विवाह एक सामाजिक संस्था निबंध Hindi Essay on Vivah ek Samajik Sanstha

Hindi Essay on Vivah ek Samajik Sanstha

विवाह एक सामाजिक संस्था है, हमारे समाज को सही तरह करे से व्यवस्थित करने के लिए विवाह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विवाह एक ऐसा बंधन है जो हमारे समाज के लिए अति आवश्यक है, विवाह के इस बंधन में लड़का लड़की को पति पत्नी का दर्जा दिया जाता है और एक दूसरे के साथ जीवन को प्रेम पूर्वक व्यतीत करने का अधिकार दिया जाता है।

मनुष्य में यह विवाह के रीति रिवाज वास्तव में बहुत ही अच्छे है दरहसल मनुष्य एक सभ्य प्राणी है यह अपने वैवाहिक संबंध समाज के पूरे रीति-रिवाजों के साथ स्थापित करता है तभी उसको अपनी पत्नी के साथ जीवन यापन करना स्वीकारा जाता है।

Hindi Essay on Vivah ek Samajik Sanstha
Hindi Essay on Vivah ek Samajik Sanstha

अलग-अलग धर्मों में विवाह के कई रीति रिवाज होते है जो कुछ लोगों को पसंद है लेकिन कुछ लोगों को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं होते। हिंदुओं में विवाह के नाम पर कन्या वालों से दहेज की मांग की जाती है ऐसा महसूस होता है की लड़की वाला अपनी लड़की को बोझ समझकर किसी को बेच रहा हो। यह दहेज प्रथा बहुत ही बुरी प्रथा है जो काफी समय से हमारे समाज में चली आ रही है कई लोग विवाह के पहले ही दहेज की मांग करते हैं जिस वजह से लड़की वालों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

कई लोग ऐसे भी होते हैं जो विवाह होने के बाद अपनी बहुओ से दहेज की मांग करते हैं जिस वजह से लड़की के मां-बाप को या लड़की को काफी प्रताड़ना झेलनी पड़ती है और उनका वैवाहिक जीवन बहुत ही बुरी तरह से व्यतीत होता है। दहेज प्रथा की वजह से आज कल के कई विवाह ऐसे मालूम पड़ते हैं कि मानो एक पिता ने अपने घर में लड़की को जन्म देकर कोई गलती की हो।

हिंदुओं की यह दहेज प्रथा बहुत ही बुरी प्रथा है इसी तरह हम मुसलमानों के तीन तलाक की बात करें तो बात कुछ यूं है कि शादी के बाद मुसलमानों में यदि कोई मुसलमान तीन बार अपनी पत्नी से तलाक की बात कह दे तो उसका तलाक हो जाता है इससे विवाह के बाद पत्नी को कई परेशानी का सामना करना पड़ता है, पत्नी अपने पति के साथ डर डरकर जीवन यापन करती है, मुसलमानो में तो एक से ज्यादा भी विवाह करने का नियम है जिस वजह से पत्नी को जीवन में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है और अपना पूरा जीवन अपने पति के अधीन होकर उसको रहना पड़ता है।

विवाह वास्तव में इस लिए बनाया गया जिससे समाज का एक अच्छा निर्माण हो और समाज व्यवस्थित हो,मनुष्य अन्य पशुओं की तरह आपस में गलत ना करे और अपने रिश्ते के प्रति वफादार रहे इसी वजह से विवाह को किसी धार्मिक त्योहार की तरह काफी उत्साह के साथ, धूमधाम के साथ मनाया जाता है जिससे हर किसी को उसका ध्यान रहे और वह अपने वैवाहिक जीवन को पूरी तरह ईमानदारी के साथ व्यतीत करें।

विवाहित जीवन को यदि हम सही तरह से यापन करते हैं तो वास्तव में हमारे जीवन में काफी बदलाव आ सकता है, आपका जीवन साथी हर पल आपके साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए तैयार रहता है। आजकल हमारे समाज में विवाह ज्यादातर एक ही जाति या धर्म के अंतर्गत होता है यदि वह किसी अन्य जाति या धर्म के व्यक्ति के साथ होता है तो कई तरह की सामाजिक परेशानियों का पति पत्नी को सामना करना पड़ता है, उनके परिवार वाले भी उन्हें कई तरह से प्रताड़ित करते हैं वास्तव में आज का विवाह एक सामाजिक संस्था बन चुका है।

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