महाशिवरात्रि पूजा विधि व् व्रत कथा maha shivratri puja vidhi katha in hindi

maha shivratri puja vidhi katha in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस लेख के माध्यम से महाशिवरात्रि पूजा विधि व् व्रत कथा के बारे में बताने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस आर्टिकल को पढ़ते हैं ।

maha shivratri puja vidhi katha in hindi
maha shivratri puja vidhi katha in hindi

image source –https://www.livehindustan.com/astrology

पूजा विधि – महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है ।इस दिन जो भी व्यक्ति व्रत करता है वह सुबह जल्दी उठकर पूरे घर की साफ सफाई करके , स्नान करके , भगवान शिव के दर्शन के लिए मंदिर जाता है । सबसे पहले हाथ में जल , फूल , बेल पत्री , अक्षत , गोल सुपारी और 1 रु  हाथ में लेकर भगवान शिव के सामने व्रत करने का संकल्प लेता है । भगवान शिव की पिंडी पर बेलपत्र फूल माला चढ़ाई  जाती हैं ।

इसके बाद घी, दूध, दही से भगवान शिवलिंग की पूजा की जाती है । भगवान शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है ।  भगवान शिवलिंग की विशेष पूजा की जाती है । पूजा करने के बाद व्रत प्रारंभ हो जाता है । जो भी व्यक्ति व्रत रखता है वह दिनभर महाकाल के ध्यान में लीन रहता है । उसके मन में किसी भी तरह के कोई गलत काम ध्यान में नहीं आता है और भगवान शिवजी की आराधना करते हुए कीर्तन , भजन भी करता है । इस तरह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को व्रत करने से , रुद्राक्ष की माला गले में पहनने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मनचाहा वरदान देते हैं ।

कथा – एक गांव में गुरुद्रुह नाम का एक शिकारी रहता था । वह वाराणसी के जंगल में शिकार करने के लिए जाता था । वह जानवरों का शिकार करके अपने परिवार का भरण पोषण करता था । वह प्रतिदिन जंगल जाता शिकार करके घर पर आकर अपने परिवार के भोजन का इंतजाम  करता था । एक बार जब वह शिकार खेलने के लिए वाराणसी के जंगल में गया तब उस दिन फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी थी और महाशिवरात्रि का पर्व उस दिन था ।

वह दिन भर भूखे प्यासे जंगल में भटकता रहा लेकिन उसको कहीं पर भी शिकार करने के लिए जानवर नहीं मिला । वह बहुत चिंतित होने लगा था कि अब वह अपने परिवार की भूख कैसे मिटाएगा । वह ऐसा सोचकर पूरे जंगल में भटकता  रहा । गुरुद्रुह एक झील के किनारे पहुंचा । उसने सोचा  की जानवर  इस झील के किनारे  पानी पीने अवश्य आएंगे । जब  जानवर पानी पीने के लिए आएंगे तब मैं  उनका शिकार कर लूंगा । इस तरह से सोच कर वह झील के किनारे  पर एक  बेलपत्र के  पेड़ के नीचे बैठ गया था ।

वहीं से जानवरों का इंतजार कर रहा था । वही झील के पास मेंं एक शिवलिंग थी । जब झील के किनारे एक हिरण पानी पीने के लिए आया तब उस गुरुद्रुह ने अपनेेे धनुष से तीर छोड़ा और वह तीर बेलपत्र के पेड़़ की पत्ती पर लगा और बेल पत्री टूट कर  शिवलिंग  पर गिरी । जिस समय वह  बेल पत्री टूट कर  शिवलिंग  पर गिरी  वह समय रात का पहला पहर था । वह हिरण बच गया था और वहां से भाग गया था । उस शिकारी को हिरण का शिकार करने में सफलता नहीं मिली । वह भूखा प्यासा उसी पेड़़ केेेे चबूतरे पर बैठा था ।

जब दूसरा पहर होने वाला था तब दूसरा हिरण वहां पर पानी पीने आया ।   उस गुरुद्रुह ने अपनेेेे धनुष से तीर छोड़ा लेकिन वह तीर फिर से बेल पत्री की पत्ती पर लगा और वह पत्ती  शिवलिंग पर जा गिरी । वह तीर जैसे ही झील के पानी पर जाकर लगा उस झील से पानी उछलकर  शिवलिंग पर  गिर गया । जिससे अनजाने में ही  शिवलिंग की पूजा हो गई । इस तरह से तीसरी बार जब हिरण  उस झील के किनारे पानी पीने आया तब  शिकारी ने फिर से अपना तीर छोड़ा लेकिन बह तीर फिर से बेल पत्री की पत्ती पर लगा और बेल पत्री शिवलिंग पर  जा गिरी ।

इस तरह से तीसरे पहर में भी शिवलिंग की पूजा हो गई थी । जब  चौथा पहर प्रारंभ हुआ तब  हिरण अपने  पूरे परिवार के साथ वहां पर पानी पीने आया । जब गुरुद्रुह ने देखा कि पूरा हिरण का परिवार पानी पीने के लिए आया है तब उसने अपने तीर छोड़े लेकिन वह तीर बेल पत्री की पत्ती पर लगे और बेल पत्री टूटकर भगवान शिवलिंग पर गिर गई जिससे भगवान शिव की पूजा हो गई । इस तरह से अनजाने में गुरुद्रुह का शिवरात्रि का व्रत पूरा हुआ ।

भगवान शिव गुरुद्रुह जी पूजा से खुश हो गए थे । इस व्रत के प्रभाव से उस शिकारी की बुद्धि ठीक हुई और उसने शिकार करनेे का विचार अपने मन से निकाल दिया था ।सभी हिरण वहां से चले गए थे । थोड़ी देर बाद भगवान शिव प्रकट हुए और शिकारी से कहने लगे कि मैं तुम्हारी पूजा से खुश हुआ हूं । तुमने शिवरात्रि का व्रत पूरा किया इसीलिए मैं तुमसे खुश हूं ।

तुम्हें वरदान देता हूं की त्रेता युग में भगवान राम तुम्हारे घर पर आएंगे और तुम से मित्रता करेंगे । आज से तुम्हारे सभी कष्ट दूर हो जाएंगे । तुम को किसी तरह की कोई भी परेशानी नहीं होगी।  ऐसा कहकर शंकर भगवान वहां से अंतर्ध्यान हो गए । तभी से महाशिवरात्रि का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है और सभी महाशिवरात्रि के दिन पूजा करके व्रत करते हैं ।

दोस्तों हमारे द्वारा लिखा गया यह बेहतरीन लेख महाशिवरात्रि पूजा विधि व् कथा maha shivratri puja vidhi katha in hindi पसंद आए तो सब्सक्राइब अवश्य करें धन्यवाद ।

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *