गुजरी महल ग्वालियर का इतिहास Gujari mahal gwalior history in hindi

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दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से गुजरी महल ग्वालियर के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं । चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और ग्वालियर के गुजरी महल के इतिहास के बारे में जानते हैं ।

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गुजरी महल का इतिहास – गुजरी महल का इतिहास काफी पुराना है । इस महल के बारे में जो भी जान लेता है वह आनंदित हो जाता है और ग्वालियर के गुजरी महल को देखने के लिए अवश्य जाता है । जब कोई गुजरी महल को देखने के लिए पहुंचता हैं तब उसे वहां का इतिहास जानकर बड़ा अच्छा लगता है । गुजरी महल का निर्माण 1486 इसवी से 1516 ईसवी के बीच में करवाया था । इस महल के निर्माण कार्य का श्रय ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर को जाता है । उन्हीं के नेतृत्व में यह गुजरी महल बनवाया गया था ।

गुजरी महल की लंबाई 31 मीटर है और इसकी चौड़ाई 7 मीटर है । इस महल के अंदर एवं बाहर की सुंदरता देखने के लायक है । यह महल 15 वी शताब्दी के दौरान बनवाया गया था । इस महल का इतिहास काफी रोचक एवं दिलचस्प है । इस महल के बारे में जानने की उत्सुकता काफी लोगों को होती है  । यह महल ग्वालियर के दुर्ग के भूतल में स्थित है । इस महल का नाम गुजरी महल मानसिंह तोमर की पटरानी मृगनयनी के नाम पर रखा गया था । इस महल के आंतरिक भाग में एक बहुत बड़ा एवं सुंदर आंगन है । उस आंगन में दूबा लगी हुई है ।

आंगन के किनारों पर फूलों के बागान हैं जिससे इस गुजरी महल की सुंदरता और भी अच्छी लगती है । जब हम इस महल को देखने के लिए जाते हैं तब हमें बहुत अच्छा लगता है । इस महल की पुरानी सभ्यता और संस्कृति को देखकर हमारा मन खुशियों से भर जाता है । 15 वी शताब्दी के दौरान ग्वालियर के तोमर वंश के राजा मानसिंह बहुत ही शक्ति शाली राजा थे । उन्होंने अपनी ताकत से कई लड़ाइयां जीती थी । वह किसी भी बात को जब एक बार अपने मन में ठान लेते थे तो वह उसको पूरा अवश्य करते थे ।

तोमर वंश के राजा मानसिंह तोमर ने मृगनयनी के लिए यह महल बनवाया था । इस महल के अंदर आकृतियों के रूप में मयूर , हाथी , झरोखे बनवाए थे । महल के बाहरी भाग में गुम्मतकार छतरियां भी बनाई थी जिसकी सुंदरता आज ही अच्छी लगती है । यह महल आज भी सुरक्षित है । जो भी इस महल को देखने के लिए जाता है वह आनंद की अनुभूति अवश्य करता है । गुजरी महल के मुख्य द्वार पर फारसी भाषा में शिलालेख लिखा गया है । इस महल को बनाने के बाद राजा मानसिंह तोमर ने यह महल मृगनयनी को सौंप दिया था ।

शादी के बाद मृगनयनी और राजा मानसिंह तोमर महल में रहने लगे थे ।राजा मानसिंह तोमर ने मृगनयनी के कहने पर राई नामक नदी से पाइप डलवा कर पानी महल तक मंगवाया था क्योंकि रानी राई नदी का पानी ही पीती थी । रानी का यह मानना था कि उनकी यह सुंदरता राई नदी के पानी को पीने से ही आई थी और उसी सुंदरता को देखकर राजा उन पर मोहित हो गए थे । महल के निर्माण के बाद तोमर वंश के राजा मानसिंह तोमर ने अपना सारा जीवन महल में बिताया था ।

जब तोमर वंश के राजा मानसिंह तोमर का देहांत हो गया था तब मुगल शासकों ने यहां पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया था । इस तरह से गुजरी महल का इतिहास रहा है ।

