फूल और कांटे पर कविता Hindi poem phool aur kaante

Hindi poem phool aur kaante

Hindi poem phool aur kaante-दोस्तों Phool Aur Kaante कविता महान कवि अयोध्या सिंह उपाध्याय जी ने लिखी है इस कविता में इस कवि ने एक संदेश दिया है कि इंसान किसी भी कुल का हो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता.अगर एक इंसान अच्छे कर्म करें तो वह महानता के शिखर पर जा सकता है उसके अच्छे कर्म ही उसे आगे ले जाते हैं.कभी कभी ऐसा होता है की एक ही जगह दो इन्सानो के जन्म होते है लेकिन उनमे गुण अलग अलग होते है इसके लिए अयोध्या सिंह उपाध्याय जी ने phool Aur Kaante का उदाहरण देकर एक कविता लिखी है चलिए पढ़ते हैं उनकी इस कविता को

Hindi poem phool aur kaante
Hindi poem phool aur kaante

है जन्म लेते जगत में एक ही
एक ही पौधा उन्हें है पालता
रात में उन पर चमकता चांद भी
एक ही सी चांदनी है डालता

मैंह उन पर है बरसता एक सा
एक सी उनपर हवाये है वही
पर सदा ही यह दिखाता है समय
ढंग उनके एक से होते नहीं

छेद कर काटा किसी की उंगलियां
फाड़ देता है किसी का वर वचन
और प्यारी तितलियों का पर कतर
भोर का है वेध देता श्याम तन

फूल लेकर तितलियों को गोद में
भोर को अपना अनूठा रस पिला
निज सुगंधी ओ निराले रंग से
है सदा देता कली दिल की खिला

खटकता है एक सबकी आंख में
दूसरा है सोहता सुर सीस पर
किस तरह कुल की बड़ाई काम दे
जो किसी में हो बड़प्पन की कसर

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