राजा शिवि की कथा king shibi and the two birds story

king shibi and the two birds story

राजा शिवि एक बहुत ही Dharmatma और दयालु राजा थे वह हमेशा दूसरों पर उपकार किया करते थे परोपकार की भावना उनमें शुरू से ही थी उनके पास बहुत धन था और वह जीवन में सिर्फ एक ही कामना रखते थे कि वह हमेशा दूसरे लोगों की जरूरतो को पूरी कर सकें और उन पर उपकार कर सकें.

king shibi and the two birds story
king shibi and the two birds story

उनके परोपकार कार्यों की वजह से उनकी कीर्ति चारों और फैली हुई थी जब उनकी कीर्ति का बखान देवराज इंद्र को पता चला तो वह उनकी परीक्षा लेने के लिए एक बाज का रूप रखकर राजा के राज्य में चले गए साथ में वह अग्निदेव को भी एक कबूतर के रूप में अपने साथ ले चलें.वह कबूतर आगे था और इंद्र रूपी बाज उसका पीछा कर रहा था तभी कबूतर राजा शिवि की गोद में जा गिरा राजा ने उन्हें अपने हाथों में लिया और सहलाने लगे तभी वहां पर वह बाज आया और राजा से कहने लगा कि महाराज यह मेरा शिकार है मैंने कुछ दिनों से भोजन नहीं किया आप मुझे यह कबूतर दे दीजिए

लेकिन राजा शिवि ने यह कह दिया कि मैं इस कबूतर की रक्षा करूंगा मैं तुम्हें इसे कदापि नहीं दूंगा तब इंद्र रूपी बाज राजा शिवि से बोला महाराज यदि आपने मेरा भोजन मुझे नहीं दिया तो में भूख की वजह से मर जाऊंगा और मेरे बच्चे भूख के मारे तड़प तड़प के मर जाएंगे इसका पाप आपको ही लगेगा तभी राजा कुछ समय के लिए सोच में पड़ गए कि आखिर क्या करना चाहिए तभी राजा शिवि उस बाज पक्षी से बोले की यदि मैं तुम्हें इस कबूतर के वजन जितना मास दे दूं तो.

यह सुनकर बाज पक्षी ने राजा की इस बात पर सहमति जताई और राजा ने वहां पर एकत तराजू मंगवाई उस तराजू के एक पड़ले पर उस कबूतर को रखा गया और दूसरे तराजू पर राजा अपने शरीर का मांस काटकर कबूतर के बराबर वजन तोल रहे थे लेकिन अपने शरीर का मांस जितना बह उस तराजू पर रख रहे थे उतना ही उस कबूतर का वजन बढ़ता हुआ नजर आ रहा था

तभी राजा खुद उस तराजू पर चढ़ गए और अपने आपको उस बाज पक्षी को सौंप दिया तभी इंद्र रूपधारी बाज को उस पर दया आ गई और उन्होंने राजा शिवि के समक्ष अपने असली रुप को प्रकट किया और कहा कि राजा शिवि मैं तो सिर्फ आपकी परीक्षा ले रहा था वास्तव में आप महादानी हो,परोपकारी हो आपके बराबर इस धरती पर कोई नहीं है ऐसा कहकर इंद्र और अग्नि देव वहां से अंतर्ध्यान हो गए.

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