चीन का इतिहास history of china in hindi

history of china in hindi

दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से चीन के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और चीन के इतिहास को बड़ी गहराई से जानते हैं । चीन का इतिहास काफी पुराना माना जाता है ।प्राचीन ग्रंथों एवं इतिहासकारों के अनुसार चीन का इतिहास काफी साल पुराना है । ऐसा कहा जाता है कि चीन की धरती पर मनुष्य की उपस्थिति लगभग 23 लाख साल पहले हुई थी ।

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यहां पर कई वंशज आए और चीन पर अपना आधिपत्य चलाया था । चीन की बात करें तो यहां की सभ्यता के बारे में जानने की उत्सुकता सभी के मन में होती है क्योंकि यहां का इतिहास काफी दिलचस्प और रोमांचकारी है । इतिहासकारों का मानना है कि चीन का सबसे पुराना राजवंश शिया राजवंश है । 221 ईसा पूर्व में यहां पर  झाऊ वंश के  लोग शासन किया करते थे । झाऊं वंश के शासकों के द्वारा चीन में सामंतवादी प्रारंभ की गई थी ।

कई समय तक झाऊं वंश के द्वारा यहां पर विकासशील कार्य की गए थे । इसके बाद चीन की धरती पर किन वंश का आगमन हुआ और यहां पर 220 ईसा पूर्व से 206 ईसा पूर्व तक किन वंश ने कठिन परिश्रम कर संगठित चीन की स्थापना की और इसी समय के दौरान चीन में एक विशाल दीवार बनाई गई थी । इसके बाद 206 ईसा पूर्व से 220 ईसवी तक चीन पर हान वंश ने अपना शासन चलाया था और चीन की सीमा बढ़ाने का काम हान वंश के समय किया गया था ।

इस वंश के शासन काल में चीन की सीमा को वियतनाम , कोरिया , मंगोलिया एवं मध्य एशिया तक बढ़ाया गया था । इसके बाद 1368 ईसवी के दौरान चीन पर झू यांग झांग का आधिपत्य था । झू यांग झांग ने चीन पर अपना आधिपत्य स्थापित करनेेे के लिए मंगोलो से युद्धध किया ।  इस युद्ध में  झू यांग झांग ने जीत हासिल करके अपना आधिपत्य स्थापित किया और मिंग वंश की स्थापना की । ऐसा कहा जाता है कि अट्ठारह सौ इक्यावन ईसवी में चीन का अंतिम राजवंश किंग था और चीन के अंतिम राजवंश किंग केे द्वारा चीन में यूरोपीय प्रभाव को पूरी तरह से समाप्त किया गया था ।

चीन  के अंतिम राजवंश किंग ने चीन को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में कर लिया था । चीन की सबसे बड़ी घटना 1911 ईस्वी में घटी । 1911 ईस्वी के दौरान चीन में ताइपिंग विद्रोह हुआ था । इस विद्रोह में कई क्रांतिकारी खड़ेेे हुए थे । यह सभी क्रांतिकारी  किंग राजवंश से  विद्रोह  कर रहे थे । इस विद्रोह  में लाखों चीनी नागरिक  मारे गए थे । यह विद्रोह आज भी चीन के इतिहास में  मौजूद है क्योंकि यह चीन का सबसे  हिंसक गृह युद्ध था

इस युद्ध में चीन को काफी नुकसान झेलना पड़ा था । इसके बाद 1937 ईस्वी के समय किंग वंश के खिलाफ सन यात सेन ने जंग छेड़ दी थी और जो विद्रोह किंग वंश के खिलाफ चल रहा था उस विद्रोह का नेतृत्व कर किंग वंश को खत्म किया था ।  सन यात सेन ने चीन को गणतंत्र  राज्य  घोषित  करवाया था । कुछ समय बीत जाने के बाद 1939 ईसवी में चीन पर जापान के द्वारा  आक्रमण किया गया था और दोनों देशों के बीच  बहुत ही भयंकर युद्ध हुआ था ।

चीन और जापान का यह युद्ध  1945  तक चला  था । इस युद्ध के  अंत तक  यानी  1945 तक  चीन के  तकरीबन एक करोड़  नागरिक  मारे गए थे और  कई चीनी नागरिक  गायब हो गए थे । चीन को मजबूत एवं विकासशील बनाने के लिए 1958 ईस्वी को माओत्से तुुंग केे द्वारा पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की गई थी । इसके बाद  चीन  गण तांत्रिक  समाजवादी  देश  बना था  और चीन का विकास  हुआ था । कई विकासशील कार्य  माओत्से  तुंग के द्वारा किए गए थे ।

माओत्से तुंग ने चीन को  विकासशील बनाने के लिए चीन में औद्योगिकीकरण की स्थापना की थी । परंतु यह  औद्योगिकीकरण  करने  का प्रयास  सफल नहीं रहा था और  यह  योजना  3 वर्ष के अंतराल में खत्म हो गई थी ।1971 के दौरान  चीन देश को  संयुक्त राष्ट्र संघ  सुरक्षा परिषद  के द्वारा  स्थाई सदस्य चुना गया  था  और आज भी चीन संयुक्तत राष्ट्रसंघ सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य हैं । 1978 को माओत्से तुंग ने चीन में सांस्कृतिक क्रांति का आरंभ किया और इस क्रांति का दुष्प्रभाव चीन पर पड़ा ।

इस क्रांति में चीन के 50000 नागरिक मारे गए थे । 1989 के दौरान  डेंग जिया ओपिंग ने चीन में सुधार करके चीन को विकासशील बनानेेे का प्रयास किया  और चीन में  कई अध्यात्मिक  सुधार किए गए ।

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