गुजरी महल केंद्रीय पुरातत्व संग्रहालय में तब्दील – जब तोमर वंश के राजा मानसिंह तोमर का देहांत हो गया था तब इस महल पर मुगल शासकों का शासन हो गया था ।जब भारत देश में ब्रिटिश शासन आया तब ब्रिटिश शासकों ने इस महल पर अपना राज स्थापित कर लिया था । ब्रिटिश शासन के दौरान इस महल को केंद्रीय पुरातत्व संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया था । सन 1922 को ब्रिटिश शासन के जाने-माने अधिकारियों के नेतृत्व में गुजरी महल को केंद्रीय पुरातत्व संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया था ।

इसके बाद सभी इस महल को , गुजरी महल को केंद्रीय पुरातत्व संग्रहालय के नाम से जानने लगे थे । सरकारी दस्तावेजों में इस महल का नाम केंद्रीय पुरातत्व संग्रहालय नाम रखा गया है । जब इस गुजरी महल को संग्रहालय बना दिया गया था तब इस महल के कई बदलाव किए गए थे । इस महल में मुरैना से लाई गई एक नायिका की कलाकृति वाली मूर्ति भी रखी गई थी जिससे इस महल की सुंदरता और भी अच्छी लगने लगी थी ।

आज का गुजरी महल – आज का गुजरी महल केंद्रीय पुरातत्व संग्रहालय के नाम से जाना जाता है । इस संग्रहालय को 1920 में स्थापित किया गया था और इस गुजरी महल को संग्रहालय बनाने का श्रेय एम वी गर्दे को जाता है । उन्हीं के नेतृत्व में गुजरी महल में संग्रहालय का निर्माण कराया गया था । यह संग्रहालय भारत के सभी दर्शकों के लिए 1922 को खोला गया था । जब इस संग्रहालय को दर्शकों के लिए देखने के लिए खोला गया था तब दूर-दूर से दर्शक इस गुजरी महल और संग्रहालय को देखने के लिए आए थे ।

काफी भीड़ इस गुजरी महल को देखने के लिए लगी थी । यह गुजरी महल भीड़ वाले स्थान पर स्थित है । इस कारण से इस महल को देखने के लिए काफी भीड़ प्रतिदिन लगती है । जो भी पर्यटक इस महल को देखने के लिए जाता है वह इस महल को देखकर मोहित हो जाता है । महल के अंदर लगभग 28 कमरों में मध्य प्रदेश के ईसा पूर्व समय से लेकर 17 वी शताब्दी तक के पुरातात्विक धरोहरो की कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया है ।

गुजरी महल के अंदर एवं बाहर हस्तकला एवं चित्रकला की आकृतियां – महल को बनाने के लिए तोमर वंश के राजा मानसिंह तोमर ने किसी भी तरह की कोई भी कमी नहीं रखी थी । मानसिंह तोमर ने इस गुजरी महल को बनवाने के लिए एक से एक चित्रकार बुलाए थे और महलों के अंदर एवं बाहर चित्रकारी का प्रदर्शन करवाया था ।हस्तकला भी इस महल में देखने को मिलती है । हर तरह की डिजाइन महल के अंदर है । जब हम हस्तकला से बनी हुई मूर्तियां देखते हैं तब हमें बड़ा गर्व महसूस होता है और हम अपने इतिहास पर गर्व करते हैं ।

महल के अंदर मोर , हाथी एवं कई मूर्तियां स्थापित हैं और उन मूर्तियों की कलाकृति बहुत सुंदर है । जिसने भी उन मूर्तियों को बनाया है वह बहुत ही अच्छा कलाकार होगा । उसकी कलाकृति उस मूर्ति में झलकती हुई दिखाई देती है । गुजरी महल में जितने भी गुंबद हैं उन गुंबद की डिजाइन एक अच्छे बेहतर कलाकार ने की होगी । जिसकी सुंदरता देखने में बहुत अच्छी लगती है ।

