लेपाक्षी मंदिर का रहस्य lepakshi temple history in hindi

lepakshi temple history in hindi

दोस्तों आज हम जानेंगे लेपाक्षी मंदिर के इतिहास को । चलिए अब हम इस लेख के माध्यम से लेपाक्षी मंदिर के इतिहास को जानेंगे । लेपाक्षी मंदिर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित है । यह मंदिर बहुत ही सुंदर और अद्भुत दिखाई देता है । इस मंदिर की जितनी भी प्रशंसा की जाए उतनी ही कम है । इस मंदिर की सुंदरता देखने के लायक है । इस मंदिर में लगभग 70 खंबे हैं  और सभी खंभे हवा में झूल रहे हैं ।

lepakshi temple history in hindi
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इस मंदिर के  खंबे जमीन से नहीं सधे हैं वह खंबे हवा में झूल रहे हैं । इस रहस्य का आज तक पता नहीं चल पाया है की इस मंदिर के खंबे हवा में क्यों लटके हुए हैं । इस मंदिर को देखने के लिए देश एवं विदेश से काफी लोग  आते हैं । यह मंदिर हैंगिंग पिलर्स के लिए पूरी दुनिया में फेमस है । यह मंदिर एक रहस्य बना हुआ है क्योंकि इस मंदिर के रहस्य के बारे में अभी तक कोई पता नहीं लगा पाया है कि इस मंदिर के खंबे हवा में क्यों लटके हुए हैं ।

ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर के खंबे के नीचे से जो भी व्यक्ति कपड़ा निकाल लेता है उसका जीवन सफल हो जाता है , उसके जीवन में सुख शांति और समृद्धि आ जाती है । ग्रंथों के अनुसार यह यह कहा जाता है कि जब राम भगवान का बनवास हुआ था  तब सीता माता लक्ष्मण और राम भगवान वन को गए थे  और रावण ने  सीता माता का अपहरण कर लिया था ।

जब रावण सीता माता का हरण करके ले जा रहा था तब  पक्षीराज जटायु ने सीता माता को बचाने के लिए रावण से  युद्ध किया था लेकिन वह  सीता माता को बचाने  में असफल रहा था , उसको  बहुत सारी चोट आई थी । जैसे ही पक्षीराज जटायु को  चोट लगी   वह लेपाक्षी मंदिर  पर  आकर गिरा था । जब राम भगवान एवं लक्ष्मण जी सीता माता को ढूंढते हुए इस मंदिर पर पहुंचे  तब  जटायु की मुलाकात  राम भगवान से  हुई थी ।

राम भगवान ने  जटायु से  कहा था कि उठो पक्षी तभी से  इस मंदिर का नाम  लेपाक्षी रखा गया है । लेपाक्षी शब्द का अर्थ होता है  उठो पक्षी लेकिन कुछ लोगों का यह मानना  है कि इस मंदिर का निर्माण 1583 को हुआ था । यह मंदिर वीरूपन्ना और वीरन्ना ने विजय नगर के राजा के लिए बनवाया था । यह दोनों विजयनगर के राजा के लिए काम किया करते थे । इन दोनों ने अपनी मेहनत और लगन से यह मंदिर बनाया था ।

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि यह मंदिर अगस्त ऋषि ने ही बनवाया था ।  यह मंदिर छठ वी सदी में बनाया गया था क्योंकि इस मंदिर की डिजाइन को देख कर हमें यह प्रतीत होता है कि छठवीं शताब्दी के कलाकारों ने ही यह मंदिर बनया होगा । इस मंदिर के अंदर राम भगवान के चरणों के निशान भी मौजूद हैं । इस मंदिर के रहस्य को जानने के लिए अंग्रेजों ने भी बहुत मेहनत की थी ।

ब्रिटिश शासन के समय कई इंजीनियरों ने इस मंदिर के रहस्य के बारे में जानने की कोशिश की थी लेकिन वह असफल रहे थे । ब्रिटिश शासन के समय इंजीनियरों ने मंदिर के रहस्य को जानने के लिए मंदिर को तोड़ने की भी कोशिश की थी लेकिन असफल रहे थे । जब उन्होंने इस मंदिर के रहस्य को जानने की कोशिश की तब उनको पता चला कि इस मंदिर के सभी खंबे हवा में झूल रहे हैं । सभी खंभे हवा में होने के कारण यह मंदिर किस तरह से टिका हुआ है यह सबसे बड़ा रहस्य बना हुआ है ।

इस रहस्य को आज तक कोई भी नहीं जान पाया है इसलिए इस मंदिर को हम हैंगिंग पिलर्स के नाम से जानते हैं ।

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