कन्यादान पर निबंध kanyadan essay in hindi

kanyadan essay in hindi

दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं कन्यादान पर लिखे इस निबंध को । चलिए अब हम पढ़ेंगे कन्यादान पर लिखे इस निबंध को । कन्यादान विवाह के समय की जाने वाली एक रस्म है । एक विवाह में कई तरह की रस्मे होती हैं, उन रस्मों को हम सभी विवाह करते समय निभाते हैं । विवाह के समय कुछ रस्में ऐसी होती हैं जिन रस्मो को जरूर निभाना पड़ता है । कन्यादान वधु के माता पिता करते हैं । कन्यादान के समय अपनी बेटी की पूरी जिम्मेदारी वर और उसके परिवार वालों को दे दी जाती है । बधू के सुख दुख के साथी वर परिवार के सदस्य हो जाते हैं ।

kanyadan essay in hindi
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बेटी जब अपने मां बाप के घर रहती थी तब उसके सुख दुख के साथी उसके मां-बाप होते थे । जैसे ही बेटी के मां बाप बेटी का कन्यादान कर देते हैं तब से बेटी ससुराल की हो जाती है । जिस लड़की को मां, बाप ने लाड प्यार से पाला, उसे पढ़ाया लिखाया, शिक्षा दिलाई शादी के बाद वही बेटी घर छोड़ कर अपने पति के घर चली जाती है । लड़की के जन्म के बाद लड़की को यह पता नहीं होता है कि उसका ससुराल कैसा होगा ।

उसके पति का स्वभाव कैसा होगा यह सब उसे शादी के बाद पता चलता है । जब बेटी ससुराल जाती है तब अपने घर की सभी यादें अपने घर में ही छोड़ जाती है । बेटी अपने नए सपने के साथ ससुराल में अपना जीवन बिताने के लिए तैयार हो जाती है । लड़की का कन्यादान लड़की के मां-बाप करते हैं और लड़की की पूरी जिम्मेदारी उसके पति के परिवार वालों को दे देते हैं । कन्यादान एक रस्म है , लड़की के माता-पिता आटे की लोई का गोला बनाकर उसमें गुप्त धन छुपा कर बेटी का कन्यादान करते हैं ।

कन्यादान करने के बाद लड़की का घर ससुराल बन जाता है और वह अपना जीवन वहीं पर बिताती है । लड़की जैसे ही शादी करके अपने पति के घर जाती है तब लड़की ससुराल में अपना एक परिवार बनाती है । उसी परिवार में वह अपना सारा जीवन बिता देती है । जब लड़की शादी करके ससुराल जाती है तब उसे बड़ा अजीब सा लगता होगा क्योंकि वहां पर उसके जान पहचान का कोई भी नहीं होता है ।

शादी के बाद जब लड़की ससुराल जाती है तब उसे अपने घर परिवार वालों की बड़ी याद आती होगी । कन्यादान लेते समय लड़की के माता-पिता लड़के के माता-पिता से यह वचन लेते हैं कि वह हमारी बेटी को किसी तरह की कोई भी समस्या नहीं होने देंगे । बर के माता पिता बधू के सुख दुख में साथ देंगे । कन्यादान के बाद बच्चों के माता पिता बर के माता-पिता से कहते हैं कि हमने हमारी बेटी को बड़े प्यार से पाला है अब यह सारी जिम्मेदारी आपकी है ।

लड़की के अभिभावक यह वचन लेकर कन्यादान स्वीकार कर लेते हैं । कन्यादान की रस्म करते समय कन्या के हाथों को हल्दी से रंगा जाता है और आटे की लोई में गुप्त धन छुपा कर कन्या के हाथ में रखकर अपने माता पिता के हाथों से लड़की का कन्यादान किया जाता है । कन्यादान के बाद लड़की के कुल गोत्र अपने माता पिता के नहीं रह जाते हैं । लड़की के कन्यादान के बाद पति का गोत्र ही लड़की का गोत्र हो जाता है ।

यह कन्यादान देवी देवताओं के सामने एवं समाज के कई लोगों के सामने किया जाता है । कन्यादान में गुप्त दान के बारे में किसी को नहीं बताया जाता है । यह दान हमेशा गुप्त ही रहता है । कन्यादान के बाद बर, बधू देवी देवताओं का आशीर्वाद लेते हैं । कन्यादान के बाद वर ,वधू अपने बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं और वर-वधू जीवन के बंधन में हमेशा के लिए बंध जाते हैं । वर वधु एक दूसरे के सुख दुख के साथी होते हैं ।

इस तरह से कन्यादान की रस्म को पूरी की जाती है । कन्यादान के बाद लड़की के माता-पिता लड़की की जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाते हैं और लड़की की पूरी जिम्मेदारी लड़के के माता पिता एवं लड़के की हो जाती है ।

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