गुजरी महल एवं केंद्रीय पुरातत्व संग्रहालय में रखी संग्रहित सामग्री – गुजरी महल एवं केंद्रीय पुरातत्व संग्रहालय में कई मूर्तियां , पाषाण प्रतिमाएं , लघु चित्र , कांस्य प्रतिमाएं , सिक्के , अस्त्र शास्त्र , मृण्मई मूर्तियां एवं सबसे अच्छी और मन मोह लेने वाली मूर्ति ग्यारसपुर की शालभंजिका  रखी हुई है । इस महल के संग्रहालय में विदिशा के पवाया एवं विसनगर से लाई गई महत्वपूर्ण पाषाण प्रतिमाएं भी  में रखी गई हैं । जिसको देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं ।

देश के साथ-साथ विदेशों के पर्यटक भी इस केंद्रीय पुरातत्व संग्रहालय को देखने के लिए आते हैं और अपने कैमरे में इसकी सुंदरता को उतार कर ले जाते हैं । यह गुजरी महल एवं केंद्रीय पुरातत्व संग्रहालय मध्य प्रदेश का सबसे पुराना संग्रहालय है । इसकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है । इस संग्रहालय की सुंदरता को लेकर सरकार के द्वारा समय-समय पर निर्माण कार्य कराए जाते हैं । जिससे इसकी सुंदरता और भी अच्छी लगने लगी है ।

इस गुजरी महल में मध्य प्रदेश के सभी पुरातत्विक धरातल की कलाकृतियों का प्रदर्शन भी किया गया है । इस के माध्यम से मध्य प्रदेश की सुंदरता को बताने की कोशिश की गई है । जब कोई व्यक्ति इस संग्रहालय में धरातल की कलाकृतियों को देखता है तब वह मध्य प्रदेश की सुंदरता की कामना कर लेता है । 1922 के बाद इस महल का नामकरण कर दिया गया था और सभी इस महल को पुरातत्व संग्रहालय के नाम से जानने लगे थे ।

गुजरी महल से जुड़ी एक प्रेम कहानी – ग्वालियर के सबसे साहसी राजा तोमर वंश के राजा मानसिंह तोमर बहुत ही शक्तिशाली और ताकतवर राजा थे । उनको शिकार खेलना बहुत पसंद था । वह समय-समय पर शिकार खेलने के लिए जाते थे । एक दिन तोमर वंश के राजा मानसिंह तोमर ने राई नदी के आसपास में शिकार करने का फैसला किया था और बंदूक उठाकर शिकार खेलने के लिए निकल पड़े थे । जब वह राई नदी के आसपास पहुंचे तब वह थक चुके थे ।

राजा मानसिंह ने आराम करने का फैसला किया और एक बरगद के पेड़ के नीचे आराम करने के लिए लेट गए थे । उस समय राई नदी के किनारे पर एक सुंदर , अति सुंदर ग्वालन अपने पशुओं को पानी पिला रही थी । जब जंगली जानवर उस सुंदर ग्वालन के पशुओं को परेशान कर रहे थे तब वह ग्वालन  बड़ी दृढ़ता से उन जंगली पशुओं एवं जानवरों को वहां से भगा रही थी । राजा मानसिंह तोमर ने जब उस सुंदर कन्या को देखा तो वह आश्चर्यचकित रह गया और उसकी सुंदरता पर मोहित हो गया ।

राजा मानसिंह ने जब लड़की को जंगली जानवरो को भगाते हुए देखा तब राजा मानसिंह तोमर ने यह सोचा की लड़की कितनी साहसी है । यदि इससे शादी कर ली जाए तो इसके द्वारा जो बच्चे होंगे वह भी कितने साहसी और सुंदर होंगे । यह लड़की बहुत सुंदर है । इसकी सुंदरता बहुत अच्छी है । उसी समय तोमर वंश के राजा मानसिंह तोमर ने उस कन्या से विवाह करने का फैसला कर लिया था । उस कन्या का नाम मृगनयनी था ।

