसलिए पुकारते थे क्योंकि उनके माता-पिता के चार पुत्र जन्म लेने के बाद मर गए थे . जैसे ही  पुत्र का जन्म होता था कुछ समय  बाद उस पुत्र की मौत हो जाती थी लेकिन इनके पिता भगवान शिव की आराधना किया करते थे और भोलेनाथ से आराधना करने के लिए नागार्जुन पर्वत पर गए थे .

वहां से प्रार्थना करने के बाद नागार्जुन अपने घर बापस आ गए थे . कुछ  समय बीत जाने के बाद उनकी पत्नी ने  एक पुत्र को  जन्म दिया था  . जन्म देने के बाद उनके पिता को काफी टेंशन हो रही  थी . वह सोच रहे थे कि जिस तरह से मेरे पांच पुत्रों की मौत हो गई है . उसी तरह से इसकी भी मौत हो जाएगी लेकिन नागार्जुन जी की मौत नहीं हुई और उनके पिता ने शंकर भगवान के नाम से ही इनका नाम  नागार्जुन रखा और सभी उनको नागार्जुन के नाम से जानने लगे . जब नागार्जुन की आयु 6 वर्ष की हुई तब उनकी माता का देहांत हो गया था . माता का देहांत होने के बाद वह पूरी तरह से टूट चुके थे .

शिक्षा – नागार्जुन जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने घर से ही प्रारंभ की थी . घर से थोड़ा बहुत ज्ञान प्राप्त करके वह लघु सिद्धांत कौमुदी और अमरकोश के सहारे अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्रारंभ की थी . जब नागार्जुन जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी  उसी  समय मिथिलांचल में   निर्धन मेधावी छात्रों को आश्रय दिया जाता था .  यहां से शिक्षा प्राप्त करने के बाद वह बनारस चले गए थे और बनारस से उन्होंने संस्कृत की पढ़ाई प्रारंभ कर दी थी .

अपनी संस्कृति की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह निरंतर संस्कृत भाषा के साथ अन्य भाषाओं का  ज्ञान भी लेते  थे . बनारस में ही वह आर्य समाज से जुड़े और उनका झुकाव आर्य समाज की ओर हुआ . धीरे-धीरे समय बीतने के बाद वह बौद्ध धर्म की ओर जाने लगे थे . वह बनारस से कोलकाता एवं दक्षिण भारत में घूमते रहे . दक्षिण भारत से घुमते हुए वह श्रीलंका पहुंचे और श्रीलंका के विद्यालंकर परिबेण से उन्होंने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी .

राजनीतिक कैरियर – नागार्जुन जी एक उपन्यासकार एवं साहित्यकार होने के साथ-साथ एक राजनेता भी थे  . देश के विकास में वह अपना योगदान देना चाहते थे . जब वह एक लेखक के रूप में उभरे थे उस समय सुभाष चंद्र बोस काफी प्रसिद्ध व्यक्ति थे . उनका लगाव सुभाष चंद्र बोस से हुआ .  वह एक अच्छे लेखक बनने के साथ राज नेता भी बनना चाहते  थे .

नागार्जुन ने सहजानंद से मुलाकात की और मुलाकात के बाद वह सहजानंद से प्रभावित हुए . दोनों ने यह विचार बनाया कि बिहार के किसान आंदोलन में  हिस्सा लेंगे .  ब्रिटिश पुलिस ने उनको आंदोलन में हिस्सा लेने पर जेल में डाल दिया था और पुलिस के द्वारा उन पर लाठी बरसाई  थी .

नागार्जुन की प्रमुख रचनाएं – नागार्जुन की सबसे पहली प्रकाशित रचना मैथिली है  को दरभंगा से प्रकाशित हुई थी . नागार्जुन जी ने हिंदी भाषा में अपनी रचना राम के प्रति नामक रचना लिखी थी जो 1934 में लाहौर में छपी  थी . नागार्जुन जी का बाडला भाषा और साहित्य से काफी लगाव था .

नागार्जुन जी की प्रमुख कविताएं – 1953 को नागार्जुन जी ने धारा नामक कविता लिखी थी . 1962 में नागार्जुन जी ने प्यासी पथराई आंखें नामक कविता लिखी थी . 1959 में नागार्जुन जी ने सतरंगे पंखों वाली नामक कविता लिखी थी . 1980 में नागार्जुन जी ने खिचड़ी विप्लव देखा हमने नामक कविता लिखी थी . 1974 को नागार्जुन जी ने तालाब की मछलियां नामक कविता लिखी थी . 1980 में नागार्जुन ने कहा था नामक कविता लिखी थी .

1983 को नागार्जुन जी ने पुरानी जूतियां का कोरस  नामक कविता लिखी थी . 1981 में नागार्जुन जी ने एक हजार  बाहुबली नामक कविता लिखी थी . 1974 को नागार्जुन जी ने  जूनियर रत्न गर्भ नामक कविता लिखी थी . 1986 को नागार्जुन जी ने आखिर ऐसा क्या कह दिया मैंने नामक कविता लिखी थी . 1990 में नागार्जुन जी ने इस गुब्बारे की छाया में नामक कविता लिखी थी . 1974 को माखन जी ने भूल जाए पुराने सपने नामक कविता लिखी थी . 1997 को अपने खेत में नामक कविता लिखी थी . यह सभी कविताए  बहुत अच्छी है .

निधन – नागार्जुन जी का निधन 5 नवंबर 1998 को बिहार राज्य के दरभंगा में हुआ था .

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