कछुआ और खरगोश की कहानी Kachua aur khargosh ki kahani

Kachua aur khargosh ki kahani

दोस्तों आज हम पढ़ेंगे खरगोश और कछुआ की एक बेहतरीन कहानी इस कहानी को पढ़कर आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा तो चलिए पढ़ते हैं हमारी आज की इस कहानी को

एक जंगल में कछुआ और खरगोश रहते थे खरगोश ने कछुए को एक चुनौती दे डाली की तुम जैसे जानवर मुझ जैसे फुर्तीले जानवर का मुकाबला नहीं कर सकते मैं तो बहुत तेज दौड़ता हूं.कछुए ने जब खरगोश की इन बातों को सुना तो वह बोला ऐसा है तो कल हम दोनों मिलकर एक रेस प्रतियोगिता रखते हैं और देखते हैं उस रेस में कौन जीतेगा. अगले दिन खरगोश और कछुए के बीच में रेस प्रतियोगिता हुई खरगोश बहुत ही तेज दौड़ता था वह बहुत ही फुर्तीला था.

Kachua aur khargosh ki kahani
Kachua aur khargosh ki kahani

जैसे ही खरगोश और कछुआ दौड़ने लगे तो खरगोश बहुत ही तेजी से दौड़ा और जब उसने मुड़कर देखा तो उसे दूर दूर तक कछुआ नजर नहीं आया उसने सोचा कि कछुआ तो बहुत धीमे चलता है उसे आने में तो अभी बहुत देर लगेगी क्यों ना मैं इस पेड़ के किनारे थोड़ा आराम कर लूं.वह आत्मविश्वास में आकर उस पेड़ के किनारे आराम करने लगा इधर कछुआ अपनी धीमी धीमी चाल से चलते हुए आगे बढ़ रहा था वह उस रेस प्रतियोगिता को जीत गया इधर पेड़ के किनारे सोया हुआ खरगोश जब जागा तो उसने देखा कि बहुत ही धीमी गति से चलने वाला कछुआ तो विजेता घोषित किया जा चुका है.

खरगोश को बहुत दुख हुआ क्योंकि वह रेस जीत सकता था लेकिन आलस में आकर वह पेड़ के किनारे सो गया था और वह रेस प्रतियोगिता हार गया था इसलिए दोस्तों हमें कभी भी जीवन में आलस नहीं करना चाहिए हमें तब तक चलते रहना चाहिए जब तक की हम जीत ना जाए.

अगले दिन खरगोश ने कछुए से दोबारा कहा कि पहली रेस तुम जीत चुके हो अब हम दूसरी रेस लगाते हैं देखते हैं इस बार कौन जीतेगा खरगोश की बातों को सुनकर कछुए ने हा कहा क्योंकि कछुआ पहले ही रेस जीत चुका था वह आत्मविश्वास से भरा हुआ था अगले दिन जब उन दोनों में फिर से रेस हुई तो इस बार खरगोश बिना रुके लगातार दौड़ता रहा वह जोर-जोर से दौड़ता रहा और तब तक नहीं रुका जब तक कि वह अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंचा.खरगोश इस दूसरी प्रतियोगिता में जीत गया वह सबसे आगे पहुंच गया और कछुआ हार गया. जंगल के सभी जानवर खुशी मनाने लगे इधर कछुआ थोड़ा सा निराश हो गया था.

यह तक कि कहानी से हमें सीख मिलती है कि हमें जीवन में अगर किसी लक्ष्य को पाना है तो बिल्कुल भी नहीं रुकना चाहिए जब तक कि हम जीत न जाएं.

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अगले दिन खरगोश ने कछुए से कहा कि चलो तीसरी बार भी हम रेस प्रतियोगिता को लड़ते हैं अगले दिन प्रतियोगिता शुरू हुई खरगोश और कछुआ इसके लिए तैयार होकर आ गए. इस रेस प्रतियोगिता को लड़ने से पहले कछुए ने कहा कि मैं जहां से और जिस जगह तक रेस प्रतियोगिता लड़ने को कहूंगा हम वही जगह सिलेक्ट करेंगे खरगोश इस बात के लिए तैयार हो गया.

रेस प्रतियोगिता शुरू हुई तो खरगोश और कछुआ तेजी से दौड़ने लगे.खरगोश आगे पहुंच गया था लेकिन तभी खरगोश ने देखा कि आगे नदी है और खरगोश नदी के पार नहीं जा सकता था पीछे से धीमी गति से आ रहा कछुआ नदी में तैरता हुआ आगे पहुंच गया और वह जीत गया इसलिए कहते हैं कि अगर जीवन में जीतना है तो आप जिस क्षेत्र में माहिर है उस हिसाब से चलिए तो आप जरूर जीतेंगे.

जब कछुआ नदी के पार जाकर रेस प्रतियोगिता को जीतकर खरगोश क पास आया तो वह दोनों दोस्त बन चुके थे.कछुआ बोला चलो हम एक बार और प्रतियोगिता रखते हैं हम साथ साथ में रेस रखते हैं. प्रतियोगिता शुरू हुई कछुआ बहुत ही धीमी गति से चल रहा था खरगोश ने कछुए को पकड़ लिया और उसको पकड़कर अपने साथ भागने लगा दोनों साथ-साथ नदी के किनारे पहुंच गए और अब कछुए ने खरगोश को अपनी पीठ पर बैठा लिया और नदी पार करके दोनों साथ-साथ जीत गए और दोनों ही विजेता हो गए.जंगल के सभी जानवर हंसने मुस्कुराने लगे. खरगोश और कछुआ दोनों घनिष्ट मित्र बन गए.

जीवन में अगर साथ-साथ कुछ भी काम किया जाए तो हम उसमे जरूर जीत सकते हैं क्योकि यूनिटी की ताकत सबसे बढ़कर होती है.

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