वह मृगनयनी राई गांव की रहने वाली थी । मृगनयनी का संबंध गुज्जर समाज से था । जब राजा मृगनयनी के पास विवाह का प्रस्ताव लेकर पहुंचे तब मृगनयनी राजा मानसिंह तोमर से कहने लगी कि मैं एक नीची जाति की लड़की हूं और तुम राजा हो । तुम्हारा और मेरा मेल नहीं हो सकता है । इसके बाद राजा मानसिंह तोमर ने मृगनयनी को समझाया कि मैं तुम्हारी सुंदरता पर मोहित हो गया हूं । मैं तुमसे प्यार करने लगा हूं । मैं जाति भेदभाव को नहीं मानता हूं ।

इसलिए मैं तुमसे विनती करता हूं कि तुम मेरे इस विभाग के प्रस्ताव को स्वीकार कर लो । रानी थोड़ी देर तक चुपचाप रही । राजा मानसिंह तोमर ने मृगनयनी से कहा कि तुम मेरे सवाल का जवाब दो । मृगनयनी में बहुत देर तक सोचने के बाद राजा मानसिंह तोमर से कहा कि मैं तुमसे विवाह करने के लिए तैयार हूं । परंतु मेरी मुख्य रूप से तीन शर्ते होंगी । यदि तुम उन तीन शर्तों को मान लो तो मैं विवाह करने के लिए तैयार हूं । राजा मानसिंह तोमर ने मृगनयनी  से कहा की मैं तुमसे विवाह करने के लिए कुछ भी शर्त मान सकता हूं ।

अब तुम तुम्हारी शर्तों के बारे में बताओ । रानी ने राजा मानसिंह तोमर के सामने विवाह की निम्न तीन शर्ते रखी । रानी मृगनयनी की पहली शर्त थी कि मैं शादी के बाद सिर्फ राई नदी का ही पानी पियूंगी । राजा ने मृगनयनी से पूछा ऐसा क्यों तो मृगनयनी ने राजा मानसिंह तोमर को जवाब दिया कि मेरी जो सुंदरता आप देख रहे हैं यह सुंदरता इस नदी के पानी को पीने से ही आई थी । इसलिए मैं शादी के बाद इसी नदी का पानी पियूंगी । राजा ने मृगनयनी की पहली शर्त को मान लिया था ।

राजा मानसिंह तोमर ने मृगनयनी को अपनी दूसरी शर्त बताने के लिए कहा । मृगनयनी ने अपनी दूसरी शर्त यह रखी थी कि वह सबसे अलग शांत इलाके में रहना चाहती है । राजा मानसिंह तोमर ने रानी मृगनयनी की दूसरी शर्त को भी मान लिया था । राजा ने मृगनयनी को तीसरी शर्त बताने के लिए कहा था । मृगनयनी ने राजा मानसिंह तोमर को तीसरी शर्त बताई और वह शर्त यह थी कि वह राजा के साथ हर युद्ध क्षेत्र में जाएगी । वह कभी भी महल में अकेली नहीं रहेगी ।

आप जिस युद्ध में जितने दिन लड़ेंगे वह हमेशा साथ में खड़ी रहेंगी । राजा मानसिंह तोमर ने मृगनयनी कि तीनों शर्तें मान ली थी । इसके बाद मानसिंह तोमर ने रानी की शर्त के मुताबिक ग्वालियर दुर्ग के भूतल में गुजरी महल बनाने का फैसला किया । रानी की शर्त को पूरी  करने के लिए ग्वालियर के दुर्ग में एक आलीशान महल बनाया और उस महल का नाम अपनी रानी मृगनयनी के नाम पर रखा था । शादी के बाद दोनों उसी गुजरी महल में रहने लगे थे ।

राजा मानसिंह तोमर ने रानी मृगनयनी की दूसरी शर्त को पूरा करने के लिए राई नदी से गुजरी महल तक एक पाइपलाइन बिछाई थी । जिसके माध्यम से राई नदी से डायरेक्ट पानी गुजरी महल तक आता था और उसी पानी को मृगनयनी पिया करती थी । इस तरह से रानी की तीनों शर्तों को राजा मानसिंह तोमर ने पूरा किया था । इसीलिए यह गुजरी महल ग्वालन और राजा की प्रेम कहानी के लिए भी जाना जाता है ।

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