कजरी तीज व्रत कथा इन हिंदी kajari teej vrat katha in hindi

kajari teej vrat katha in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से कजरी तीज व्रत कथा के बारे में बताने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और कजरी तीज व्रत कथा को पढ़ते हैं । कजरी तीज का व्रत भाद्रपद महीने की कजली तीज को किया जाता है । यह व्रत हिंदू धर्म की महिलाएं अपने परिवार की सुख समृद्धि एवं शांति के लिए करती हैं । जो भी महिला इस व्रत को करती है उसके जीवन में खुशी आती है एवं उसका परिवार खुशी रहता है ।

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कथा – एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता है वह बहुत ही गरीब था । उसके घर के बहुत ही गरीब हालात थे । उसकी एक पत्नी थी । ब्राह्मण एवं ब्राह्मणी बड़े दुखी थे । वह अपनी गरीबी से बहुत परेशान थे । एक बार जब भाद्रपद महीने के समय कजरी तीज का दिन आया तब ब्राह्मणी ने व्रत रखा और पूरे विधि विधान से कजरी तीज व्रत की कथा कही थी ।  ब्राह्मणी पूजा का अर्ध्य देकर अपने व्रत को पूर्ण करने लगी । जब ब्राह्मण घर पर आया तब ब्राह्मणी ने ब्राह्मण से कहा कि आज मेरा कजरी तीज व्रत है ।

आप मेरे लिए सातु लेकर आओ । ब्राह्मण अपनी पत्नी से कहने लगा कि मेरे पास पैसे नहीं है मैं सातु कहां से लाऊं । ब्राह्मण की पत्नी कहने लगी कि मुझे इससे कुछ भी लेना देना नहीं है । मुझे तो शाम तक सातु चाहिए । तुम चाहे चोरी करके लाओ या फिर डाका डालकर मुझे इस से कुछ भी लेना देना नहीं है । मैंने कजरी तीज माता का व्रत किया है और जब तक सातु नहीं लाओगे तब तक मेरा व्रत पूरा नहीं होगा । इसीलिए तुम मेरे व्रत को पूरा करने के लिए सातु लेकर आओ ।

अपनी पत्नी की आज्ञा मानकर शाम के समय ब्राह्मण अपनी पत्नी का व्रत पूरा करने के लिए सातु लेने के लिए निकल पड़ा था । उसने कई लोगों से सातु मांगा परंतु किसी ने भी गरीब ब्राह्मण की मदद नहीं की । जब समय निकलता जा रहा था तब ब्राह्मण ने यह फैसला किया कि मैं अब साहूकार की दुकान में जाकर चोरी करूंगा और वहां से सातु बनाकर अपनी पत्नी को दे दूंगा ।

यह निश्चय करके ब्राह्मण साहूकार की दुकान के अंदर चला गया और साहूकार की दुकान से घी , चने की दाल , शक्कर लेकर तराजू पर सवा किलो वजन तोल कर उसने वहीं पर सातु बना लिया । सातु बनाने के बाद जब ब्राह्मण दुकान से बाहर आ रहा था तब साहूकार के नौकर की नींद खुल गई और वह ब्राह्मण को जाते हुआ देख चिल्लाने लगा । उसी समय साहूकार एवं उसके बाकी नौकर एकत्रित हुए और ब्राह्मण को पकड़ लिया था ।

ब्राह्मण ने हाथ जोड़कर साहूकार से कहा कि मैं यहां पर चोरी करने के लिए नहीं आया हूं । मेरी पत्नी ने कजरी तीज माता का व्रत किया है । मैं यहां पर सिर्फ सातु लेने के लिए आया था और वही मैंने लिया है । साहूकार ने अपने नौकरों के माध्यम से उसकी तलाशी ली। उस ब्राह्मण के पास सिर्फ सातु ही मिला था ।

साहूकार ने ब्राह्मण से कहा कि आज से मैं तेरी पत्नी को मुंह बोली बहन मानता हूं और साहूकार ने बहुत सारा धन , सातु , गहने , रुपए , मेहंदी देकर ब्राह्मण को विदा किया । इसके बाद ब्राह्मण धनवान हो गया था और उसकी पत्नी धनवान हो गई थी । जिस तरह से ब्राह्मण धनवान हुआ उसके घर में सुख शांति आई इसी तरह से जो भी महिला कजरी तीज व्रत करती है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं ।

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