गुरु और शिष्य का संबंध Guru shishya sambandh in hindi

Guru shishya sambandh in hindi

गुरु और शिष्य का संबंध par nibandh-हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सभी,दोस्तों आज का हमारा यह आर्टिकल Guru shishya sambandh in hindi आप सभी के लिए बहुत ही मददगार है दोस्तों हम गुरु और शिष्य के ऊपर पहले भी कुछ आर्टिकल लिख चुके हैं जिन्हें आपने पढ़ा और हमें अच्छा रिस्पोंस दिया.हमारे जीवन में गुरु सबसे बढ़कर होता है अगर एक इंसान गुरु के महत्व को समझें और गुरु के बताए हुए मार्ग पर चले तो वाकई में वह बहुत आगे बढ़ सकता है.

जीवन में गुरु जरूर होना चाहिए क्योंकि गुरु हमें जीवन में सही और गलत के मार्ग पर चलना सिखाता है हमें जीवन को समझने का ज्ञान कराता है जीवन में गुरु का बहुत ही महत्व है आज हमारे इस आर्टिकल में पढ़ेंगे की गुरु और शिष्य का संबंध किस तरह का होना चाहिए चलिए पढ़ते हैं हमारे आज के आर्टिकल को

Guru shishya sambandh in hindi
Guru shishya sambandh in hindi

इस दुनिया में बहुत सारे रिश्ते होते हैं जैसे कि माता पिता का रिश्ता,भाई बहनों का रिश्ता,पति पत्नी का रिश्ता,बाप बेटे का रिश्ता और गुरु शिष्य का रिश्ता इन सभी संबंधों में हमारे देश में गुरु और शिष्य का रिश्ता प्रमुख माना जाता है भले ही गुरु और शिष्य का रिश्ता खून का रिश्ता नहीं होता लेकिन यह रिश्ता सबसे बढ़कर होता है गुरु हमें शिक्षा देता है,गुरु ही हमे सही मार्ग पर चलने की सलाह देता है गुरु और शिष्य का संबंध बहुत अच्छे होने चाहिए.गुरु को चाहिए की वह अपने शिष्य को सही मार्ग पर चलने की सलाह दें.

अगर शिष्य किसी गलत मार्ग पर चल रहा है तो गुरू को चाहिए कि वह अपने शिष्य को किसी तरह उस गलत मार्ग पर चलने से रोकें और उसको एक सही मार्ग पर चलने की सलाह दें.गुरु को अपने हर एक शिष्य को समान समझना चाहिए.गुरु को किसी भी शिष्य को जाति, धर्म या किसी भी कारण के चलते अपने शिष्य को कमजोर नहीं समझना चाहिए.गुरु को अपने शिष्य के साथ अच्छे संबंध रखना चाहिए इन कारणों के चलते किसी भी शिष्य के साथ शिक्षा के मामले में भेदभाव नहीं करना चाहिए बल्कि सभी को एक समान समझते हुए शिक्षा देना चाहिए.

वही शिष्य का कर्तव्य होता है कि वह अपने गुरु पर विश्वास करें क्योंकि जब एक शिष्य अपने गुरु पर विश्वास करेगा तभी वह गुरु के द्वारा दी हुई शिक्षा को अपने जीवन में सही तरह से अपनाकर उसका लाभ प्राप्त कर सकेगा.शिष्य को चाहिए कि अपने गुरु की हर बात को माने,उनकी आज्ञा का पालन करें यही एक अच्छे शिष्य की निशानी है जब भी उसको अपना गुरु दिखें तो उनको प्रणाम करें,उनके पैर छुए यही हमारा कर्तव्य होता है शिष्य को चाहिए कि गुरु से कभी किसी तरह का विवाद ना करें

अगर गुरु के द्वारा बताई हुई बात उसको समझ में नहीं आती है तो वह अपने गुरु से उस बात को दोबारा पूछे.किसी शिष्य ने अगर अपना गुरु बना लिया है तो गुरु पर पूरी तरह विश्वास करें और हर समय गुरु की आज्ञा का पालन करें क्योकि गुरु और शिष्य का संबंध हर संबंध से बढ़कर होता है.

