बातूनी कछुआ की कहानी Murkh kachua story in hindi

Murkh kachua story in hindi

Batuni kachua in hindi-दोस्तों काफी समय पहले एक तालाब के पास दो बदक रहते थे वह आपस में बहुत ही अच्छे मित्र थे उनका एक और मित्र था कछुआ.समय गुजरता गया एक समय ऐसा आया कि जब तालाब का पानी सूखने लगा और दोनों बदको ने किसी दूसरे तालाब में जाने का विचार बनाया

Murkh kachua story in hindi
Murkh kachua story in hindi

तभी दोनों बदको ने सोचा कि हम तो उड़कर दूसरे तालाब में चले जाएंगे लेकिन इस कछुए का क्या होगा यह तो बहुत ही धीमे धीमे चलता है दूसरे तालाब पर जाना इसके लिए संभव नहीं होगा तभी दोनों बदको ने अपने दोस्त कछुए को बुलाया और कहा की मित्र इस मजबूत लकड़ी को हम दोनों अपनी चोच में पकड़कर उड़ जाएंगे तुम इस लकड़ी को बीच में अपनी चोंच में दबाकर पकड़ लेना.हम किसी दूसरे तालाब में जाकर रहने लगेंगे जहां पर पानी की अच्छी व्यवस्था हो.

कछुआ उन दोनों की बात से सहमत हुआ और एक दिन वो तालाब से उड़ने के लिए तैयार हो गए.कछुआ बहुत बातें करता था वह बातें किए रह नहीं पाता था दोनों ने उसको समझाया की जब तक हम दूसरे तालाब मैं ना पहुंच जाएं तब तक तुम बिल्कुल चुप रहना.यह कहकर उन दोनों ने एक लकड़ी के दोनों सिरे पकड़ लिए और वह कछुआ लकड़ी के बीच के हिस्से को अपनी चोच में दबाकर बदको के साथ आसमान में उड़ गया यह देखकर सभी जानवर खुशी से झूमने लगे,हंसने लगे यह देखकर उस कछुए से रहा नहीं गया और उसने जानवरों से कुछ कहने के लिए मुंह खोला और वह नीचे जाकर गिर गया तब उस कछुए की मौत हो गई.

इसलिए कहते हैं कि हमें जीवन में हमेशा दिमाग से सोचना चाहिए दूसरों की बातों पर कोई भी ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए क्योंकि दूसरे तो कुछ भी कहते हैं.हमें हमारे दिमाग से सोचकर अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए.

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