जगद्धात्री पूजा विधि, कथा एवं इतिहास jagadhatri puja vidhi katha history in hindi

jagadhatri puja vidhi katha history in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस लेख के माध्यम से जगद्धात्री पूजा विधि , कथा एवं इतिहास के बारेे में बताने जा रहेे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और इस लेख को बड़े ध्यान सेे पढ़ते हैं । जगद्धात्री माता की पूजा पश्चिम बंगाल में बड़े धूमधाम से की जाती है ।इस त्योहार में मां जगद्धात्री  की पूजा पश्चिम बंगाल में शरद ऋतु के प्रारंभ में की जाती है । इस पूजा का पश्चिम बंगाल में विशेष महत्व होता है ।

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जिस तरह से मां दुर्गा की पूजा नवरात्रि के समय 9 दिनों तक की जाती है उसी तरह से मां जगद्धात्री की पूजा पश्चिम बंगाल केेे साथ-साथ उड़ीसा के कुछ शहरों में  नवरात्रि के 1 महीने बाद कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी सेे यह त्योहार एवंं मां जगद्धात्री की पूजा बड़े  धूमधाम से की जाती है । यह पूजा पूरे 4 दिनों तक चलती है । इस पूजा का पश्चिम बंगाल राज्य में बड़ा महत्व हैं । पश्चिम बंगाल माता दुर्गा एवं मां काली की पूजा के लिए सबसे ज्यादा फेमस है ।

यहां पर मां दुर्गा एवं मां काली की पूजा बड़े ही धूमधाम से की जाती है । इसी तरह से मां जगद्धात्री की पूजा भी पूरे धूमधाम से 4 दिनों तक की जाती है । पश्चिम बंगाल में मां जगद्धात्री की पूजा को देखने के लिए भारत देश के कोने-कोने से लोग पश्चिम बंगाल जाते हैं । जिस तरह से मां दुर्गा की पूजा की जाती है उसी तरह से जगद्धात्री मां की पूजा की जाती है । इस पूजा की शुरुआत पश्चिम बंगाल के चंदन नगर से हुई थी । चंदननगर में चंदन का व्यापार सबसे अधिक किया जाता है । इसलिए इस नगर का नाम चंदन नगर रखा है ।

यह त्योहार चंदन नगर के साथ-साथ पूरे कोलकाता एवं कृष्णा नगर में भी मनाया जाता है । यह त्यौहार मां दुर्गा के पुनर्जन्म की खुशी के रूप में मनाया जाता है । ऐसा कहा जाता है कि इस त्यौहार को सबसे पहले रामकृष्ण की पत्नी शारदा देवी ने भगवान के पुनर्जन्म के रूप में मनाया था । शारदा देवी भगवान के पुनर्जन्म में बहुत विश्वास रखती थी । उन्हीं ने सबसे पहले जगद्धात्री मां की पूजा की थी । मां जगद्धात्री की पूजा मां दुर्गा की पूजा की तरह की जाती है । मां जगद्धात्री को पांडाल में विराजमान कराया जाता है ।

उसके बाद मां का श्रंगार एवं लाल वस्त्र पहनाए जाते हैं । मां जगद्धात्री की तीन आंखें एवं चार हाथ होते हैं ।  मां जगद्धात्री के चारों हाथों में चक्र , धनुष , तीर एवं  शंख होते हैं । मां जगद्धात्री सिंह पर सवारी करती हैं जो की  मृत दानव हाथी पर खड़ा रहता है । मां जगद्धात्री की पूजा सभी महिला सुबह उठ कर करती हैं ।

कथा –  जब महिषासुर का अन्याय देवताओं के ऊपर ज्यादा बढ़ गया था तब मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था और देवताओं को उनके खोए हुए सिंहासन वापस दिला दिए थे । इसके बाद देवताओं को अपने आप पर बहुत ज्यादा घमंड हो गया था । सभी देवता अपने आप को शक्तिशाली मानने लगे थे । ऐसा देख भगवान ने यक्ष देव को सभी देवताओं से पहले पूजनीय बनाया था । जब यक्ष देव को यह अधिकार प्राप्त हुए तब सभी देवता क्रोधित होने लगे और सभी देवता एकत्रित होकर यक्ष देव के पास  पहुंचे ।

सभी देवता यक्ष देव से कहने लगे कि यह  हमारे ऊपर अन्याय है । हम दुनिया के सबसे शक्तिशाली देवता हैं लेकिन आप सबसे पहले पूजनीय कैसे बन गए । तब यक्ष देव ने सभी देवताओं से एक-एक करके उनकी शक्ति के बारे में जानकारी प्राप्त की । उन्होंने जब वायु देव को अपने पास बुलाया तब उनसे पूछा कि तुम्हारी शक्ति कितनी शक्तिशाली है । वायु देव ने यक्ष देव से कहा कि मैं अपनी शक्ति से ऊंचे ऊंचे पहाड़ पारकर सकता हूं , पूरे ब्रह्मांड का चक्कर लगा सकता हूं ।

यह सुन यक्ष देव ने अपना सबसे छोटा रूप धारण किया और वायु देव से कहा कि यदि तुम मुझे नष्ट कर दो तो मैं तुम्हारी पूजा करने लगूंगा । वायु देव ने अथक प्रयास किए  परंतु यक्ष देव को हानि नहीं पहुंचा पाए थे । सभी देवताओं ने कई प्रयास किए परंतु अंत में जीत यक्ष देव की ही हुई थी । सभी देवता यह समझ गए थे कि ईश्वर की शक्ति के बराबर हमारी शक्ति कुछ भी नहीं है ।

ईश्वर के बिना हमारा कोई भी अस्तित्व नहीं है । सभी देवताओं ने यक्ष देव से माफी मांगी और तभी से यह कहा जाता है कि जिस मनुष्य के अंदर अहंकार  नहीं होता है उसी पर माता जगद्धात्री की कृपा होती है ।

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