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गुरु और शिष्य का संबंध ऐसा होना चाहिए जिसमें बिल्कुल भी शक ना हो यानी गुरु जो भी आपको बताये उसका पूरी तरह से पालन करना चाहिए,अपने गुरु पर कभी भी शक नहीं करना चाहिए जिसको आपने गुरु माना है उसकी हर आज्ञा का पालन करना आपका कर्तव्य है.बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो अपने गुरु की बातों पर शक करने लगते हैं सोचते हैं कि ऐसा होगा या नहीं.आप ने जिसको अपना गुरु बनाया है उस पर आपको बिल्कुल भी शक नहीं करना चाहिए

क्योंकि गुरु हमेशा अपने शिष्यों का भला चाहता है गुरु और शिष्य के संबंध बहुत ही अच्छे होने चाहिए.गुरु के कुछ शिष्य ऐसे होते हैं जिनके पास पैसा होता है उनके मां बाप उनकी हर तरह से मदद कर सकते हैं लेकिन कुछ शिष्य ऐसे भी होते हैं जिनके पास पैसा नहीं होता वह गरीब होते हैं गुरु और शिष्य का संबंध में पैसा बीच में नहीं आना चाहिए.कभी भी गुरु को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह शिष्य गरीब है उसको अच्छी शिक्षा आगे बढ़ने के लिए ना दूं.गुरु और शिष्य का संबंध तो ऐसा होना चाहिए जिसमें इस तरह की भावना ना हो.

प्राचीन काल से ही हम सभी को गुरु के महत्व को समझाया जाता है प्राचीन काल में एक गुरु अपने शिष्यों को अच्छी और उच्च शिक्षा देते थे उन्हें अपने गुरुकुल में ही रहने के लिए जगह देते थे जब तक की शिष्य शिक्षा ग्रहण पूरी न कर ले

गुरु और शिष्य का संबंध ऐसा होना चाहिए कि गुरु अपनी दी हुई शिक्षा के बदले अगर कुछ गुरु दक्षिणा मांगे तो शिष्य का कर्तव्य है कि वह अपने गुरु की मांग को हर तरह से पूरा करें चाहे उसके लिए उसे कुछ भी करना क्यों ना पड़े इसके लिए महाभारत में भी एक वृतांत बताया गया है जिसमें एकलव्य द्रोणाचार्य से छुप छुप के शिक्षा ग्रहण करता है और जब द्रोणाचार्य को इस बारे में पता लगता है तो वह एकलव्य से गुरु दक्षिणा मांगते हैं वह गुरु दक्षिणा में एकलव्य का अंगूठा मांग लेते हैं

एकलव्य जानता है कि अंगूठा देने के बाद इस धनुष विद्या का कोई मतलब नहीं निकलेगा लेकिन फिर भी उसने बिना सोचे समझे अपने गुरु दक्षिणा के रूप में अंगूठे को दे दिया वाकई में हमारे देश में गुरु और गुरु दक्षिणा सबसे ज्यादा मायने रखती हैं हम सभी को जीवन में गुरु के महत्व को समझना चाहिए गुरु और शिष्य का संबंध बहुत ही अच्छा होता है.हमें गुरु की इज्जत करना चाहिए गुरु की हर आज्ञा का पालन करना चाहिए क्योंकि गुरु ही है जो हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है

जिस तरह से एक कुम्हार मिट्टी को आकार प्रदान करके उसको मूल्यवान बनाता है उसी प्रकार एक गुरु अपने शिष्य को ज्ञान देकर उसे दुनिया का सबसे मूल्यवान इंसान बना सकता है और जिंदगी में कामयाबी तक पहुंचा सकता है इसलिए गुरु और शिष्य का संबंध सबसे बढ़कर है गुरु ही हर संबंध को अच्छी तरह से निभाना सिखाता है.

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