नदी के किनारे एक शाम हिंदी निबंध Nadi ke kinare ek shaam essay in hindi

Nadi ke kinare ek shaam essay in hindi

दोस्तों आज हम नदी के किनारे एक शाम पर निबंध आप सभी के लिए लेकर आए हैं आप इसे जरूर पढ़ें और इस विषय पर निबंध लिखने की अच्छी तरह से तैयारी करें तो चलिए पढ़ते हैं आज के इस निबंध को

Nadi ke kinare ek shaam essay in hindi
Nadi ke kinare ek shaam essay in hindi

प्रस्तावना– हम सभी के जीवन में कई ऐसे दिन गुजरते हैं जो हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं। इन दिनों को हम कभी नहीं भूल पाते। जब भी हम बोर होते हैं तो हम ऐसे ही स्थानों पर घूमना जाना पसंद करते हैं जहां का वातावरण बहुत ही शांत एवं सौंदर्य से भरपूर होता है।

मैंने एक नदी के किनारे एक शाम गुजारी। मुझे नदी के किनारे शाम गुजारना बहुत ही अच्छा लगा। मैं नदी के किनारे शाम हर रोज गुजारना चाहूंगा। वहां का सुहावना वातावरण वास्तव में मुझे अपनी ओर खींचता है।

मैं एक स्कूल का छात्र हूं, मुझे घूमना बहुत ही पसंद है। एक दिन रविवार का दिन था मेरे पापा जी भी घर पर थे तब उन्होंने कहीं घूमने चलने को कहा यह सुनकर मैं काफी खुश हुआ क्योंकि कहीं पर घूमना मुझे बहुत ही भाता है मैं तुरंत तैयार हो गया।

हमारे साथ मम्मी और मेरा एक छोटा भाई भी था। हम सभी दोपहर 3:00 बजे अपने घर से निकल गए और एक नदी के किनारे जा पहुंचे। वहां पर पहुंचकर जब मैंने चारों ओर देखा तो मुझे काफी खुशी का अनुभव हुआ क्योंकि वहां पर चारों और बहुत ही सुंदर सुंदर वृक्ष थे और उस नदी में कई लोग स्नान कर रहे थे।

कई बच्चे भी उनके साथ आए हुए थे, कई लोग उस नदी के किनारे पर बैठकर अपना भोजन कर रहे थे। नदी में कई लोग नाव में बैठकर घूम रहे थे यह दृश्य देखकर मुझे काफी खुशी हुई, मैं कभी भी नाव में नहीं बैठा था। सबसे पहले मैंने अपने पिताजी से नाव में बैठने को कहा और हम सब नाव में बैठकर कुछ समय तक नदी में घूमे और फिर नदी के किनारे आए।

सबसे पहले हमने नदी में स्नान करने का आनंद उठाया और फिर उस नदी के किनारे एक कोने में बैठकर हम खाना खाने लगे। ऐसी जगह पर बैठकर सब लोगों के साथ मिलजुलकर खाना खाने में बहुत ही आनंद आता है।

वहां पर पास में ही एक धोबी घाट था जहां पर धोबी कपड़े धो रहे थे और कुछ धोबी गधे पर कपड़े लादकर अपने घर की ओर ले जा रहे थे।

जो व्यक्ति तैरना जानता था वह उस नदी में तैर रहे थे यह दृश्य मुझे देखने में काफी अच्छा लग रहा था। शाम के समय नदी के किनारे पर बैठना, इधर-उधर घूमना, चारों ओर का सौंदर्य देखना काफी भा रहा था।

मैं और मेरा छोटा भाई काफी खुश थे। हम वैसे तो कभी कबार घूमने कहीं ना कहीं जाते रहते थे लेकिन ऐसे अच्छे स्थान पर हम पहली बार ही आए थे।

हम सब अपने दैनिक कार्यों में बिजी रहते हैं और कई तरह की चिंताओं से ग्रस्त रहते हैं लेकिन जब इस तरह के रमणीय वातावरण में हम रहते हैं तो हमें बहुत ही अच्छा महसूस होता है, ऐसा लगता है कि हम यहीं पर रह जाएं, हम सभी चिंताओं से मुक्त हो जाते हैं।

हम वहां पर बैठे हुए थे तभी किसी ने मेरे पिताजी को आवाज दी वह थे रमेश अंकल, जो कि मेरे पिताजी के अच्छे दोस्त थे उनका पूरा परिवार भी वहां पर आया हुआ था। ऐसे वातावरण में अपने दोस्त से मिलना सबको ही बहुत ही अच्छा लगेगा।

मेरे पिताजी भी उनके साथ काफी खुश थे वह दोनों दोस्त आपस में काफी देर तक बातचीत करते रहे। मेरे पापा नदी में तैरना भी जानते हैं वह अपने रमेश दोस्त के साथ नदी में तैरने लगे। मेरा भी मन कर रहा था कि इस शाम के समय में भी तैरता लेकिन मुझे तैरना नहीं आता था।

अब मैं सिर्फ नदी के किनारे पर बैठकर तैरते हुए लोगों को देख रहा था वहां पर यह दृश्य देखकर मुझे काफी खुशी हो रही थी, मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं खुद उस नदी में तैर रहा हूं।

उपसंहार– नदी के किनारे एक शाम गुजारना वास्तव में बहुत ही खुशी देता है। हम सभी को अपने कामकाज से फ्री होकर कभी-कभी नदी के किनारे शाम जरूर गुजारना चाहिये। इससे हमें परिवार के साथ मिलने का मौका भी मिलता है और वातावरण के करीब  पहुंचने में भी बहुत अच्छा लगता है।

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