मेरे पिताजी पर निबंध Mere pitaji essay in hindi

Mere pitaji essay in hindi

दोस्तों आज का हमारा निबंध मेरे पिताजी पर निबंध आप सभी की स्कूल,कॉलेज की परीक्षा में लिखने के लिए काफी हेल्पफुल है. हमारे परिवार में कई रिश्ते नाते होते हैं इनमें पिता जी का रिश्ता बहुत ही खास होता है चलिए पढ़ते हैं हमारे आज के इस निबंध को

Mere pitaji essay in hindi
Mere pitaji essay in hindi

मेरे पिता जी से मेरा रिश्ता बेहद खास है मेरे पिताजी मुझसे बेहद लगाव रखते हैं मुझे प्रेम करते हैं मैं भी उन्हें बेहद प्रेम करता हूं. मेरे पिताजी का स्वभाव बहुत ही अच्छा है उनकी आदतें और भी अच्छी हैं. मेरे पिताजी मुझसे प्रेम पूर्वक व्यवहार करते हैं.पिता जी दादा दादी एवं मेरी मम्मी से अच्छी तरह पेश आते हैं उनका स्वभाव इतना अच्छा है कि हर कोई उनसे दोस्ती करना चाहता है.उनमें कोई भी खराब आदत नहीं है वो सुबह 5:00 बजे जागते हैं और स्नान आदि करके सबसे पहले टहलते हुए पास के मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए जाते हैं इससे उन्हें दो फायदे होते हैं एक तो उनका टहलना हो जाता है और दूसरा भगवान की पूजा हो जाती है.

वह घर पर आते हैं तो खाना खाकर अपनी नौकरी पर चले जाते हैं.शाम को जब आते हैं तो वह पूरे परिवार को समय देते हैं उनके साथ वार्तालाप करते हैं जब भी उन्हें समय मिलता है तो वह मुझे ज्ञान का पाठ पढ़ाते हैं है मुझे दूसरों की मदद करने को कहते हैं उनका मानना है कि दूसरों की मदद करने में ही सुख है वह कहते हैं कि अगर कोई भी तुम्हे अपाहिज, दीन-दुखी, गरीब व्यक्ति मिले तो तुम उसकी सहायता जरूर करना.

तुम अपने से बड़ों का सम्मान करना चाहे कैसी भी परिस्थिति हो.हमेशा जीवन में आगे बढ़ने के लिए अच्छे रास्ते का चुनाव करना और भ्रष्टाचार बिल्कुल मत फैलाना.वह सामाजिक बुराइयों से दूर रहने का कहते हैं. मेरे पिताजी में साहस भी है जब भी कभी विकट परिस्थिति से उनका सामना होता है तो उसका सामना पूरे साहस के साथ करते हैं वो मुझे भी हमेशा साहसी बने रहने की सलाह देते हैं.

बहुत से पिता अपने बच्चों से कहते हैं कि तुम पढ़-लिख कर डॉक्टर, इंजीनियर बनो या और कुछ बनो लेकिन मेरे पिता हमेशा यही कहते हैं कि तुम पढ़ लिखकर जो भी तुम्हें पसंद हो वह बनना. तुम अपनी इच्छा का कार्य करना क्योंकि मेरे पिता के लिए मेरी खुशी ही सबसे बढ़कर है. वह मुझसे यह भी कहते हैं कि कोई भी कार्य करो अच्छी तरह से करो, देश की सेवा समझकर करो और भ्रष्टाचार तो बिल्कुल ना फैलाओ.

वास्तव में मेरे पिता एक आदर्शवादी पिता है उन्होंने अपने पिता के पूरे कर्तव्य को निभाया है और हमारे पालन-पोषण में बिल्कुल भी कमी नहीं रखी है वह हमारी इच्छाओं की कदर करते हैं उनमें धैर्य भी बहुत है अगर कोई ऐसी परिस्थिति आती है तो वह धैर्य के साथ सही तरह से उस कार्य को करते हैं कभी भी जल्दबाजी में उस काम को नहीं बिगड़ते देते. किसी बुरी परिस्थिति को भी प्रेम से निपटाते हैं वह कभी भी आग बबूला होकर उस कार्य को और नहीं बिगाड़ते.

वह बहुत ही ईमानदार हैं मेरे पिता नौकरी करते हैं लेकिन आज तक उन्होंने किसी से रिश्वत नहीं ली और हर किसी रिश्ते के प्रति ईमानदार हैं वह मुझे भी जब भी फ्री होते हैं इमानदारी बरतने को कहते हैं उनका कहना है कि ईमानदारी ही सबसे बढ़कर है.वह कहते हैं कि अगर एक इंसान ईमानदारी से कार्य करें,दूसरों का बड़ों का आदर करें, हमेशा लगन से किसी कार्य को करें तो उसे बड़ी सफलता जरूर मिलती है वास्तव में ये सही है और मैं भी उनकी बातों पर विशेष रुप से ध्यान देता हूं वास्तव में मेरे पिताजी लाखों में एक हैं.

मेरे पिताजी अनुशासनप्रिय हैं अनुशासन में रहना ही पसंद करते हैं वो मुझे भी अनुशासन अपनाने का कहते हैं उनका पूरा जीवन अनुशासन मे ही चला है सुबह से शाम तक वो अनुशासन में ही रहना पसंद करते हैं सुबह जल्दी जागना श्याम को जल्दी सोना, अपना कार्य सही समय पर पूरा करना यह उन्हें बेहद पसंद है.

जब भी हमारे द्वार पर कोई रिश्तेदार या कोई गरीब व्यक्ति कुछ मांगने आता है तो मेरे पिता उसकी मदद करते हैं क्योंकि मेरे पिता एक दयालु प्रवृत्ति के हैं वह कहते हैं कि गरीबों की या दोस्तोंरिश्तेदारों की मदद करने से हमें तो सुख मिलता ही है साथ में हमें दिल से सुकून भी मिलता है जब भी हमें मदद करने का मौका मिले तो हमें करना चाहिए इससे हमें अच्छा महसूस होता है.

मेरे पिता खुद अनुशासनप्रिय हैं उनका हर एक पल का टाइमटेबल है वह भी मुझे इसी तरह से रहने को कहते हैं जब मैं बच्चा था तब वह मुझे 5:00 बजे जगाते थे और मुझे सुबह जगने का महत्व बताते थे में सुबह जल्दी जागता और सुबह जल्दी पढ़ाई करता.पढ़ाई में इससे बहुत लाभ होता है वह मुझे समय और अनुशासन का महत्व बताते हैं वह कहते हैं कि हमें कोई भी काम समय पर पूरा करना चाहिए कल पर नहीं डालना चाहिए क्योंकि कल कभी आता नहीं.मुझे यह बात उनकी बेहद पसंद है.

अगर कोई सामाजिक या धार्मिक कार्य हो तो मेरे पिता हमेशा उसे करने के लिए आगे रहते हैं वो इन कार्यों के लिए पैसे खर्च करने में भी पीछे नहीं हटते.मेरे पिता बहुत ही अच्छे पिता है जब भी मैं कोई गलती करता हूं तो वह मुझे प्यार से समझाते हैं और मुझे माफ भी कर देते हैं मैं उनके गुणों को बेहद पसंद करता हूं. मुझे खुशी है कि मेरे पिता इतने अच्छे इंसान हैं।

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