मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना कहानी mazhab nahi sikhata aapas mein bair rakhna story in hindi

mazhab nahi sikhata aapas mein bair rakhna story in hindi

दोस्तों कभी कोई सा भी धर्म हम सभी को एक दूसरे से लड़ाई करने के लिए मजबूर नहीं करता है और ना ही हम सबको धर्म के नाम पर लड़ना चाहिए । लेकिन कुछ लोग अपने फायदे के लिए धर्म के नाम पर हम लोगों को लड़ा रहे हैं और हम लड़ रहे हैं । मैं आपसे पूछना चाहता हूं क्या यह सही है?क्या हम सभी अपनी इंसानियत को भूल गए हैं। दोस्तों अगर हमारे बच्चे आपस में एक दूसरे से किसी बात को लेकर लड़ाई करेंगे तो हम को कैसा महसूस होगा। ठीक उसी प्रकार अगर हमारे देश के नागरिक धर्म के नाम पर एक दूसरे से लड़ेंगे तो उसका नुकसान हमारे देश को पहुंचेगा। इसका फायदा हमारे देश के दुश्मन उठाएंगे। चलिए पढ़ते है हमारी आज की इस कहानी को

mazhab nahi sikhata aapas mein bair rakhna story in hindi
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दोस्तों अब मैं आपको एक कहानी के माध्यम से यह बताने जा रहा हूं कि मजहब नहीं सिखाता है आपस में बैर रखना । एक गांव में 2 दोस्त रहते थे । एक का नाम था राम और दूसरे का नाम था रहीम । वह आपस में बहुत प्रेम करते थे । उनकी मित्रता के चर्चे पूरे गांव में होते थे । वह एक दूसरे से मिले बिना नहीं रहते थे। एक बार जब बारिश हो रही थी तब राम अपने मित्र से नहीं मिल पाया और वह अपनी मां से कहने लगा कि मां आप इस बारिश को बंद करवा दो और मां से हट करने लगा । उसकी मां को बहुत गुस्सा आई और वह राम से कहने लगी कि तुम बहुत बिगड़ चुके हो । तुम्हारे अंदर उस रहीम के संस्कार आ रहे हैं इसलिए तुम उससे मिलना बंद कर दो लेकिन राम नहीं माना ।

जब बारिश बंद हुई तो राम अपने दोस्त रहीम के साथ खेलने के लिए मैदान में आया और दोनों खेलने लगे। कुछ समय बाद वहां पर हिंदू , मुसलमान के दंगे होने लगे थे । जब दंगे हो रहे थे तब राम रहीम के घर पर था और उस समय कोई भी व्यक्ति घर से बाहर नहीं जा पा रहा था । बाहर सभी लड़ रहे थे राम की मां को बड़ी चिंता हो रही थी कि राम ना जाने कहां पर है लेकिन फिर भी वह बाहर नहीं निकल पा रही थी क्योंकि बाहर दंगा फसाद चल रहा था । जब उसकी मां को ध्यान आया कि राम तो रहीम के घर पर है तो उसे और भी चिंता होने लगी । वह सोचने लगी कि उसकी मां तो एक लापरवाही वाली महिला है । वह मेरे बच्चे का ध्यान नहीं रख पाएगी जब दंगा फसाद बंद हुआ तब रहीम की मां राम को सही सलामत उसके घर पर छोड़ने के लिए गई ।

तब उसकी मां कहने लगी कि मैं तुम्हारे वाले बारे में कितनी गलत सोचती थी और उसने यह शब्द कहा मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना । कहने का तात्पर्य यह है कि कोई सा भी समाज यह नहीं सिखाता है कि आप अपने फायदे के लिए लड़ाई दंगे करो और धर्म के नाम पर एक दूसरे को मारो ।

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