माँ ताप्ती पर निबंध maa tapti essay in hindi

maa tapti essay in hindi

दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं मां ताप्ती पर हमारे द्वारा लिखे इस निबंध को। इस निबंध में हम ताप्ती नदी के बारे में विस्तृत जानकारी जानेंगे। ताप्ती नदी जो एक पवित्र नदी है जिसमें स्नान करने से व्यक्ति की अकाल मृत्यु नहीं होती है चलिए पढ़ते हैं मां ताप्ती के बारे में

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मां ताप्ती के पिता सूर्य भगवान है, इनके भाई शनिदेव हैं मां ताप्ती के कई अन्य नाम भी हैं जैसे कि तापी, तपती कई कथाओं में ऐसा माना जाता है कि सूर्य देव अपनी गर्मी से खुद को बचाना चाहते थे इसीलिए उन्होंने ताप्ती को जन्म दिया।

ताप्ती नदी को जन्म देने का उद्देश्य सूर्य देव का यही था की पृथ्वी पर रह रहे जीव जंतुओं की प्यास बुझाने में ताप्ती नदी मदद करें एवं सूर्य देव की गर्मी से भी रक्षा हो। मां ताप्ती का जन्म आषाढ़ शुक्ल की सप्तमी को हुआ था ताप्ती नदी एक ऐसी नदी है जिसमें स्नान करने से व्यक्ति की अकाल मृत्यु नहीं होती है।

ताप्ती नदी के साथ में लोगों को यमुना नदी में भी स्नान करना चाहिए दोनों ही पवित्र नदियां हैं। ऐसा माना जाता है शनिदेव ताप्ती के भाई हैं उन्होंने ताप्ती नदी को यह बर दिया था कि जब भी कोई ताप्ती और यमुना नदी में स्नान करेगा तो उसकी कभी भी अकाल मृत्यु नहीं होगी। ताप्ती नदी काफी प्रसिद्ध नदी है हर साल कार्तिक माह में ताप्ती नदी के आसपास जो धार्मिक स्थल है वहां पर मेला लगाया जाता है और बहुत ही धूमधाम से लोगों का वहां पर आवागमन होता है।

ताप्ती नदी से संबंधित कई अन्य कथाएं भी हैं। ऐसा कहा जाता है कि जब दशरथ जी ने गलती से श्रवण कुमार को मार डाला था जिस वजह से श्रवण कुमार के माता पिता ने दशरथ जी को श्राप दिया था कि जिस तरह से हम पुत्र के वियोग में तड़प तड़प कर मर रहे हैं उसी तरह तू भी पुत्र वियोग में तड़प तड़प कर मरेगा।

श्रवण कुमार की मृत्यु एक अकाल मृत्यु थी। जब श्री रामचंद्र जी अयोध्या से बन की ओर चले गए थे तब दशरथ जी की मृत्यु भी तड़प तड़प कर हुई थी। शास्त्रों के अनुसार जब पिता की मृत्यु हो तो बड़े पुत्र को ही अंतिम संस्कार करना होता हैं लेकिन उस समय श्री रामचंद्र जी वहां पर उपस्थित नहीं थे। जब रामचंद्र जी को यह पता लगा कि उनके पिता की मृत्यु हो गई है तब उन्होंने पिता का तर्पण कार्य ताप्ती नदी में ही किया था।

इसके अलावा शास्त्रों में कई अन्य कथाएं भी मिलती हैं।सूर्य पुराण के अनुसार सूर्य देव ने विश्वकर्मा की पुत्री संजना से विवाह कर लिया था विवाह के पश्चात उनके दो संताने हुई थी। सूर्य देव का ताप बहुत ज्यादा था और संजना को उनका ताप सहन नहीं होता था जिस वजह से वह एक मंदिर में जाकर तपस्या करने चली गई और सूर्य देव को छाया को सौंप दिया।

छाया रूप बदलकर संजना का ही रूप रखकर रहने लगी कुछ समय बाद छाया और सूर्य देव के जरिए एक पुत्र एवं एक पुत्री हुए पुत्र शनि देव हुए एवं पुत्री ताप्ती हुई ताप्ती नदी एक प्रसिद्ध नदी हैं कई कथाएं इस नदी से संबंधित शास्त्रों में हमें पढ़ने को मिलती हैं कहीं शास्त्र जैसे कि स्कंद पुराण महाभारत जैसे पुराणों में इनकी कथाएं उल्लेखित हैं हमें ताप्ती नदी और यमुना नदी में स्नान जरूर करना चाहिए।

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