स्वतंत्रता दिवस पर कविता और गीत Independence day poem in hindi

Independence day poem in hindi

दोस्तों स्वतंत्रता दिवस की आप सभी को बहुत बहुत बधाइयाँ. आज  हम आपके लिए लाए हैं एक बेहतरीन कविता. दोस्तों स्वतंत्रता दिवस हम भारतीयों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिवस है. आज के दिन ही हम स्वतंत्र हुए थे इससे पहले अंग्रेजों ने हम पर कई तरह के अत्याचार किए इन अत्याचारों की वजह से बहुत से स्वतंत्रता सेनानी और देशभक्तों ने अंग्रेजों को देश से भगाने के लिए काफी कोशिश की कई देशभक्तों को काला पानी की सजा दे दी गई आखिर में भारत ने 15 अगस्त 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त की और हमारा देश स्वतंत्र हुआ चलिए पढ़ते हैं स्वतंत्रता दिवस पर लिखी इस कविता और लता मंगेशकर जी द्वारा गाये गीत “ये मेरे वतन के लोगो” को

Independence day poem in hindi
Independence day poem in hindi

सारे जहां से अच्छा, हिंदुस्तान हमारा

हम बुलबुलें हैं इसकी, वह गुलिसितां हमारा

 

गुरबत में हो अगर हम रहता है दिल वतन में

समझो वही हमें भी दिल हो जहां हमारा

 

पर्वत वो सबसे ऊंचा, हमसाया आसमां का

वो संतरी हमारा वो पासवां हमारा

 

गोदी में खेलती है, जिसकी हजारों नदियां

गुलशन है जिसके दम से रश्के जिना हमारा

 

ए आबे रूद ए गंगा वह दिन है याद तुझको

उतरा तेरे किनारे, जब कारबाँ हमारा

 

मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना

हिंदी है हम वतन हैं हिंदुस्तान हमारा

 

यूनान ओ मिश्र ओ रोमा, सब मिट गए जहां से

अब तक मगर है बाक़ी, नाम-ओ-निशां हमारा

 

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी

सदियों रहा है दुश्मन, दौर ए जहां हमारा

 

इकबाल कोई महरम, अपना नहीं जहां में

मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहां हमारा

 

सारे जहां से अच्छा, हिंदोस्तां हमारा

हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिस्तां हमारा

मोहम्मद इकबाल

 

ए मेरे वतन के लोगों गीत Aye mere watan ke logon ko

ए मेरे वतन के लोगों

तुम खूब लगा लो नारा

ये शुभ दिन है हम सब का

लहरा लो तिरंगा प्यारा

पर मत भूलो सीमा पर

वीरों ने है प्राण गंवाए

कुछ याद उन्हें भी कर लो

जो लौट के घर ना आए

 

ऐ मेरे वतन के लोगों

जरा आंख में भर लो पानी

जो शहीद हुए हैं उनकी

ज़रा याद करो कुर्बानी

 

जब घायल हुआ हिमालय

खतरे में पड़ी आजादी

जब तक थी सांस लड़े वो

फिर अपनी लाश बिछा दी

संगीत पे धर कर माथा

सो गए अमर बलिदानी

 

जो शहीद हुए हैं उनकी

ज़रा याद करो कुर्बानी

 

जब देश में थी दीवाली

वो खेल रहे थे होली

जब हम बैठे थे घरों में

वो झेल रहे थे गोली

थे धन्य जवान वह आपने

थी धन्य वह उनकी जवानी

 

जो शहीद हुए हैं उनकी

ज़रा याद करो कुर्बानी

 

कोई सिख कोई जाट मराठा

कोई गुरखा कोई मदरासी

सरहद पर मरने वाला

हर वीर था भारतवासी

जो खून गिरा पर्वत पर

वो खून था हिंदुस्तानी

 

जो शहीद हुए हैं उनकी

ज़रा याद करो कुर्बानी

 

थी खून से लथपथ काया

फिर बंदूक उठाके

दस दस को एक ने मारा

फिर गिर गए होश गवा के

जब अंत समय आया तो

कह गए के अब मरते हैं

खुश रहना देश के प्यारों

अब हम तो सफ़र करते हैं

क्या लोग थे वो दीवाने

क्या लोग थे वो अभिमानी

 

जो शहीद हुए हैं उनकी

ज़रा याद करो कुर्बानी

 

तुम भूल न जाओ उनको

इसलिए कही ये कहानी

जो शहीद हुए हैं उनकी

ज़रा याद करो कुर्बानी

 

जय हिन्द  जय हिन्द

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