महादेवी वर्मा की कहानी गिल्लू Mahadevi verma short stories in hindi

Mahadevi verma short stories in hindi

Gillu by mahadevi verma in hindi-दोस्तों आज हम आपके साथ महादेवी वर्मा की लिखी गिल्लू की कहानी शेयर करने वाले हैं ये कहानी एक छोटे से जीव गिलहरी के बच्चे के बारे में है जो हमने हमारी भाषा में लिखी है तो चलिए पढ़ते हैं आज की इस कहानी को

Mahadevi verma short stories in hindi
Mahadevi verma short stories in hindi

एक दिन अचानक सुबह के टाइम जब मैंने घर के बाहर बरामदे में आकर देखा की दो कौवे गमले के पास बैठकर अपनी चोच से प्रहार करके खेल रहे थे यह दृश्य देखने के लिए कुछ लोग और भी थे तभी मेरी नजर गमले के अंदर पड़ी.गमले के अंदर एक छोटा सा जीव गिलहरी का बच्चा था जब मैंने उस गिलहरी के बच्चे को देखा तो मैं उसको उठाने के लिए अपना एक हाथ आगे बढाया तभी किसी ने कहा की कौवे की चोंच ने इसके शरीर पर कुछ प्रहार किए हैं यह बच नहीं पाएगा

लेकिन मैंने उस गिलहरी के बच्चे को वहां से उठाया और अपने कमरे की ओर ले गई उसके शरीर पर रक्त की बूंदे थी मैंने एक रुई से उसके शरीर से रक्त साफ किया और मुंह में कुछ दूध की बूंदे डालने की कोशिश की लेकिन उसका मुंह खुल नहीं पाया.कुछ घंटे तक मैंने उस गिलहरी के बच्चे जिसे मैं प्यार से गिल्लू कहने लगी उसका उपचार किया और अगली सुबह तक अपना मुंह खोलने लगा उसने दोनों पंजे पंजों से मुझे प्यार से पकड़ लिया अगले 2 वर्ष तक मेरे घर पर रहा मैंने अपनी घर की खिड़की पर घास फूस से उसका घर बना दिया.

जब मैं कुछ भी लिखने बेठती तो मेरा ध्यान बार बार उसकी ओर जाता कभी-कभी घर में आकर एकदम से ही पर्दे पर चढ़ जाता कभी-कभी मैं पकड़ के उसको अपने पास ले आती जब उसे भूख लगती तो वह ची ची करके आवाज़ लगाता.मानो वह मुझे सूचना दे रहा हो मैं उसे कभी-कभी बिस्कुट खाने को भी देती.

मैं जब घर से बाहर रहती तो घर के दरवाजे बंद कर जाती लेकिन गिल्लू घर पर ही रहता कुछ समय बाद मैंने सोचा कि घर में अगर वह रहेगा तो इस को खतरा है वन्यजीवों से इसलिए मैंने एक दिन खिड़की को खोलकर उसे मुक्त कर दिया लेकिन भले ही मैंने उसको अपने घर से बाहर छोड़ दिया लेकिन वह दिनभर गिलहरियों के साथ खेलता रहता उनका नेता बना फिरता और शाम को खिड़की के दरवाजे से मेरे घर के अंदर आ जाता और तरह-तरह के कृत्य करता.

कभी-कभी वह मेंरी थाली में ही आकर खाने लगता जब मेरा एक्सीडेंट हो गया तो मुझे कुछ दिन अस्पताल में रहना पड़ा जब मैं अस्पताल से वापस आई तो मैंने देखा गिलहरी का बच्चा गिल्लू थोड़ा दुखी था मैंने जब देखा कि उसको खाने दिए जाने वाले बिस्कुट और खाद्य पदार्थ ऐसे ही रखे हैं या उसने बहुत ही कम खाएं हैं तो मुझे लगा कि शायद उसे भी मेरी याद आ रही होगी क्योंकि अभी तक वह इतने दिन मुझसे दूर नहीं रहा था.

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समय गुजरता गया वह हर शाम खिड़की के दरवाजे से घर के अंदर आ कर तरह तरह के कृत्य करता इसी तरह समय गुजरता गया गिलहरी के जीवन की अवधि सिर्फ 2 साल की होती है बेचारे उस गिल्लू के जीवन का अंत आ गया एक दिन मेरे बिस्तर में आया और जब मैंने उसकी उंगली पकड़कर देखा तो उसकी उंगली बहुत ही ठंडी थी मैंने इसके लिए उसको नॉर्मल करने के लिए हीटर चालू किया उसकी आंच से उसका हाथ तो गर्म हुआ लेकिन कुछ समय बाद जब मैंने देखा तो वह मुझे छोड़कर दूर कहीं जा चुका था मैंने सोनजुही की लता के नीचे उसकी समाधि बनाई मैंने इस लता के नीचे उसकी समाधि इसलिए बनाई क्योंकि गुल्लू को वह बहुत पसंद थी.

दोस्तों मुझे उम्मीद है कि आपको महादेवी वर्मा की ये महादेवी वर्मा की कहानी गिल्लू पसंद आई होगी अगर आपक ये वाकई में पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों में शेयर जरूर करें और हमारा Facebook पेज लाइक जरुर करें और हमें कमेंटस के जरिए बताएं कि आपको हमारा यह आर्टिकल Mahadevi verma short stories in hindi कैसा लगा इसी तरह के नए-नए आर्टिकल पाने के लिए हमे सब्सक्राइब जरूर करें जिससे नई पोस्ट का अपडेट आपको मिल सके.

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