जीवदानी मंदिर का इतिहास Jivdani mandir virar history in hindi

Jivdani mandir virar history in hindi

Jivdani mandir virar –  दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से जीवदानी मंदिर के इतिहास के बारे में बताना जा रहे हैं । तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस आर्टिकल को पढ़कर जीवदानी मंदिर के इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं ।

Jivdani mandir virar history in hindi
Jivdani mandir virar history in hindi

Image source – https://palghar.gov.in/tourist-place/jivdani-mandir-virar/

जीवदानी मंदिर के इतिहास के बारे में – जीवदानी मंदिर भारत देश के महाराष्ट्र राज्य के  ठाणे के विरार में स्थित है । जीवदानी मंदिर का निर्माण एक पहाड़ी की चोटी पर किया गया है । जीवदानी मंदिर के बारे में भारतीय हिंदू ग्रंथों में भी बताया गया है । भारतीय पुराणों के अनुसार यह मंदिर बहुत ही पुराना है और इस मंदिर का निर्माण पांडवों के द्वारा करवाया गया था । जब पांडवों को वनवास भेजा गया था तब वह वनवास काटने के लिए गए थे और उन्होंने वीरा गुफा में जाकर शरण ली थी । सभी पांडवों ने वीरा गुफा में माता का मंदिर बनाने का निर्णय किया था ।  पांडवों ने वीरा गुफा पर मंदिर बनवाया था ।

मंदिर में जीवदानी माता की मूर्ति भी पांडवों के द्वारा  स्थापित की गई थी । वहीं पर पांचों पांडवों के द्वारा माता की पूजा की जाती थी । पांडवों ने पांडव डूंगरी नामक स्थान पर यह मंदिर बनवा कर पूजा करके माता से प्रार्थना की थी कि वह उनको शक्ति दे । पांडवों के बाद इस स्थान पर संतो , योगियों , ऋषियों का निवास बन गया था । जहां पर कई संतों के द्वारा तपस्या की गई थी । इस स्थान पर देवी जीवदानी की अपार कृपा है । जो भी भक्त जीवदानी माता के मंदिर जाकर माथा टेकता है उसकी सभी मनोकामनाएं जीवदानी माता पूरी करती हैं ।

भारतीय लोगों की आस्था देवी जीवदानी के मंदिर से जुड़ी हुई है । प्रतिवर्ष देवी जीवदानी माता के दर्शनों के लिए लोग जाते हैं और अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं ।मंदिर के निर्माण की नीव पांडवों के द्वारा 17 वीं शताब्दी में रखी गई थी । मंदिर के अंदर कई जलकुंड  पांडवों के द्वारा बनवाए गए थे । जिसकी सुंदरता आज की बहुत अच्छी लगती है । जो भी भक्त जीवदानी माता के मंदिर के दर्शनों के लिए जाता है उसको पहले मुंबई जाना पड़ता है और मुंबई से  रेल के माध्यम से विरार जाना पड़ता है ।  विरार से माता जीवदानी की यात्रा प्रारंभ होती है ।

जब जीवदानी माता मंदिर पर पहुंच जाते हैं तब वहां पर फूल , माला , प्रसाद की दुकान से फूल , माला , प्रसाद लेकर मंदिर के अंदर जाने के लिए लाइन में लगना पड़ता है । लाइन में लगते हुए एक-एक करके सभी भक्तगण माता जीवदानी के दर्शन के लिए अंदर जाते हैं । प्राचीन समय से लेकर आज तक  देवी जीवदानी के मंदिर के निर्माण कार्य कराए गए हैं । आज इस मंदिर की सुंदरता बहुत ही दर्शनीय है । भक्तगण को इस मंदिर पर माता जीवदानी के दर्शनों के लिए तकरीबन 1300 सीढ़ियां चढ़कर जाना पड़ता है । जो भक्त  माता जीवदानी के दर्शनों के लिए 1300 सीढ़ियां चढ़कर जाता है वह अपने जीवन में आनंद प्राप्त करता है ।

यदि हम मुंबई से जीवदानी माता के मंदिर की दूरी की बात करें तो मुंबई से जीवदानी माता मंदिर की दूरी 60 किलोमीटर है । महाराष्ट्र सरकार के द्वारा जीवदानी मंदिर के विकास के लिए काफी पैसा दिया जाता है । प्रशासन के द्वारा जीवदानी मंदिर की रक्षा सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं । जीवदानी माता मंदिर पर नवरात्रि पर काफी भीड़ देखी जाती है । भारत देश के कोने कोने से हिंदू धर्म एवं कई धर्म के लोग जीवदानी माता के दर्शनों के लिए आते हैं और अपने जीवन में आनंद प्राप्त करते हैं । यह मंदिर प्राचीन समय का होने के कारण सभी भक्तों को आनंद देता है ।

इसकी सुंदरता की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है । इस मंदिर की सुंदरता पहाड़ी पर होने के कारण और भी अधिक सुंदर लगती है । जीवदानी माता मंदिर पर नवरात्रि पर मेला भी लगता है । जिस मेले की तैयारिया प्रशासन के द्वारा एवं मंदिर ट्रस्ट के द्वारा एक , दो महीने पहले से ही की जाती है ।  सभी भक्तों को किसी तरह की कोई समस्या ना हो इसके इंतजाम भी महाराष्ट्र प्रशासन के द्वारा किए जाते हैं । जब नवरात्रि पर कोई भक्त जीवदानी माता मंदिर के दर्शनों के लिए आता है तब वह मंदिर की सुंदरता देखकर अपने जीवन में आनंद प्राप्त करता है ।

जीवदानी माता मंदिर के बारे में ऐसा भी कहा गया है कि जीवदानी माता मंदिर मे जो भी भक्तगण जाता है उस भक्तगण को जीवदानी माता के द्वारा सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उस व्यक्ति के रुके हुए सभी कार्य पूर्ण हो जाते हैं । यदि हम जीवदानी माता मंदिर की सुंदरता को देखना चाहते हैं तो हमें महाराष्ट्र के विरार में स्थित जीवदानी माता के मंदिर के दर्शनों के लिए अवश्य जाना चाहिए । जब हम वहां पर पहुंचेंगे तब हम इसकी सुंदरता को देख पाएंगे और अपने जीवन में आनंद प्राप्त कर पाएंगे ।

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