गोल्ड मोनेटाईजेशन स्कीम की जानकारी gold monetisation scheme in hindi

gold monetisation scheme in hindi

दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम की जानकारी को । चलिए अब हम पढ़ेंगे गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम की जानकारी को ।

gold monetisation scheme in hindi
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image source –https://www.icicibank.com/Personal

गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई है । गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम एक स्वर्ण मुद्रीकरण योजना है । यह योजना काफी लोगों को पसंद आई है । यह योजना 2015 को भारत सरकार के द्वारा प्रारंभ की गई थी । 5 नवंबर 2015 से यह योजना प्रारंभ कर दी गई थी । भारत सरकार ने बैंकों से यह आग्रह किया था कि सभी बैंक इस योजना में हिस्सा लें । जो बैंक इस योजना में हिस्सा लेगा उसको भारत सरकार की तरफ से 2.5% कमीशन दीया जाएगा । बहुत सारे बैंकों ने इस योजना में भाग लिया था । स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के तहत कोई भी व्यक्ति 30 ग्राम या इससे अधिक सोना बैंक में जमा कर सकता है ।

जिस तरह से बैंक हमें चालू खाते एवं बचत खाते में  जमा पैसों के हिसाब से ब्याज देता है उसी तरह से हमें सोना बैंक में रखने पर ब्याज दिया जाएगा । इस योजना से काफी लोगों को अभी तक फायदा पहुंच चुका है ।  जो सोना हमारे घरों में सुरक्षित नहीं था इस योजना से हमारा सोना भी सुरक्षित रहेगा और हमें उस सोने पर ब्याज भी मिलेगा । यदि हम 5 से 10 साल के लिए सोना बैंक में रखते हैं और हमें बीच में ही पैसों की आवश्यकता पड़ जाती है या फिर सोना वापस लेने की आवश्यकता पड़ जाती है तब हम 3 साल के बाद वह पैसा और सोना वापस ले सकते हैं ।

जब हम सोना बैंक में दीर्घकालिन समय के लिए जमा कराते हैं और हमें बीच में ही पैसों की आवश्यकता है तो हम 5 साल के बाद अपना पैसा या सोना वापस ले सकते हैं । ग्राहक को इस योजना का लाभ लेने के लिए कम से कम 30 ग्राम सोने की आवश्यकता होती है । अधिकतम सोना बैंक में रखने की सीमा निश्चित नहीं की गई है । 30 ग्राम से लेकर चाहे जितना सोना आप बैंक में रख सकते हो और इस योजना के माध्यम से ब्याज प्राप्त कर सकते हो । यदि  कोई ग्राहक इस योजना का लाभ लेना चाहता है तो वह बैंक में जाकर एक फॉर्म भर दे । फॉर्म भरने के बाद  बैंक के अधिकारियों के द्वारा उस सोने की जांच कराई जाती है ।

परिशोधन सोने की निष्पक्ष जांच करता हैं और उस सोने के बजन का प्रमाण पत्र और शुद्धीकरण का प्रमाण पत्र ग्राहक को दिया जाता है । उस प्रमाण पत्र को ग्राहक बैंक में जमा कराता है और उस प्रमाण पत्र की एक फोटो कॉपी अपने पास रखता है । इस योजना के द्वारा सोने का बजन 1 ग्राम के 3 दशमलव तक व्यक्त किया जाता है । परीशोधक के लाइसेंस को भी भारत सरकार के द्वारा मान्यता दी जाती है । भारत सरकार से मान्यता प्राप्त करने के बाद ही सोने की जांच परिशोधन से  कराई  जाती है । बैंक के द्वारा उसी व्यक्ति से सोने की जांच कराई जाती है जिसके पास भारत सरकार के द्वारा मान्यता प्राप्त लाइसेंस होता हैं ।

यह इसलिए किया गया है कि ग्राहक के साथ किसी भी तरह की कोई भी धोखाधड़ी ना की जाए । भारत सरकार के द्वारा यह योजना इसीलिए प्रारंभ की गई थी क्योंकि हमारे भारत देश में ना जाने कितना सोना कई घरों में रखा हुआ है । घरों में सोना रखने से चोरी का डर हमें लगता रहता है । इस योजना से हमें सोने की चोरी के डर से मुक्ति मिलेगी और साथ में ब्याज के तौर पर पैसा भी मिलेगा ।  जो ग्राहक दीर्घकालीन के लिए इस योजना का लाभ लेता है उसको  5 वर्ष के बाद  इस योजना  को बंद कराने का अधिकार होता है  । 5 वर्ष से पहले वह इस योजना को समाप्त नहीं करा सकता है । इस योजना से शहर  एवं गांव के लोग जुड़े हैं । कई लोगों को इस योजना के द्वारा ब्याज मिल रहा है । यह योजना स्वर्ण मुद्रीकरण योजना बहुत ही सफल रही है ।

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