जाहरवीर गोगा पीर की कहानी jaharveer goga ji ki katha in hindi

Guga peer story in hindi

दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं जाहरवीर गोगा पीर की कहानी । चलिए अब हम पढ़ेंगे जाहरवीर गोगा पीर की कहानी को । जाहरवीर गोगा पीर राजस्थान के लोक देवता हैं । इनका जन्म राजस्थान के ददरेवा के चौहान वंश में हुआ था । जब जाहरवीर गोगा पीर का जन्म हुआ था तब ब्राह्मण के घर नाहरसिंह वीर , हरिजन के घर भज्जू कोतवाल, भंगी के घर रत्ना जी भंगी का भी जन्म हुआ था ।

गोगा पीर की मां बाछल देवी नि संतान थी लेकिन काफी समय बाद एवं गोरखनाथ के आशीर्वाद से गोगा पीर का जन्म हुआ था ।

 jaharveer goga ji ki katha in hindi
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यह कहा जाता है कि चौहान वंश में पृथ्वीराज चौहान के बाद गोगा पीर ही सबसे शक्तिशाली राजा था । गोगा पीर राजा का राज्य सतलुज से हरियाणा तक फैला हुआ था । गोगा पीर एवं नाहरसिंह वीर ,भज्जू कोतवाल , रत्ना जी भंगी यह सभी गोरखनाथ जी के प्रिय भक्त थे । गोरखनाथ जी ने इन सभी को शिक्षा दी थी । गोगा पीर का जन्म जयपुर से सादलपुर के पास दत्त खेड़ा में हुआ था ।

जन्म स्थान से कुछ दूरी पर चौहान वंश के राजा गोगा पीर ने समाधि ले ली थी । यह कहा जाता है कि गोगा पीर को भगवान शिव ने आशीर्वाद दिया था कि जो भी भक्त गोगा पीर की समाधि पर माथा टेकने के लिए आएगा उसकी सारी मुरादें पूरी हो जाएंगी । गोगा पीर की पूजा सभी सांप के जहर से बचने के लिए करते हैं । काफी दूर-दूर से लोग गोगा पीर की समाधि स्थल पर जाकर माथा टेकते हैं । गोगा पीर की छड़ का बड़ा ही महत्व है ।

जो व्यक्ति गोगा पीर की समाधि पर माथा टेकने के लिए जाता है यदि वह छड़ की पूजा ना करे तो उसकी प्रार्थना कभी भी सफल नहीं होती है । दत्त खेड़ा में गोगा पीर के घोड़े का अस्तबल अभी भी मौजूद है । गोगा पीर को सभी धर्म के लोग पूजते हैं । गोगा पीर राजस्थान में लोक देवता के रूप में पूजे जाते हैं । गोगा जाहरवीर पीर को हिंदू ,मुस्लिम ,सिख, ईसाई सभी धर्म के लोग मानते हैं ।

राजस्थान के चूरू में गोगा जाहरवीर के नाम से धर्मशालाएं ,अनाथ आश्रम बनाए गए हैं । राजस्थान के लोगों के लिए गोगा पीर आस्था का केंद्र है । यह मान्यता है कि जो व्यक्ति अपने दुखों को लेकर गोगा पीर की समाधि पर माथा टेकने के लिए जाता है उसकी सभी मुरादें पूरी हो जाती हैं । राजस्थान में सभी गोगा जाहरवीर पीर को अपने घरों में पूजते हैं । यह कहा जाता है कि सर्प विष से बचने के लिए गोगाजी पीर की पूजा की जाती है ।

राजस्थान में गोगा पीर के नाम से एक शहर भी बनाया गया है । राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के पास एक शहर बनाया गया था जिसका नाम गोगामेड़ी रखा गया था । गोगा पीर गोरखनाथ के परम शिष्यों में से एक थे । गोरख नाथ की कृपा से ही गोगा पीर का जन्म हुआ था । गोगा पीर एक ऐसे महान राजा थे जिन्होंने सभी धर्म के लोगो को एक साथ ला करके खड़ा कर दिया था । इसलिए आज उनकी समाधि स्थल पर माथा टेकने के लिए हिंदू ,मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्म के लोग आते हैं ।

गोगा पीर अपने घोड़े से बहुत प्रेम करते थे । वह अपने घोड़े की पीठ पर बैठकर पूरे राज्य का भ्रमण भी किया करते थे । गोगा पीर के जन्म स्थान पर आज भी उनके घोड़े का अस्तबल मौजूद है । गोगा पीर के जन्म स्थान पर उनके घोड़े की मूर्ति भी बनाई गई है ।

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